
Digital Arrest E SIM Scam: भारत में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक नया और खतरनाक तरीका खोज निकाला है। अब बिना आपकी जानकारी के आपकी पहचान पर फर्जी ई-सिम चालू किए जा रहे हैं। ये सिम कार्ड विदेश में बैठे साइबर गिरोहों को बेचे जा रहे हैं, जो इनके माध्यम से करोड़ों रुपये की डिजिटल अरेस्ट और निवेश ठगी को अंजाम दे रहे हैं। लखनऊ पुलिस की जांच में इस नए अंतरराष्ट्रीय साइबर मॉडल का खुलासा हुआ है।
दुकान पर दो बार सत्यापन का खेल और ई-सिम का जाल
Cyber Fraud: जब आप किसी मोबाइल दुकान पर नया सिम खरीदने या ई-सिम एक्टिवेट कराने जाते हैं, तो कई बार दुकानदार सर्वर में खराबी का बहाना बनाकर दोबारा सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कराता है। आप अनजाने में दोबारा अपनी पहचान संबंधी दस्तावेज और ओटीपी दे देते हैं। इस प्रक्रिया में आपका सिम तो चालू हो जाता है, लेकिन आपकी पहचान पर एक अतिरिक्त ई-सिम भी एक्टिवेट कर लिया जाता है। कुछ ही घंटों में यह ई-सिम कंबोडिया, म्यांमार या लाओस जैसे देशों में बैठे अपराधियों के पास पहुंच जाता है।

पुलिस की जांच में बड़ा पर्दाफाश
पुलिस ने हाल ही में ऐसे ही एक गिरोह को पकड़ा है, जो ग्राहकों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर ई-सिम तैयार करता था। जांच में पता चला कि इस गिरोह ने एक व्यक्ति से 70 लाख रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी की थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पीड़ित के 35 लाख रुपये फ्रीज करा लिए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार अब पारंपरिक अपराधों की तुलना में साइबर अपराध तेजी से अपने रूप बदल रहे हैं।
क्रिप्टोकरेंसी और ई-वॉलेट के जरिए पैसों की हेराफेरी
इस पूरे खेल में पैसों के लेन-देन के लिए भारतीय बैंक खातों के बजाय क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है। विदेशी साइबर गिरोह फर्जी ई-सिम उपलब्ध कराने वाले दुकानदारों को यूएसडीटी (USDT) जैसी डिजिटल करेंसी में भुगतान करते हैं। ठगी की रकम को पहले कई बैंक खातों में घुमाया जाता है और फिर मिनटों में उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर अलग-अलग डिजिटल वॉलेट में भेज दिया जाता है। इससे पैसों के मुख्य स्रोत तक पहुंचना काफी मुश्किल हो जाता है।

प्रमुख साइबर ठगी के तरीके और उनसे बचाव के उपाय
डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए साइबर अपराधियों के अलग-अलग पैंतरों को समझना बेहद जरूरी है। नीचे दिए गए विवरण से आप प्रमुख ठगी के प्रकारों को आसानी से समझ सकते हैं।
| ठगी का प्रकार | अपराधियों का तरीका | बचाव का मुख्य उपाय |
| डिजिटल अरेस्ट स्कैम | पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बनकर फर्जी वीडियो कॉल करना। | सरकारी एजेंसियां वीडियो कॉल पर अरेस्ट नहीं करतीं, तुरंत कॉल काटें। |
| ई-सिम फ्रॉड | सत्यापन के नाम पर दो बार दस्तावेज व ओटीपी लेकर दूसरा सिम एक्टिव करना। | सत्यापन अपने सामने कराएं और किसी से भी ओटीपी साझा न करें। |
| निवेश व ट्रेडिंग फ्रॉड | व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर घर बैठे मोटे रिटर्न का लालच देना। | अनधिकृत ऐप या अनजान व्यक्ति की सलाह पर निवेश न करें। |
| यूपीआई कलेक्ट रिक्वेस्ट | पैसे भेजने के नाम पर कलेक्ट रिक्वेस्ट भेजना। | ध्यान रखें कि पैसे प्राप्त करने के लिए यूपीआई पिन दर्ज नहीं करना पड़ता। |
| एआई वॉयस व वीडियो फ्रॉड | एआई से परिचितों की आवाज या चेहरा बनाकर आपात स्थिति बताना। | सीधे उस व्यक्ति को सामान्य फोन कॉल करके सच्चाई की पुष्टि करें। |
कंबोडिया और लाओस से संचालित हो रहा इंटरनेशनल नेटवर्क
जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस नेटवर्क की जड़ें भारत से बाहर फैली हुई हैं। कंबोडिया, लाओस, म्यांमार और दुबई में बैठे ठग भारतीय मोबाइल नंबरों और भारतीय पहचान का उपयोग करके लोगों को निशाना बना रहे हैं। ये अपराधी तकनीकी खामियों और आम लोगों की छोटी-छोटी लापरवाहियों का फायदा उठाते हैं।

डार्क वेब और तकनीक का खतरनाक गठजोड़
साइबर अपराध की इस दुनिया में डार्क वेब का इस्तेमाल फर्जी दस्तावेज, हैकिंग टूल और चुराए गए डेटा की खरीद-फरोख्त के लिए किया जाता है। हालांकि हर अपराध डार्क वेब से नहीं जुड़ा होता, लेकिन बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में इसकी भूमिका अहम पाई गई है। पुलिस के अनुसार लोग बिना सोचे-समझे ओटीपी साझा कर देते हैं या संदिग्ध लिंक पर क्लिक कर देते हैं, जिससे अपराधियों का काम आसान हो जाता है।
ई-सिम लेते समय इन जरूरी सावधानियों का रखें ध्यान
यदि आप नया ई-सिम या सामान्य सिम कार्ड लेने जा रहे हैं, तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें:
- अपनी पहचान सत्यापन की प्रक्रिया हमेशा अपने सामने ही पूरी कराएं।
- किसी भी परिस्थिति में अपना ओटीपी, सीवीवी या यूपीआई पिन किसी से साझा न करें।
- ई-सिम का क्यूआर कोड (QR Code) किसी अनजान व्यक्ति को न भेजें।
- नया सिम चालू होने के बाद टेलीकॉम कंपनी के ऐप पर जाकर जांच लें कि आपकी पहचान पर कोई अन्य नंबर तो सक्रिय नहीं है।
- किसी भी अनजान संदेश, ईमेल या व्हाट्सएप लिंक पर क्लिक करने से बचें।
सरकार और गृह मंत्रालय के कड़े कदम
बदलते साइबर अपराधों से निपटने के लिए गृह मंत्रालय ने ‘इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर’ (I4C) का गठन किया है। इसके माध्यम से पुलिस, बैंक और टेलीकॉम कंपनियां रियल टाइम में जानकारी साझा करती हैं। इसके अलावा संदिग्ध खातों और मोबाइल नंबरों को ब्लॉक करने के लिए ‘संदेह रजिस्ट्री’ और ‘समन्वय प्लेटफॉर्म’ का सहारा लिया जा रहा है, ताकि अपराधियों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।



