Kotwar Land Case Bilaspur High Court: क्या सेवा भूमि पर कोटवार कर सकते हैं मालिकाना दावा? जानिए हाईकोर्ट का आदेश

CG High Court Kotwar Land Case Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने कोटवारों और उनके उत्तराधिकारियों की सेवा भूमि पर मालिकाना हक से जुड़े एक अहम मामले पर बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन जजों की फुल बेंच ने स्पष्ट किया है कि जमींदारी उन्मूलन से पहले मालगुजारों या जमींदारों द्वारा कोटवारों को सेवा के बदले दी गई जमीन पर कोटवार या उनके वारिस भू-स्वामी अधिकार का दावा नहीं कर सकते।

दो डिवीजन बेंचों के फैसलों में विरोधाभास के बाद फुल बेंच को सौंपा गया मामला

यह मामला कबीरधाम जिले के गजेंद्र दास और जरहाटोला निवासी सुकृत दास द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने पूर्व के कुछ अदालती आदेशों का हवाला देते हुए सेवा भूमि पर मालिकाना हक देने की मांग की थी। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि पूर्व में दो अलग-अलग डिवीजन बेंचों द्वारा दिए गए निर्णयों में परस्पर विरोधाभास था। इस स्थिति को देखते हुए मामले को अंतिम निर्णय के लिए पूर्ण पीठ को रेफर कर दिया गया था।

सेवा भूमि पर मालिकाना अधिकार का दावा कानूनी रूप से मान्य नहीं

चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय फुल बेंच ने पूरे मामले के कानूनी पहलुओं और राजस्व नियमों का अध्ययन करने के बाद अपना फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि सेवा भूमि कोटवारों को केवल उनके पद और कार्यों के एवज में दी जाती है। अतः जमींदारी प्रथा खत्म होने से पहले मिली ऐसी भूमियों पर कोटवार या उनके वंशज निजी स्वामित्व या भू-स्वामी हक का दावा कानूनी तौर पर नहीं कर सकते। इस आदेश के बाद सेवा भूमि के मालिकाना हक को लेकर लंबे समय से चला आ रहा कानूनी संशय समाप्त हो गया है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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