
Chhattisgarh CBG Policy 2026: छत्तीसगढ़ में खेतों से निकलने वाले कृषि अवशेषों यानी पैरा और नरई को जलाने की मजबूरी अब अन्नदाताओं के लिए मुनाफे का सौदा बनने जा रही है। राज्य सरकार की नई कंप्रेस्ड बायोगैस नीति 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में बिलासपुर जिला प्रशासन ने सबसे पहले पहल की है। कलेक्टर संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में मंथन सभाकक्ष में जिला स्तरीय सीबीजी मॉनिटरिंग समिति की पहली बैठक संपन्न हुई, जिसमें किसानों को उनके कृषि कचरे का सही मूल्य दिलाने की ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है।
पैरा और नरई जलाने से मिलेगी मुक्ति
Bilaspur CBG Monitoring Committee Meeting: अक्सर धान कटाई के बाद किसान खेतों में बचे हुए पैरा और नरई को आग के हवाले कर देते हैं, जिससे भारी मात्रा में वायु प्रदूषण फैलता है। इस नीति के लागू होने से किसानों को अपने कृषि अवशेषों को नष्ट करने के बजाय उन्हें बेचने का विकल्प मिलेगा। कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्रों तक बायोमास की नियमित आपूर्ति होने से किसानों को उनकी फसल के अलावा अतिरिक्त आमदनी का जरिया भी आसानी से मिल जाएगा।

बिलासपुर में हुई पहली उच्चस्तरीय बैठक
Parai Narai Se Kamai CG News: छत्तीसगढ़ कंप्रेस्ड बायोगैस नीति की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद बिलासपुर जिला इस दिशा में कदम उठाने वाला राज्य का पहला जिला बन गया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल की अगुवाई में हुई इस अहम बैठक में जिले के सभी संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक के दौरान यह चर्चा की गई कि किस तरह स्थानीय स्तर पर किसानों को बायोगैस संयंत्रों से जोड़ा जाए ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
ब्लॉक स्तर पर होगा FPO का गठन
Gobardhan Yojana And FPO In Chhattisgarh: किसानों और सीबीजी संयंत्र का संचालन करने वाली कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए प्रशासन ने खास तैयारी की है। इसके तहत राज्य के प्रत्येक विकासखंड स्तर पर किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ का गठन किया जाएगा। ये संगठन किसानों से कचरा संग्रह करने और उसे समय पर संयंत्रों तक पहुंचाने में मुख्य कड़ी की भूमिका निभाएंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से चल सके।

पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बड़ा संबल
Chhattisgarh Compressed Biogas Policy: खेतों में पराली और अवशेष जलाने से न केवल हवा जहरीली होती है बल्कि मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी कमजोर होती है। बायोगैस संयंत्रों में इन अवशेषों के व्यावसायिक उपयोग से वायु प्रदूषण पर प्रभावी अंकुश लगेगा। एक तरफ जहां ग्रामीण इलाकों का कचरा ऊर्जा उत्पादन में इस्तेमाल होगा, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी बड़ी मदद मिलेगी।
गोबरधन योजना से जुड़ेगा जैविक कचरा
इस पूरी योजना के तहत केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी गोबरधन योजना को भी मजबूती से जोड़ा जा रहा है। बैठक में नगरीय निकायों के अंतर्गत निकलने वाले जैविक कचरे और पशुपालकों के गोबर की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बनाकर कचरे के संग्रहण और परिवहन की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए कहा गया है।

किसानों की आय बढ़ाने का नया माध्यम
राज्य सरकार की इस नई पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। कृषि अवशेषों की बिक्री से मिलने वाला पैसा सीधे किसानों के खातों तक पहुंचेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य धान के कटोरे कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में कृषि अपशिष्ट प्रबंधन को एक सफल व्यावसायिक मॉडल के रूप में स्थापित करना है।



