
CG UCC Draft Live In Rules: छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता यानी UCC के प्रस्तावित ड्राफ्ट को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले युवक-युवतियों के लिए नए नियम सामने आ रहे हैं, जिसके तहत उन्हें अपने रिश्ते की जानकारी अनिवार्य रूप से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करानी पड़ सकती है। इसके अलावा यदि कोई जोड़ा आपसी सहमति से या अकेले इस रिश्ते को खत्म करना चाहता है, तो उसकी सूचना भी संबंधित विभाग को देनी होगी।
लिव-इन जोड़ों के लिए पंजीयन और रिश्ता खत्म करने का नियम
Live In Relationship Registration CG: प्रस्तावित मसौदे के अनुसार लिव-इन में रहने वाले युवाओं को प्रशासन के पास अपने संबंध का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे रिश्तों में पारदर्शिता बनाए रखना और भविष्य में होने वाले कानूनी विवादों को रोकना है। यदि भविष्य में दोनों में से कोई भी इस रिश्ते से अलग होना चाहता है, तो उसे भी तय प्रक्रिया के तहत इसकी औपचारिक जानकारी दर्ज करानी होगी ताकि दोनों पक्षों के कानूनी हित सुरक्षित रह सकें।
महिला के लिए गुजारा भत्ता और बच्चों को संपत्ति का हक
Uniform Civil Code Chhattisgarh Update: यूसीसी के इस नए प्रस्ताव में लिव-इन में रहने वाली महिलाओं और उनसे जन्म लेने वाले बच्चों के अधिकारों पर विशेष ध्यान दिया गया है। मसौदे के मुताबिक यदि रिश्ता टूटता है तो महिला को गुजारा भत्ता पाने का अधिकार मिल सकता है। इसके साथ ही ऐसे संबंधों से पैदा होने वाले बच्चों को वैध संतान का दर्जा दिया जाएगा, जिन्हें पिता की पैतृक संपत्ति में अन्य बच्चों के समान कानूनी अधिकार मिलने का प्रावधान रखा गया है।
समिति को मिले एक हजार से अधिक सुझाव और आपत्तियां
CG UCC Committee Report November 2026: समान नागरिक संहिता के गठन के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय समिति को प्रदेशभर से एक हजार से ज्यादा सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। ये सुझाव आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विभिन्न धार्मिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों की ओर से भेजे गए हैं। ऑनलाइन सुझाव देने की अंतिम तिथि तीस अक्टूबर तय की गई थी। अब सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली यह समिति सभी सुझावों का अध्ययन कर रही है।
तीस नवंबर तक राज्य सरकार को सौंपी जाएगी अंतिम रिपोर्ट
Chhattisgarh UCC Live In Alimony Rights: यह पांच सदस्यीय समिति आगामी तीस नवंबर तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप देगी। इसके बाद दिसंबर माह में आयोजित होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान यूसीसी का यह ड्राफ्ट सदन के पटल पर पेश किया जा सकता है। इस प्रस्तावित कानून में विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने और सभी धर्मों के लिए तलाक के नियम एक समान करने जैसे बिंदु भी शामिल किए गए हैं।
आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने की चुनौती
राज्य के बस्तर और सरगुजा संभाग में निवासरत आदिवासी समाजों ने यूसीसी के प्रावधानों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि एक समान कानून लागू होने से उनकी पारंपरिक रूढ़ियों और सांस्कृतिक पहचान पर असर पड़ सकता है। ऐसे में समिति के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि नया कानून बनाते समय आदिवासी समुदायों के पारंपरिक अधिकारों और उनकी संस्कृति का पूरा संरक्षण किया जाए।



