CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें कोरबा DMF फंड जांच रिपोर्ट पर 6 महीने बाद भी सस्पेंस, अंबिकापुर स्कूल में छात्र से 100-100 बार गालियां लिखवाने का आरोप, राशन दुकानदारों का ₹100 करोड़ कमीशन अटका, रायपुर एयरपोर्ट देश में दूसरे स्थान पर, डुंडेरा सरकारी जमीन विवाद हाईकोर्ट पहुंचा, बस्तर में थर्मल ड्रोन से जंगलों की निगरानी शुरू, ₹165 करोड़ FD घोटाले में CBI पर हाईकोर्ट सख्त, राष्ट्रपति भवन में गूंजेगी बस्तर की संस्कृति, डेढ़ करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा गिरफ्तार और विधानसभा में एक ही सवाल पर सरकार के तीन अलग-अलग जवाब से मचा बवाल समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे
कोरबा डीएमएफ फंड जांच: 15 दिन का वक्त और 6 महीने बीतने के बाद भी रिपोर्ट दबाए बैठे हैं अफसर
कोरबा जिले के डीएमएफ (DMF) फंड में कथित गड़बड़ियों को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय खान मंत्रालय के निर्देश पर शुरू की गई इस जांच की मियाद महज 15 दिन तय की गई थी, लेकिन इसे पूरा होने में करीब छह महीने का वक्त लग गया। हैरानी की बात यह है कि जांच पूरी हुए भी 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन रिपोर्ट के निष्कर्षों को अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है और न ही किसी तरह की कार्रवाई सामने आई है। इस पूरे मामले की शुरुआत 22 अक्टूबर 2024 को हुई थी, जब एक्टिविस्ट लक्ष्मी चौहान ने केंद्रीय खान मंत्रालय में फंड के आवंटन और प्रबंधन को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत उचित कदम उठाने के निर्देश दिए। राज्य स्तर पर यह मामला बिलासपुर कमिश्नर के पास पहुंचा, जिन्होंने जनवरी 2026 में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। समिति को 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन फाइलें महीनों तक अटकी रहीं। अब रिपोर्ट शासन तक पहुंच चुकी है, लेकिन अधिकारियों की चुप्पी से पूरा मामला संदेह के घेरे में आ गया है।
अंबिकापुर का स्कूल विवाद: आठवीं के छात्र से हिंदी और अंग्रेजी में 100-100 बार गालियां लिखवाने का आरोप
सरगुजा जिले के एक निजी स्कूल में सजा देने का अजीबोगरीब मामला सामने आया है। शहर के सरगंवा स्थित बिरला ओपन माइंड इंटरनेशनल स्कूल पर आरोप है कि कक्षा आठवीं के एक छात्र से कॉपी में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में 100-100 बार गालियां लिखवाई गईं। इस घटना के सामने आने के बाद अभिभावकों में भारी रोष है और शिक्षा विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल में दो छात्रों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था, जिसकी शिकायत शिक्षिका से की गई थी। अनुशासन बनाए रखने के नाम पर शिक्षिका ने छात्र को यह आपत्तिजनक सजा दी। इतना ही नहीं, छात्र को वे पन्ने घर ले जाकर अभिभावकों के हस्ताक्षर करवाने के भी निर्देश दिए गए। जब परिजनों ने कॉपी में लिखे शब्द देखे तो वे दंग रह गए। अभिभावकों का कहना है कि इस तरह की अपमानजनक सजा बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करती है। जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार झा ने सहायक संचालक को स्कूल भेजकर जांच के निर्देश दिए हैं, और रिपोर्ट आने के बाद सख्त कार्रवाई की बात कही है।
राशन दुकानदारों का 100 करोड़ का बायोमेट्रिक कमीशन अटका, खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ में गरीबों तक मुफ्त राशन पहुंचाने वाले राशन दुकानदारों को पिछले पांच साल से उनके हक का भुगतान नहीं मिल पाया है। करीब 100 करोड़ रुपए का बायोमेट्रिक कमीशन अटका होने के कारण दुकानदारों में नाराजगी है। आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद खाद्य विभाग के स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जबकि विभाग का कहना है कि यह राशि अन्य मशीनों के समायोजन में उपयोग की गई है। प्रदेशभर में संचालित 14,040 शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली का संचालन होता है। नियमों के तहत बायोमेट्रिक सत्यापन कर राशन बांटने पर दुकानदारों को प्रति क्विंटल 21 रुपए का कमीशन मिलना चाहिए। लेकिन संघ का दावा है कि पिछले पांच साल से यह भुगतान रुका हुआ है। हाल ही में हड़ताल के दौरान यह मुद्दा उठने पर विभाग ने तर्क दिया कि राशि पीओएस और इलेक्ट्रॉनिक वेइंग मशीनों के एवज में समायोजित कर ली गई है। दूसरी ओर, दुकानदारों का कहना है कि वे मशीनों का भुगतान पहले ही अलग से कर चुके हैं। इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ पीडीएस संचालक संघ ने अब लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए पूरे वित्तीय लेन-देन का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है।
