“सरकार ही पिलाएगी शराब और सरकार ही पकड़ेगी”, पुलिस कार्रवाई से नाराज युवक ने खोद दी सिस्टम की पोल, अब करेगा डोंगरगढ़ से रायपुर तक पदयात्रा

Dongargarh News: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ क्षेत्र से पुलिस कार्रवाई और आबकारी व्यवस्था से जुड़ा एक अनोखा मामला सामने आया है। सरकारी दुकान और अहाते से शराब का सेवन करने के बाद घर लौट रहे लोगों पर पुलिस द्वारा सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने का मामला बनाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई से नाराज स्थानीय नागरिकों और नक्सल पीड़ित परिवारों ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

दवा लेने निकले युवक पर पुलिस कार्रवाई का आरोप

पूरा मामला 6 अगस्त का है, जब एक नक्सल पीड़ित परिवार का युवक अपनी मां के लिए मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने निकला था। लौटते समय वह सड़क किनारे बाइक खड़ी करके फोन पर बात करने लगा। इसी दौरान गश्त पर निकली पुलिस टीम वहां पहुंची और युवक पर सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने का आरोप लगा दिया। पीड़ित का दावा है कि उसके पास न तो शराब की बोतल थी और न ही ऐसा कोई सामान था, फिर भी उससे जबरन मुचलका भरवाया गया।

आबकारी व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

इस घटना के बाद पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने सीधे राजनांदगांव पुलिस अधीक्षक (एसपी) से शिकायत की है। लोगों का कहना है कि जब सरकार खुद लाइसेंस देकर शराब दुकानें और अहाते संचालित कर रही है, तो वहां से निकलकर घर जाने वाले व्यक्ति पर सार्वजनिक स्थल पर शराब पीने की धाराएं लगाना समझ से परे है। ग्रामीणों का तर्क है कि शराब दुकान से बाहर निकलने के बाद सड़क का उपयोग करना मजबूरी है, जिसे अपराध नहीं माना जाना चाहिए।

सड़क पर पीने और पीकर घर जाने की मांग

पीड़ितों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर बैठकर शराब पीना और शराब दुकान से निकलकर शांतिपूर्वक अपने घर जाना, दोनों स्थितियों में अंतर होना चाहिए। यदि दुकानों के आसपास से गुजरने वाले हर व्यक्ति पर इस तरह कार्रवाई की जाएगी, तो इससे आम नागरिकों का उत्पीड़न बढ़ेगा।

10 अगस्त को डोंगरगढ़ से रायपुर तक शांतिपूर्ण पदयात्रा

पुलिस की इस कार्रवाई और सुनवाई न होने से क्षुब्ध परिवारों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर झूठा मामला रद्द नहीं किया गया, तो 10 अगस्त को सुबह 10 बजे डोंगरगढ़ थाने से रायपुर स्थित विधानसभा अध्यक्ष के निवास तक पैदल मार्च निकाला जाएगा। इस शांतिपूर्ण पदयात्रा के जरिए शासन और प्रशासन का ध्यान इस विरोधाभासी व्यवस्था की ओर खींचने का प्रयास किया जाएगा।

पुलिस प्रशासन के रवैये से स्थानीय लोगों में आक्रोश

इस घटनाक्रम के बाद से डोंगरगढ़ क्षेत्र के ग्रामीणों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर काफी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का आरोप है कि पुलिस वास्तविक अपराधियों को पकड़ने के बजाय आम नागरिकों पर कागजी कार्रवाई का दबाव बनाती है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर व्यवस्था में स्पष्टता नहीं लाई गई तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

मामले की निष्पक्ष जांच और समाधान की उम्मीद

फिलहाल यह मामला जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आ चुका है। देखना होगा कि 10 अगस्त के प्रस्तावित पैदल मार्च से पहले पुलिस प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है। स्थानीय निवासियों को उम्मीद है कि वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम की पड़ताल करेंगे और बेवजह परेशान किए गए युवक को राहत प्रदान करते हुए नियमों में स्पष्टता लाएंगे।

Also Read: “विधायक का भाई होगा, कोई तोप नहीं”: पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने आबकारी अफसर को फोन पर धमकाया, जानिए फोन पर हुई तीखी बातचीत का पूरा मामला

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button