छत्तीसगढ़ विधानसभा में सर्वसम्मति से नीलामी न करने के संकल्प के बाद भी तारा कोल ब्लॉक की नीलामी, काटे जायेंगे लाखों पेड़

Hasdeo Aranya Tara Coal Block Dispute: छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य क्षेत्र स्थित तारा कोल ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया पूरी होते ही राज्य का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। राज्य सरकार ने इस पूरे विवाद पर स्थिति साफ करते हुए कहा है कि फिलहाल केवल नीलामी की प्रक्रिया पूरी की गई है और कंपनी को खनन शुरू करने की अनुमति नहीं दी गई है। दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार के इस तर्क को खारिज करते हुए तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का कहना है कि अगर सरकार की मंशा खनन की इजाजत देने की नहीं है, तो फिर इस ब्लॉक की नीलामी के लिए केंद्र सरकार को सिफारिश क्यों भेजी गई थी।

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नीलामी की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी

Tara Coal Block Auction CG Politics: राज्य सरकार का कहना है कि तारा कोल ब्लॉक में केवल नीलामी की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की गई है। किसी भी सफल बोलीदाता को खदान चालू करने के लिए अभी कई वैधानिक पड़ावों से गुजरना होगा। इसके तहत माइनिंग प्लान की मंजूरी, खनन पट्टा, पर्यावरणीय स्वीकृति और वन संरक्षण से जुड़ी मंजूरियां हासिल करना अनिवार्य है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन सभी औपचारिकताओं और वैधानिक स्वीकृतियों के बिना न तो खनन का काम शुरू हो सकता है और न ही वन क्षेत्र में वृक्षों की कटाई की जा सकती है।

नीलामी की सिफारिश क्यों की

Chhattisgarh Hasdeo News Update: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार के तर्कों को सिरे से नकारते हुए सवाल दागा है। उन्होंने पूछा कि यदि राज्य सरकार क्षेत्र में खनन के पक्ष में नहीं है, तो उसने केंद्र सरकार को तारा कोल ब्लॉक की नीलामी कराने की अनुशंसा क्यों भेजी। कांग्रेस ने दावा किया कि साय सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय को पत्र लिखकर इस ब्लॉक की नीलामी कराने का अनुरोध किया था। बैज ने सरकार से जवाब मांगा है कि क्या वह इस परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी न देने की लिखित गारंटी दे सकती है।

नौ कंपनियों की प्रतिस्पर्धा के बीच सीजी सिन-गैस को मिला ब्लॉक

Hasdeo Forest Mining Row: छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार तारा कोल ब्लॉक के लिए हुई नीलामी प्रक्रिया में कुल नौ कंपनियों ने अपनी बोलियां जमा की थीं। पारदर्शी प्रक्रिया के अंत में यह ब्लॉक सीजी सिन-गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड के नाम आवंटित हुआ। कांग्रेस का आरोप है कि यह कंपनी अडानी समूह से जुड़ी हुई है और अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की सहायक इकाई मुंद्रा सिनर्जी लिमिटेड की सब्सिडियरी के रूप में काम करती है।

कानूनी और पर्यावरणीय स्वीकृतियों के बाद ही संभव होगा खनन

Chhattisgarh Mining & Political Update: सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि नीलामी प्रक्रिया में सफल होना अपने आप में खनन का अधिकार मिलना नहीं है। संबंधित कंपनी को केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर निर्धारित सभी कठिन नियमों का पालन करना होगा। जब तक कंपनी माइनिंग प्लान, माइनिंग लीज, पर्यावरण प्रभाव आकलन और फॉरेस्ट क्लियरेंस की प्रक्रियाएं पूरी नहीं कर लेती, तब तक धरातल पर किसी भी प्रकार की व्यावसायिक या खनन संबंधी गतिविधि शुरू नहीं की जा सकती।

कांग्रेस ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल

कांग्रेस ने सरकार की इस दलील को नाकाफी बताते हुए उसकी मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। दीपक बैज ने कहा कि सिर्फ यह कह देने से जिम्मेदारी खत्म नहीं होती कि अभी खनन की इजाजत नहीं दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने खुद पहल करके 11 दिसंबर 2025 को पत्र भेजा था, जिससे उसकी नीयत उजागर होती है। विपक्ष का कहना है कि सरकार एक तरफ नीलामी करवा रही है और दूसरी तरफ जनता के सामने तकनीकी नियमों का बहाना बना रही है।

भूपेश बघेल सरकार ने केंद्र को लिखा था नीलामी रोकने का पत्र

विपक्ष ने अपनी पिछली सरकार के फैसलों का हवाला देते हुए बताया कि भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 23 जून 2023 को केंद्र सरकार को आधिकारिक पत्र भेजा था। उस पत्र में तारा समेत हसदेव क्षेत्र के नौ कोल ब्लॉकों को नीलामी की सूची से बाहर रखने का स्पष्ट अनुरोध किया गया था। कांग्रेस का कहना है कि उनकी सरकार हमेशा से हसदेव के जंगलों को बचाने और नए आवंटन को रोकने के पक्ष में रही है।

