CG compassionate appointment High Court Decision: परिवार में पहले से है सरकारी नौकरी तो नहीं मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जानें पूरा नियम

CG Compassionate Appointment New Rules: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शासकीय सेवकों के आश्रितों को मिलने वाली अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। बिलासपुर स्थित उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार का कोई भी सदस्य पहले से किसी सरकारी सेवा में कार्यरत है, तो ऐसी स्थिति में परिवार के किसी अन्य आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य रोजगार की गारंटी देना नहीं, बल्कि अचानक आए आर्थिक संकट से परिवार को उबारना है।

परिवार में सरकारी नौकरी होने पर नहीं मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य शासन के उस निर्णय को सही ठहराया, जिसमें अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन को निरस्त कर दिया गया था। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि परिवार का कोई सदस्य पहले से शासकीय सेवा में रहकर नियमित आय अर्जित कर रहा है, तो उस परिवार को आर्थिक रूप से संकटग्रस्त नहीं माना जा सकता। ऐसी स्थिति में परिवार के दूसरे सदस्य का अनुकंपा नियुक्ति पर कोई दावा नहीं बनता है।

अनुकंपा नियुक्ति कोई मौलिक अधिकार नहीं

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट तौर पर कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई वैधानिक या मौलिक अधिकार (Fundamental Right) नहीं है जिसे अदालत के जरिए जबरन लागू कराया जा सके। यह राज्य सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों के प्रति दिखाई जाने वाली एक विशेष रियायत और कल्याणकारी व्यवस्था है। इसलिए अनुकंपा के आधार पर नौकरी का लाभ केवल सरकार की निर्धारित नीति, शर्तों और नियमों के दायरे में ही दिया जा सकता है।

तात्कालिक आर्थिक संकट से राहत देना ही मूल उद्देश्य

उच्च न्यायालय ने फैसले के दौरान अनुकंपा नियुक्ति की मूल अवधारणा को रेखांकित किया। कोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी की आकस्मिक मृत्यु से उसके परिवार के समक्ष आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाता है। इस योजना का एकमात्र उद्देश्य परिवार को तुरंत वित्तीय सहायता प्रदान करना है ताकि वे जीवन यापन कर सकें। यदि परिवार के पास पहले से ही आय का स्थाई साधन या सरकारी नौकरी मौजूद है, तो इस योजना का मुख्य उद्देश्य वहीं समाप्त हो जाता है।

सामान्य भर्ती प्रक्रिया का विकल्प नहीं हो सकती अनुकंपा

अदालत ने यह भी साफ किया कि अनुकंपा नियुक्ति को सामान्य सीधी भर्ती (Direct Recruitment) का वैकल्पिक माध्यम नहीं माना जा सकता। योग्यता और शैक्षणिक अर्हता रखने के बावजूद केवल आश्रित होने के आधार पर नियमित सेवा में प्रवेश का अधिकार नहीं मिल जाता। भर्ती की सामान्य प्रक्रियाओं का पालन किए बिना केवल इस व्यवस्था के जरिए नौकरी का दावा करना कानून और सार्वजनिक नीतियों के विपरीत है।

राज्य सरकार की नीति का सख्ती से होगा पालन

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में राज्य सरकार द्वारा बनाई गई नीति और नियम ही सर्वोपरि होंगे। यदि नीति में स्पष्ट उल्लेख है कि परिवार के किसी सदस्य के शासकीय सेवा में होने पर दूसरे सदस्य को पात्र नहीं माना जाएगा, तो उस नियम में किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जा सकती। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आवेदनों की जांच के दौरान परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति और नीतिगत शर्तों का कड़ाई से पालन करें।

भविष्य के विचाराधीन मामलों पर पड़ेगा इस फैसले का असर

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के इस निर्णय से राज्य भर में लंबित सैकड़ों मामलों पर सीधा असर पड़ेगा। कई ऐसे मामले अदालत और विभिन्न सरकारी विभागों के सामने विचाराधीन हैं, जिनमें परिवार के किसी एक सदस्य के सरकारी नौकरी में रहते हुए भी अन्य आश्रितों ने अनुकंपा नियुक्ति की मांग की है। इस फैसले के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर ऐसे आवेदनों को निरस्त करने की कानूनी राह साफ हो गई है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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