CG Legislative Assembly Ajay Chandrakar: छत्तीसगढ़ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर गरजे विधायक अजय चंद्राकर, कहा- ऐसा विपक्ष किस काम का जो सिर्फ औपचारिकता पूरी करे

CG Legislative Assembly Ajay Chandrakar: छत्तीसगढ़ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्तापक्ष की तरफ से जोरदार मोर्चा संभाला गया। भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए विपक्ष की भूमिका पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने सदन में पिछली सरकार के कामकाज की तुलना ऐतिहासिक लुटेरों से करते हुए कई गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों के आंकड़े पेश किए। चंद्राकर के इस आक्रामक भाषण ने सदन के भीतर राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गरमा दिया।

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ऐसा विपक्ष किस काम का जो सिर्फ कागजी औपचारिकता पूरी करे

अविश्वास प्रस्ताव का जवाब देते हुए भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को एक सजग प्रहरी की भूमिका निभानी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान विपक्ष इस जिम्मेदारी को निभाने में पूरी तरह विफल रहा है और यह अविश्वास प्रस्ताव महज एक औपचारिकता पूरी करने के लिए लाया गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों का खुद का पिछला रिकॉर्ड खराब रहा है, उन्हें वर्तमान सरकार पर उंगली उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

पिछली सरकार का कामकाज इतिहास के नादिर शाह के शासन जैसा था

अजय चंद्राकर ने इतिहास का उदाहरण देते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में गजनवी, तैमूर और अब्दाली जैसे कई आक्रमणकारियों का जिक्र आता है, लेकिन दिल्ली में सबसे बड़ी लूट नादिर शाह के समय हुई थी। चंद्राकर ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ की पिछली सरकार का रवैया भी ठीक उसी तरह का था, जिसने राज्य के खजाने और संसाधनों का बेतरतीब दोहन किया। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से पूछा कि उनकी वफादारी छत्तीसगढ़ की जनता के प्रति है या किसी एक विशेष राजनीतिक परिवार के प्रति।

फिल्म धुरंधर के जमील जमाली से की नेता प्रतिपक्ष महंत के राजनीतिक रुख की तुलना

सदन में चर्चा के दौरान चंद्राकर ने फिल्मी किरदारों का जिक्र करते हुए नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत पर निशाना साधा। उन्होंने पुरानी फिल्म धुरंधर के एक किरदार जमील जमाली का उदाहरण दिया, जो हर गुट के साथ अपनी सुविधा के अनुसार पाला बदल लेता था। चंद्राकर ने आरोप लगाया कि महंत ने पहले अंबिकापुर में एक वरिष्ठ नेता के चेहरे पर चुनाव लड़ने की बात कही थी, लेकिन रायपुर आते ही दूसरे गुट के बयान के बाद अपना रुख बदल लिया। उन्होंने इसे कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी का नतीजा बताया।

तीन साल तक लापता रहे पार्टी कोषाध्यक्ष पर बीजेपी विधायक का तीखा तंज

संगठनात्मक स्तर पर कांग्रेस को घेरते हुए भाजपा विधायक ने एक अनोखा दावा किया। उन्होंने कहा कि देश के राजनीतिक इतिहास में यह अपनी तरह का पहला उदाहरण होगा जहां किसी राष्ट्रीय पार्टी का राज्य कोषाध्यक्ष तीन साल तक लगातार लापता या फरार रहा हो। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना किसी वित्तीय प्रभारी के आखिर इतने लंबे समय तक पार्टी की गतिविधियां कैसे संचालित होती रहीं। चंद्राकर ने कहा कि आईना दिखाने की कोशिश करने वाले दल को पहले अपने संगठन के भीतर झांकना चाहिए।

टीएस सिंहदेव के पुराने पत्र और 8 लाख गरीबों के मकान रोकने का सच आया सामने

प्रशासनिक विफलताओं का जिक्र करते हुए चंद्राकर ने पूर्व पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव की उस पुरानी चिट्ठी का हवाला दिया जो उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री को लिखी थी। उस पत्र में सिंहदेव ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया था कि राज्य सरकार द्वारा वित्तीय सहयोग न मिलने के कारण गरीबों के लिए स्वीकृत 8 लाख प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण नहीं कराया जा सका। चंद्राकर ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार में विभागीय मंत्रियों को भरोसे में लिए बिना मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटियां बनाकर समानांतर व्यवस्था चलाई जा रही थी।