2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा से सर्वसम्मति से पास हुआ था प्रस्ताव

कांग्रेस ने याद दिलाया कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में सर्वसम्मति से एक अशासकीय संकल्प पारित किया गया था। इस संकल्प के जरिए केंद्र सरकार से मांग की गई थी कि हसदेव-अरण्य क्षेत्र में स्थित किसी भी नए कोयला ब्लॉक का आवंटन या नीलामी न की जाए। इसके अलावा 16 जुलाई 2023 को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा भी पेश किया था, जिसमें कहा गया था कि हसदेव क्षेत्र में नई खदानें खोलने की कोई तात्कालिक आवश्यकता नहीं है।

2011 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से रद्द हुआ था पुराना आवंटन

तारा कोल ब्लॉक का कानूनी इतिहास काफी पुराना है। वर्ष 2011 में यह ब्लॉक छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को आवंटित किया गया था। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के तहत देश भर के कई अन्य कोयला खदानों के साथ तारा का आवंटन भी निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने नई नीति बनाते हुए व्यावसायिक कोयला खनन के लिए पारदर्शी नीलामी व्यवस्था लागू की, जिसके तहत वर्तमान आवंटन की कार्रवाई की गई है।

सरकार ने गिनाया 2019 से 2022 के बीच हुए पत्राचार का ब्योरा

मौजूदा सरकार ने मामले पर रुख स्पष्ट करते हुए पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में हुए पत्राचार का ब्योरा पेश किया है। सरकार का कहना है कि वर्ष 2019 और 2021 में भी हसदेव क्षेत्र के कोल ब्लॉकों को लेकर केंद्र और राज्य के बीच लगातार पत्राचार होता रहा था। सरकार ने पीईकेबी (परसा ईस्ट केते बासेन) कोल ब्लॉक का उदाहरण देते हुए कहा कि उस परियोजना को भी जुलाई 2011 में स्टेज-1 और मार्च 2012 में स्टेज-2 की फॉरेस्ट क्लियरेंस मिली थी और वहां नियम के तहत काम आगे बढ़ा था।

5 हजार एकड़ में फैले जंगल और 10 लाख पेड़ों पर खतरे का दावा

पर्यावरण के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कांग्रेस ने गंभीर आंकड़े सामने रखे हैं। पार्टी का दावा है कि तारा कोल ब्लॉक लगभग 5 हजार एकड़ क्षेत्र में विस्तृत है, जिसमें से 4 हजार एकड़ से अधिक हिस्सा घने वनों से ढका हुआ है। कांग्रेस का आरोप है कि यदि यहां खदान चालू होती है, तो करीब 10 लाख से अधिक विशाल पेड़ों की बलि चढ़ जाएगी। इससे पूरे क्षेत्र का संतुलन बिगड़ जाएगा और स्थानीय निवासियों का जीवन प्रभावित होगा।

लेमरू एलीफेंट रिजर्व और वन्यजीवों के अस्तित्व पर संकट की आशंका

पर्यावरण प्रेमियों और विपक्ष का कहना है कि तारा ब्लॉक लेमरू एलीफेंट रिजर्व के अति संवेदनशील दायरे के पास स्थित है। इस इलाके में भारी मशीनों की आवाजाही और उत्खनन से हाथियों के प्राकृतिक गलियारे (कॉरिडोर) बाधित होंगे। इससे मानव-हाथी द्वंद्व की घटनाएं बढ़ सकती हैं। साथ ही, हसदेव के जंगलों में रहने वाली अन्य दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियों और जैविक विविधता के लिए भी यह परियोजना एक बड़ा खतरा साबित हो सकती है।

भारतीय वानिकी अनुसंधान परिषद की रिपोर्ट का सरकार ने दिया हवाला

दूसरी ओर, राज्य सरकार ने अपने फैसले के समर्थन में भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) के वैज्ञानिक अध्ययन का हवाला दिया है। सरकार के मुताबिक, इस निष्पक्ष अध्ययन में क्षेत्र की जैव विविधता, वन्यजीवों की मौजूदगी और जलग्रहण क्षेत्रों का गहन आकलन किया गया था। अध्ययन रिपोर्ट में कड़े पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों और संरक्षण के नियमों का पालन करने की शर्त पर तारा सहित कुछ विशिष्ट ब्लॉकों को खनन के योग्य माना गया था।

फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया 2023 के आंकड़ों का दिया गया संदर्भ

सरकार ने राज्य में हरित आवरण बढ़ाने के अपने रिकॉर्ड को भी सामने रखा है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट 2023 का संदर्भ देते हुए बताया गया कि वर्ष 2021 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ के कुल वन क्षेत्र में 683.62 वर्ग किलोमीटर की शुद्ध बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो देश के सभी राज्यों में सबसे ज्यादा है। सरकार का तर्क है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर ही सभी फैसले लिए जा रहे हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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