VIDEO: क्या होता है बस्तर का ऐतिहासिक मुरिया दरबार जिसमें शामिल हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, जानिए बस्तर दशहरा की अनूठी परंपराएं

Bastar Muriya Darbar 2026: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के जिला मुख्यालय जगदलपुर में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध ‘मुरिया दरबार’ में आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। सिरहासार भवन में आयोजित इस पारंपरिक और अनूठे दरबार में राष्ट्रपति ने आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों, मांझी-चालकियों और पारंपरिक प्रमुखों से सीधा संवाद किया। इस दौरान राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए बेहद भावुक अंदाज में कहा कि वे खुद भी इसी आदिवासी संस्कृति और परंपरा से ताल्लुक रखती हैं।

क्या होता है मुरिया दरबार और इसकी क्या है परंपरा

President Murmu Bastar Visit: जगदलपुर के ऐतिहासिक सिरहासार भवन में हर साल बस्तर दशहरा के समापन अवसर पर मुरिया दरबार का आयोजन किया जाता है। यह किसी पारंपरिक अदालत की तरह होता है, जहां आदिवासी समाज के लोग अपनी समस्याएं, मांगें और सामाजिक सुझाव खुलकर सामने रखते हैं। इस दरबार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बस्तर के कोने-कोने से आए आदिवासी प्रतिनिधि सीधे तौर पर जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने अपने क्षेत्रीय मुद्दे रखते हैं, जो बस्तर की मजबूत लोकतांत्रिक और आदिवासी संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की सात प्रमुख और प्राचीन रस्में

Bastar Dussehra Muriya Darbar Traditions: बस्तर का दशहरा दुनिया का सबसे लंबा चलने वाला अनोखा पर्व है, जो करीब पचहत्तर दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान कई प्रमुख रस्में निभाई जाती हैं:

  • पाट जात्रा: इस रस्म में विशाल लकड़ी के स्तंभ की पूजा कर पर्व की औपचारिक शुरुआत की जाती है।
  • काछनगादी: इस परंपरा के तहत देवी से दशहरा पर्व मनाने की विधिवत अनुमति मांगी जाती है।
  • जोगी बिठाई: इसमें एक विशेष व्यक्ति नौ दिनों तक भूमिगत रहकर कठोर तपस्या करता है।
  • मावली परघाव: इस रस्म के दौरान बस्तर की आराध्य देवी मां मावली का भव्य स्वागत किया जाता है।
  • भीतर रैनी और बाहर रैनी: ये दोनों रस्में पारंपरिक लकड़ी के रथ की परिक्रमा और यात्रा से जुड़ी होती हैं।
  • मुरिया दरबार: यह पर्व के अंतिम चरण में आयोजित होने वाला आदिवासी जनसंवाद दरबार है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने भाषण में साझा किए संस्मरण

मुरिया दरबार को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि बस्तर की संस्कृति और आत्मीयता ने हमेशा उन्हें अपनी ओर आकर्षित किया है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वे खुद भी एक आदिवासी परिवार से आती हैं और उनकी जड़ें इसी संस्कृति से जुड़ी हैं। राष्ट्रपति ने साझा किया कि उनके परिवार में उनके दादाजी और पिताजी मांझी रहे हैं, और वे स्वयं एक गांव के मुखिया यानी मांझी की बेटी हैं। उन्होंने कहा कि भले ही उनके परिवार के बुजुर्ग आज उनके बीच नहीं हैं, लेकिन उनका दिल और जुड़ाव हमेशा से अपनी पारंपरिक जीवनशैली के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है।

आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का जीवंत दस्तावेज है बस्तर

राष्ट्रपति के इस दौरे और मुरिया दरबार में उनकी उपस्थिति से बस्तर के आदिवासी समाज में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पारंपरिक प्रमुखों ने राष्ट्रपति का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। जानकारों का कहना है कि मुरिया दरबार जैसी परंपराएं न केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखती हैं, बल्कि शासन और आदिवासी समाज के बीच संवाद का एक मजबूत सेतु भी साबित होती हैं।

Also Read:Kankali Math Raipur History: साल में सिर्फ एक दिन खुलता है छत्तीसगढ़ का यह रहस्यमयी मंदिर, विजयादशमी पर उमड़ती है भारी भीड़

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button