रायपुर एयरपोर्ट ने मारी बाजी: एसीजी सर्वे में देश में दूसरा और दुनिया में 66वां स्थान हासिल किया
राजधानी रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट ने अपनी बेहतरीन सेवाओं के दम पर एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। एयरपोर्ट्स काउंसिल इंटरनेशनल (ACI) द्वारा जारी एयरपोर्ट सर्विस क्वालिटी (ASQ) सर्वे में रायपुर ने देश के एएआई एयरपोर्ट्स में दूसरा स्थान प्राप्त किया है, जबकि वैश्विक स्तर पर इसे 66वीं रैंक मिली है। इस सफलता से विमानन क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का मान बढ़ा है। अप्रैल से जून 2026 की तिमाही के लिए जारी इस रैंकिंग में रायपुर एयरपोर्ट को 4.93 की एएसक्यू रेटिंग मिली है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर है। इस सूची में पुणे एयरपोर्ट देश में पहले स्थान पर रहा, जबकि रायपुर ने पटना, वाराणसी, कोलकाता और इंदौर जैसे बड़े और व्यस्त एयरपोर्ट्स को पीछे छोड़ दिया। यात्रियों से सीधे मिलने वाले फीडबैक के आधार पर साफ-सफाई, सुरक्षा, स्टाफ के व्यवहार और प्रतीक्षा समय जैसे पैमानों पर यह अंक दिए जाते हैं। एयरपोर्ट प्रबंधन का कहना है कि यह सफलता सीआईएसएफ, एयरलाइंस और सभी कर्मचारियों के आपसी तालमेल और कड़ी मेहनत का नतीजा है।
रायपुर के डुंडेरा में करोड़ों की सरकारी जमीन पर कब्जा और ई-नीलामी का विवाद, मामला हाईकोर्ट पहुंचा
राजधानी रायपुर के ग्राम डुंडेरा में स्थित 3270 वर्गमीटर सरकारी जमीन के मालिकाना हक को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने इस जमीन पर अपना अधिकार जताते हुए इसे ई-नीलामी के जरिए बेचे जाने की प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया है। मामले के तूल पकड़ने के बाद अब यह कानूनी लड़ाई हाईकोर्ट तक पहुंच गई है। विवादित जमीन खसरा नंबर 83/20 से जुड़ी है, जिसे लेकर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का दावा है कि यह भूमि उसे आवासीय योजना के लिए आवंटित की गई थी और लंबे समय से उसके आधिपत्य में है। इसके बावजूद एक्सेस इंफ्राकॉर प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से इस जमीन की ई-नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। मंडल का कहना है कि यह कार्रवाई उसकी बिना सहमति के की जा रही है और मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण इस तरह की बिक्री गैरकानूनी है। मंडल ने संभावित खरीदारों को भी चेतावनी जारी कर दी है कि वे इस नीलामी में हिस्सा न लें, अन्यथा कानूनी परिणामों के वे खुद जिम्मेदार होंगे।
बस्तर के जंगलों में हाईटेक निगरानी की शुरुआत, थर्मल ड्रोन से होगी अवैध कटाई और वन्यजीवों की खोज
बस्तर के घने जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए वन विभाग ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। अब थर्मल इमेजिंग ड्रोन के जरिए जंगलों की निगरानी की जा रही है, जिससे रात के अंधेरे में भी इंसानों और जानवरों की मौजूदगी का आसानी से पता लगाया जा रहा है। हाल ही में माचकोट और बिलोरी के जंगलों में किसी अज्ञात और खतरनाक वन्यजीव के पंजे के निशान मिलने के बाद वन विभाग ने सुरक्षा बढ़ा दी है। थर्मल ड्रोन शरीर की गर्मी यानी हीट सिग्नेचर के आधार पर घने अंधकार में भी सटीक लोकेशन ट्रेस कर लेते हैं। इस तकनीक से न केवल भालू, तेंदुआ और हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, बल्कि लकड़ी की तस्करी और अवैध शिकार जैसी घटनाओं को रोकने में भी मदद मिल रही है। वन अधिकारियों का कहना है कि इससे रात की गश्त अधिक प्रभावी हुई है और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को समय रहते नियंत्रित किया जा सकता है।
165 करोड़ का एफडी घोटाला: सीबीआई की धीमी रफ्तार पर हाईकोर्ट सख्त, मांगा नया शपथपत्र
