
Vijay Sharma vs Bhupesh Baghel LIVE: छत्तीसगढ़ की राजनीति में मंगलवार को एक ऐतिहासिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल रायपुर प्रेस क्लब के मंच पर एक साथ आए। प्रधानमंत्री आवास योजना के आंकड़ों और क्रियान्वयन को लेकर छिड़ी जुबानी जंग के बाद दोनों नेताओं ने लाइव डिबेट में हिस्सा लिया। प्रेस क्लब में आयोजित इस खुली बहस में दोनों ही कद्दावर नेता अपने-अपने तथ्यों, दस्तावेजों और आंकड़ों के साथ एक-दूसरे के सवालों के सीधे जवाब दे रहे हैं।
भूपेश बघेल की चुनौती और विजय शर्मा की सहमति से तय हुआ मंच
Chhattisgarh PM Awas Debate LIVE: इस सियासी बहस की नींव कुछ दिनों पहले पड़े उस चैलेंज से पड़ी, जिसमें पीएम आवास के आंकड़ों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सार्वजनिक मंच से बहस की चुनौती दी थी, जिसे भूपेश बघेल ने स्वीकार कर लिया था। दोनों पक्षों के बीच समय और स्थान तय होने के बाद 15 तारीख को रायपुर प्रेस क्लब में इस डिबेट का आयोजन सुनिश्चित किया गया।
18 लाख आवास और पहली कैबिनेट बैठक के फैसलों पर डिप्टी सीएम का पक्ष
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बहस की शुरुआत में अपनी सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सत्ता संभालने के बाद राज्य सरकार ने अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में 18 लाख बेघर परिवारों के लिए पीएम आवास स्वीकृत करने संबंधी फाइल पर हस्ताक्षर किए थे। विजय शर्मा का दावा है कि वर्तमान शासनकाल में 11 लाख से अधिक आवासों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। उन्होंने आंकड़ों में किसी भी तरह की गड़बड़ी से साफ इनकार किया।
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पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आंकड़ों की भिन्नता पर उठाए सवाल
Raipur Press Club Live Updates: वहीं दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार द्वारा जारी अलग-अलग आंकड़ों पर गंभीर आपत्ति जताई। बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्रों, राज्य सरकार के विज्ञापनों और संसद में दिए गए जवाबों में पीएम आवास की संख्याओं में बड़ा अंतर दिखाई देता है। उनका आरोप है कि वर्तमान सरकार जिन 11 लाख आवासों को अपनी उपलब्धि बता रही है, उनमें से अधिकांश मकान पहले की सरकारों के कार्यकाल में ही बन चुके थे।
प्रदेश में पीएम आवास की वास्तविक स्थिति पर टिका जनता का ध्यान
भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान लगभग 7 लाख आवास स्वीकृत किए गए थे। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह यह आंकड़ा सार्वजनिक करे कि नई सरकार बनने के बाद कितने नए मकानों की तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति दी गई है। राज्य के इतिहास में दो वरिष्ठ नेताओं के बीच इस तरह की पारदर्शी और लाइव बहस पहली बार हो रही है, जिसने छत्तीसगढ़ के राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है।
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