
Mata Hasi Devi 200th Jayanti News: छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने प्रवास के दौरान एक विशेष कार्यक्रम में संत माता हासी देवी के सम्मान में दो सौ रुपए का स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी किया। लोकभवन के छत्तीसगढ़ मंडपम में आयोजित इस समारोह में राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी उपस्थित रहे। सरकार के इस कदम को देश और दुनिया में बसे करोड़ों सिंधी समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के छत्तीसगढ़ दौरे और कार्यक्रमों की रूपरेखा
President Droupadi Murmu Raipur Visit: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय दौरे पर हैं। इस दौरान वे रायपुर के इनडोर स्टेडियम में आयोजित सेवा सम्मान पर्व और युवा प्रबोधन कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रही हैं। इसके अलावा उनके बस्तर जिले के पारंपरिक मुरिया दरबार में भी शामिल होने का कार्यक्रम तय किया गया है। राष्ट्रपति के इस दौरे को लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं।
सिंधी समाज की महान विभूति माता हासी देवी का जीवन परिचय
Shadani Darbar Raipur Sant Hasi Devi: माता हासी देवी का जन्म वर्ष 1826 में तत्कालीन सिंध प्रांत में हुआ था। वह सिंधी समाज की एक महान संत और आध्यात्मिक विभूति थीं। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के कल्याण, जरूरतमंदों की सेवा और धार्मिक शिक्षा के प्रसार में समर्पित कर दिया। उनके अन्न भंडार से हमेशा भूखों और गरीबों को सहायता मिलती थी, जिसके कारण उन्हें लाखों लोग अपनी प्रेरणा मानते थे। तीस अप्रैल 1909 को उन्होंने अपनी भौतिक देह का त्याग किया था।
छब्बीस वर्ष की अल्प आयु में संभाली थी शदाणी दरबार की गद्दी
माता हासी देवी रायपुर में स्थित प्रसिद्ध शदाणी दरबार की पंचम पीठाधीश थीं। इतिहास के अनुसार वह मात्र छब्बीस वर्ष की उम्र में शदाणी दरबार की पहली महिला पीठाधीश्वर बनने वाली संत थीं। उन्होंने करीब सत्तावन वर्षों तक पीठाधीश्वर के रूप में शदाणी दरबार की कमान संभाली और हिंदी, संस्कृत तथा संगीत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य किए।
स्मारक सिक्के पर उकेरी गई है माता हासी देवी की विशेष छवि
भारत सरकार द्वारा जारी इस दो सौ रुपए के स्मारक सिक्के की बनावट बेहद खास है। सिक्के के एक तरफ देश का राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ का सिंह और दो सौ रुपए का मूल्य अंकित है, जबकि दूसरी तरफ पूज्य माता हासी देवी की स्पष्ट छवि उकेरी गई है। अधिकारियों के अनुसार इस सिक्के के माध्यम से उनके आध्यात्मिक योगदान और जीवन दर्शन को देश की भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
शदाणी दरबार की विभिन्न इकाइयों से प्राप्त किए जा सकेंगे सिक्के
स्मारक सिक्के का अनावरण होने के बाद देश-विदेश के श्रद्धालु और मुद्रा संग्राहक इसे शदाणी दरबार की विभिन्न इकाइयों के माध्यम से बुक करा सकेंगे। इस विशेष आयोजन से सिंधी समाज में भारी उत्साह का माहौल है। जानकारों का कहना है कि एक संत के सम्मान में इस तरह का राष्ट्रीय स्मारक सिक्का जारी होना समाज के लिए गौरव की बात है।