भिलाई नगर निगम के 165 करोड़ रुपए के फिक्स्ड डिपॉजिट घोटाले में जांच की सुस्त चाल से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। अदालत ने पाया कि सीबीआई अब तक 196 में से केवल 32 खाताधारकों के ही बयान दर्ज कर पाई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने केंद्रीय एजेंसी को अगली सुनवाई तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच अभी अपने अंजाम तक नहीं पहुंची है, इसलिए अगली तारीख 28 सितंबर 2026 तय की गई है। नगर निगम की यह राशि शहर के विकास कार्यों के लिए यस बैंक की भिलाई शाखा में जमा कराई गई थी, जहां फर्जी दस्तावेजों और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपए का हेरफेर किया गया था। इस मामले में शुरुआती जांच के बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया था, लेकिन लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी अधिकांश खाताधारकों तक एजेंसी की पहुंच न हो पाना कई सवाल खड़े कर रहा है।
राष्ट्रपति भवन में गूंजेगी बस्तर की संस्कृति, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देंगी विशेष रात्रिभोज
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के लिए एक गौरवशाली पल आने वाला है। आगामी 30 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में बस्तर की संस्कृति और परंपराओं का सम्मान किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं, पारंपरिक आदिवासी प्रतिनिधियों और पद्मश्री से सम्मानित हस्तियों के सम्मान में एक विशेष रात्रिभोज का आयोजन करेंगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचा है। इस दल में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल और बस्तर के विभिन्न जनजातीय समुदायों के लोग शामिल हैं। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बस्तर की समृद्ध लोक कला, परंपराओं और धरोहर को देश के सर्वोच्च मंच तक पहुंचाना है। राष्ट्रपति के साथ इस मुलाकात को आदिवासी समाज और छत्तीसगढ़ की संस्कृति के लिए एक ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है। दिल्ली प्रवास के दौरान प्रतिनिधिमंडल संसद भवन और अन्य प्रमुख राष्ट्रीय स्मारकों का भी भ्रमण करेगा।
झारखंड से गिरफ्तार हुआ डेढ़ करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा, 55 जवानों की शहादत का था मास्टरमाइंड
दो दशकों से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने शीर्ष नक्सली नेता मिसिर बेसरा को आखिरकार झारखंड में धर दबोचा गया है। मंगलवार को सुरक्षाबलों ने एक संयुक्त अभियान के दौरान उसे और उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया। माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य और पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो के इंचार्ज रहे बेसरा पर करीब डेढ़ करोड़ रुपए का इनाम घोषित था। सुरक्षा एजेंसियों को सूचना मिली थी कि वह सारंडा और पारसनाथ की पहाड़ियों के रास्ते अपने नए ठिकाने की तलाश में निकल रहा है। इसके बाद घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2003-04 में झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में हुए उन भीषण IED ब्लास्ट्स में उसका हाथ था, जिनमें 55 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। इसके अलावा 2009 में लखीसराय कोर्ट परिसर में हुए हमले के दौरान वह पुलिस हिरासत से भाग निकला था। उस पर हत्या, विस्फोटक अधिनियम और देशद्रोह समेत 140 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में अधिकारियों की बड़ी लापरवाही, एक ही सवाल पर सीएम के आए तीन अलग-अलग जवाब
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान प्रशासनिक लापरवाही का एक अजीब मामला सामने आया है। एक ही विषय और कंपनी से जुड़े तीन अलग-अलग सवालों पर मुख्यमंत्री की ओर से तीन परस्पर विरोधी लिखित जवाब सदन में पेश किए गए। इस स्थिति ने विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्ता पक्ष के भीतर भी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पूरा मामला ‘आरती स्पंज एंड स्टील’ कंपनी को लेकर था। सत्र के दौरान अलग-अलग विधायकों द्वारा पूछे गए इन सवालों में कंपनी को खदान आवंटन, लीज की अवधि और उत्पादन से जुड़ी जानकारियां मांगी गई थीं। पहले सवाल के जवाब में सरकार ने स्वीकार किया कि दंतेवाड़ा में कंपनी को खदान आवंटित की गई है और वहां उत्पादन भी हुआ है। वहीं, दूसरे और तीसरे सवाल के लिखित उत्तर में अधिकारियों ने तकनीकी फेरबदल करते हुए कह दिया कि पिछले पांच वर्षों में किसी भी निजी कंपनी को जमीन नहीं दी गई है और न ही कोई अनुमति दी गई है। एक ही सत्र में एक ही विषय पर अलग-अलग आंकड़े और तथ्य सामने आने से विधानसभा की कार्यवाही और बाबुओं की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।