बोधघाट परियोजना और रबी फसल के नाम पर 12 करोड़ रुपये खर्च करने का आरोप

आर्थिक अनियमिताओं का ब्यौरा देते हुए भाजपा विधायक ने बस्तर की बहुचर्चित बोधघाट सिंचाई परियोजना का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के मुखिया ने इस योजना को हर हाल में शुरू करने की बड़ी-बड़ी बातें कही थीं, लेकिन बिना कोई ठोस काम शुरू किए ही परामर्श और प्रचार में 12 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। इसी तरह रबी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने के वादे को भी आधा-अधूरा छोड़ दिया गया और हर मोर्चे पर काम को सबलेट यानी निजी हाथों में सौंप दिया गया।

पीएससी भर्ती और भारतमाला परियोजना के जमीन अधिग्रहण पर स्थिति साफ की

युवाओं के भविष्य और रोजगार से जुड़े मुद्दे पर बोलते हुए चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के कथित भर्ती घोटाले पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती शासन में एक ही परीक्षा केंद्र के एक छोटे से कमरे से 35 प्रभावशाली लोगों के करीबियों का चयन हो गया था, जिसकी जांच अब साय सरकार सीबीआई से करा रही है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतमाला सड़क परियोजना के लिए जमीन का विवादित अधिग्रहण पिछली सरकार के समय हुआ था और वर्तमान सरकार ने एक भी नई जमीन का अधिग्रहण इस तरह से नहीं किया है।

गोधन न्याय योजना में सेस के 2713 करोड़ रुपये की खुली लूट का दावा

ग्रामीण विकास की योजनाओं पर हमला जारी रखते हुए चंद्राकर ने गोधन न्याय योजना के वित्तीय आंकड़ों को सदन के पटल पर रखा। उन्होंने दावा किया कि राज्य के विभिन्न उपकरों से मिले 2713 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी के नाम पर बिना किसी उचित वित्तीय ऑडिट के खर्च कर दिया गया। पैरा ढुलाई में 53 करोड़ और वर्मी कंपोस्ट के नाम पर 125 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने तंज किया कि सरकारी खजाने की ऐसी खुली लूट पहले कभी नहीं देखी गई जहां बहते हुए गोबर का कोई हिसाब ही न हो।

4 महीने में 6 ओलंपिक कराने और बेरोजगार की परिभाषा पर 2 करोड़ फूंकने का आरोप

खेल विभाग की गतिविधियों पर टिप्पणी करते हुए चंद्राकर ने पूर्व खेल मंत्री के दावों को हास्यास्पद बताया। उन्होंने पूछा कि तकनीकी रूप से महज 4 महीने के भीतर छह ओलंपिक स्तर के खेल आयोजन कैसे संभव हो सकते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पांच साल के कार्यकाल में विभाग युवाओं के लिए बेरोजगारी की सही परिभाषा तक तय नहीं कर पाया और इस मामूली काम के लिए एक गैर-मान्यता प्राप्त निजी कंपनी को 2 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसके अलावा 12 करोड़ रुपये की लागत से हुआ सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण भी सदन में पेश नहीं किया गया।

कर्ज चुकाने के लिए कर्ज लेने वाली सरकार से साय सरकार के विजन की तुलना

अंतिम में अजय चंद्राकर ने राज्य की वित्तीय स्थिति की तुलना की। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार छत्तीसगढ़ के इतिहास की एकमात्र ऐसी सरकार थी जिसने पुराने कर्जों का ब्याज और किश्तें पटाने के लिए बाजार से नया कर्ज लिया, जिससे राज्य आर्थिक संकट में फंस गया। इसके विपरीत वर्तमान विष्णुदेव साय सरकार एक स्पष्ट आर्थिक विजन के साथ काम कर रही है जहां गरीबों को 18 लाख आवास देने, नए मेडिकल कॉलेज खोलने और समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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