अफीम खेती मामला: बिलासपुर हाईकोर्ट से बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार को राहत, मिला जमानत

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सामने आए 5.62 एकड़ जमीन पर अफीम की अवैध खेती के मामले में नया मोड़ आया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने इस केस के मुख्य आरोपियों में शामिल भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को नियमित जमानत दे दी है। हालांकि अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है। यह मामला दुर्ग जिले के ग्राम समोदा का है, जहां पुलिस ने बड़े पैमाने पर अफीम की फसल पकड़ी थी।

हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की एफआईआर रद्द करने की याचिका

विनायक ताम्रकार ने अपने खिलाफ दर्ज पुलिस केस को पूरी तरह खत्म करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। अदालत ने एफआईआर निरस्त करने की मांग को स्वीकार नहीं किया। पीठ ने स्पष्ट किया कि आरोपी को निचली अदालत में ट्रायल के दौरान अपनी बेगुनाही का पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।

मार्च 2026 में हुआ था अफीम की अवैध खेती का खुलासा

दुर्ग जिले की जेवरा सिरसा पुलिस ने 7 मार्च 2026 को ग्राम समोदा में छापा मारकर करीब 5.62 एकड़ जमीन पर की जा रही अफीम की खेती को नष्ट किया था। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान भाजपा नेता विनायक ताम्रकार सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जांच टीम ने तय सीमा के भीतर अपनी पड़ताल पूरी की और अदालत में आरोपियों के खिलाफ चालान पेश कर दिया।

बचाव पक्ष ने अदालत के सामने रखीं ये प्रमुख दलीलें

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि विनायक ताम्रकार की अफीम खेती में सीधी भूमिका साबित करने के लिए पुलिस के पास कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है। वकीलों ने अदालत को बताया कि जिस जमीन पर खेती पाई गई थी, वह आरोपी के नाम पर दर्ज नहीं है। इसके अलावा पुलिस ने उनके व्यक्तिगत कब्जे से कोई भी नशीला पदार्थ या अफीम बरामद नहीं की है।

जानिए किन कानूनी आधारों पर मंजूर हुई जमानत याचिका

हाईकोर्ट ने जमानत अर्जी पर विचार करते समय कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को ध्यान में रखा। अदालत ने पाया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस चालान दाखिल कर चुकी है। इसके साथ ही इस प्रकरण से जुड़े कुछ अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। समान परिस्थितियों और जांच पूरी होने के आधार पर अदालत ने विनायक ताम्रकार को नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

अब निचली अदालत में आगे बढ़ेगी कानूनी सुनवाई

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि मामला कानूनी प्रक्रिया से बाहर नहीं हुआ है। विनायक ताम्रकार को भले ही जेल से बाहर आने की राहत मिल गई है, लेकिन एफआईआर रद्द न होने के कारण उन पर लगे आरोपों का निपटारा निचली अदालत में ही होगा। पुलिस द्वारा दाखिल किए गए चालान और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्यवाही और ट्रायल जारी रहेगा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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