
Sawan Somwar Nag Panchami 2026: सावन का महीना शिव भक्तों के लिए बेहद खास होता है और इसमें सावन सोमवार का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस बार सावन के तीसरे सोमवार को नागपंचमी का पर्व पड़ रहा है। लगभग 23 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ऐसा दुर्लभ संयोग देखने को मिल रहा है। इस दिन हस्त नक्षत्र, साध्य योग और भव करण का विशेष योग बन रहा है। इसके साथ ही सूर्य, बुध और गुरु ग्रह का संचरण कर्क राशि में होने से त्रिग्रहीय योग का निर्माण भी हो रहा है, जिसे ज्योतिष के नजरिए से अत्यंत शुभ माना गया है।
कालसर्प दोष और नाग दोष से मुक्ति पाने का सबसे बेहतर अवसर
Kal Sarp Dosh Upay: ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सावन सोमवार के दिन नागपंचमी का आना शिव और नाग देवता की कृपा प्राप्त करने का बेहतरीन अवसर है। जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष या नाग दोष है, उनके लिए यह दिन विशेष फलदायी है। इस दिन आटे, तांबे या चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा बनाकर विधि-विधान के साथ शिवलिंग पर अर्पित करने से दोषों का प्रभाव समाप्त होता है। भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करने से जीवन के कष्टों से राहत मिलती है और अटके हुए काम बनने लगते हैं।
नागपंचमी पर 4 प्रहर की पूजा का समय और सही तरीका
Nag Panchami Puja Vidhi: इस बार नागपंचमी का शुभ मुहूर्त सुबह से लेकर शाम 6:00 बजे तक रहेगा। इस दौरान प्रदोष काल में भगवान शिव और नाग देवता की पूजा का विशेष विधान है। शास्त्रानुसार चार प्रहर की पूजा को सर्वोत्तम माना जाता है। पहला प्रहर सुबह 6:00 से 9:00 बजे, दूसरा प्रहर सुबह 9:00 से 12:00 बजे, तीसरा प्रहर दोपहर 12:00 से 3:00 बजे और चौथा प्रहर शाम 3:00 से 6:00 बजे तक रहेगा। इन समय खंडों में शिवलिंग पर नाग देवता को स्थापित कर जलाभिषेक और पूजन करने से संपूर्ण पूजा संपन्न मानी जाती है।
महादेव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर अर्पित करें ये 4 प्रमुख चीजें
Sawan Somwar Special: सावन सोमवार और नागपंचमी के इस खास मौके पर शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। महादेव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर मुख्य रूप से 4 चीजें अर्पित करने की सलाह दी जाती है। जलाभिषेक या पंचामृत के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद चंदन का लेप लगाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान ‘ओम नमः शिवाय’ या ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का निरंतर जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
मेलों और पारंपरिक आयोजनों के लिए सजने लगे शहर और गांव
Sawan Somwar 2026: नागपंचमी के अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सांस्कृतिक और पारंपरिक आयोजनों का माहौल भी देखने को मिलता है। नगरों से लेकर ग्रामीण इलाकों में तालाबों और सरोवरों के किनारे पारंपरिक मेलों का आयोजन किया जा रहा है। ऐतिहासिक गुड़िया तालाब, सूरजकुंड और शिवकुटी जैसे स्थानों पर रंग-बिरंगी रोशनी से सजावट की गई है। मेलों में हस्तशिल्प, लकड़ी के खिलौने, घरेलू सजावटी सामान और अनरसा-पेठा जैसी मिठाइयों की दुकानें सज चुकी हैं।
पारंपरिक दंगल और कुश्ती प्रतियोगिताओं से दोगुना होगा उत्साह
नागपंचमी के दिन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पारंपरिक दंगल (कुश्ती) का आयोजन करने की पुरानी परंपरा रही है। इस दिन होने वाले दंगल को शारीरिक बल और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। सोमवार का दिन होने के कारण श्रद्धालुओं में इस बार दोगुना उत्साह देखने को मिल रहा है। सुबह से ही मंदिरों में पूजा-पाठ के बाद लोग मेलों और दंगल प्रतियोगिताओं का आनंद लेने के लिए सपरिवार निकलेंगे।



