
Sawan 2026 Jalabhishek Shubh Muhurat: सावन के पवित्र महीने की शुरुआत हो रही है। भगवान शिव के भक्तों के लिए यह समय अत्यंत विशेष और भक्तिमय होता है। मान्यता है कि सावन के दौरान जो श्रद्धालु पूर्ण श्रद्धा और नियम के साथ शिवजी का पूजन तथा जलाभिषेक करते हैं, उनके जीवन से तमाम विघ्न-बाधाएं दूर होने लगती हैं। यदि आप भी सावन के पहले दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करने की योजना बना रहे हैं, तो 30 जुलाई के सभी शुभ मुहूर्तों की जानकारी पहले ही नोट कर लें ताकि ऐन वक्त पर किसी प्रकार की असुविधा न हो। द्रिक पंचांग के अनुसार पहले दिन पूजा के लिए कुल 5 प्रमुख समय बताए गए हैं।

ब्रह्म मुहूर्त में करें दिन की शुरुआत
शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त के समय की गई आराधना को सर्वोत्तम माना गया है। सावन के प्रथम दिन प्रातः 5 बजकर 11 मिनट से लेकर 5 बजकर 46 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा। इस कालावधि में शिवलिंग का गंगाजल से अभिषेक करना और शिव मंत्रों का जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है। यदि संभव हो तो सुबह इसी समय में पूजन कार्य संपन्न करें।
प्रातः काल का दूसरा शुभ समय
यदि आप किसी कारणवश ब्रह्म मुहूर्त में स्नान-ध्यान और पूजन न कर सकें, तो सुबह का दूसरा शुभ मुहूर्त आपके काम आ सकता है। यह समय प्रातः 5 बजकर 28 मिनट से शुरू होकर 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भी श्रद्धालु मंदिर जाकर अथवा घर पर ही शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, दूध और जल अर्पित कर सकते हैं।

दोपहर में अभिजीत मुहूर्त का विकल्प
सुबह के समय व्यस्तता रहने पर दोपहर का अभिजीत मुहूर्त पूजन के लिए एक आदर्श विकल्प है। सनातन परंपरा में अभिजीत मुहूर्त को किसी भी धार्मिक अथवा मांगलिक कार्य के लिए स्वतः सिद्ध मुहूर्त माना गया है। 30 जुलाई को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 26 मिनट से प्रारंभ होकर 2 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इस दौरान निश्चिंत होकर शिवजी की आराधना की जा सकती है।
शाम का विजय मुहूर्त भी रहेगा अनुकूल
अभिजीत समय बीत जाने के बाद यदि आप शाम को पूजन की योजना बना रहे हैं, तो विजय मुहूर्त का उपयोग कर सकते हैं। वैसे तो प्रातः काल ही जलाभिषेक को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन परिस्थिति अनुकूल न होने पर विजय मुहूर्त में किया गया पूजन भी स्वीकार्य है। पंचांग के अनुसार यह समय शाम 4 बजकर 28 मिनट से शुरू होकर 5 बजकर 29 मिनट तक प्रभावी रहेगा।

गोधूलि काल में मिलेगा केवल 18 मिनट का समय
सावन के पहले दिन जलाभिषेक के लिए पांचवां और अंतिम अवसर रात्रि के समय मिलेगा। यह गोधूलि मुहूर्त रात्रि 9 बजकर 32 मिनट पर प्रारंभ होगा और केवल 18 मिनट के लिए मान्य रहेगा। इसका समापन रात्रि 9 बजकर 50 मिनट पर हो जाएगा। कम समय होने के कारण इस अवधि में पूजन सामग्री की तैयारी पहले से करके रखनी होगी।
विधि-विधान और निष्ठा का रखें ध्यान
किसी भी शुभ मुहूर्त का चयन करके आप अपनी सुविधानुसार भगवान आशुतोष का पूजन कर सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार नियत समय के साथ-साथ मन की पवित्रता और सच्ची भावना का होना सबसे आवश्यक है। विधि-विधान से किए गए सरल पूजन को भी भगवान शिव सहर्ष स्वीकार करते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।



