
Petrol Export Duty Zero: दीपावली के त्यौहार से ठीक पहले केंद्र सरकार ने ईंधन पर लगने वाले टैक्स को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने अक्टूबर के अंतिम दिन आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली लेवी यानी एक्सपोर्ट ड्यूटी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। वहीं दूसरी ओर डीजल और हवाई ईंधन यानी एयर टरबाइन फ्यूल पर विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी की गई है। सरकार के इस कदम के बाद घरेलू बाजार में पेट्रोल की कीमतों में बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
डीजल और हवाई ईंधन पर बढ़ाई गई एक्सपोर्ट ड्यूटी
Fuel Price Windfall Tax CG: वित्त मंत्रालय की ओर से जारी दरों के अनुसार अब तक पेट्रोल पर लगने वाली दो रुपये पचास पैसे प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी को शून्य कर दिया गया है। दूसरी तरफ हवाई ईंधन पर लगने वाले शुल्क को दस रुपये पचास पैसे से बढ़ाकर ग्यारह रुपये प्रति लीटर तय किया गया है। इसके अलावा डीजल के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी को आठ रुपये पचास पैसे से बढ़ाकर ग्यारह रुपये पचास पैसे प्रति लीटर कर दिया गया है, यानी इसमें सीधे तीन रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है।
वैश्विक अनिश्चितता और तनाव के कारण लिया गया फैसला
Petrol Price News Update 2026: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए सरकार ने यह बदलाव किया है। विदेश भेजने वाले ईंधन पर यह टैक्स संशोधन केवल दो हफ्तों की अवधि के लिए लागू किया गया है। चौदह दिनों के बाद वैश्विक बाजारों की स्थिति और कच्चे तेल की समीक्षा के आधार पर इन दरों का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा।
क्या आम जनता के लिए सस्ता होगा पेट्रोल
Diesel ATF Windfall Tax Hike: ईंधन निर्यात पर विंडफॉल टैक्स खत्म होने से आम उपभोक्ताओं को सीधी राहत मिलने की संभावना नहीं है। सरकार द्वारा किया गया यह बदलाव देश से बाहर भेजे जाने वाले ईंधन की लेवी से संबंधित है, इसलिए स्थानीय रिफाइनरियों और पेट्रोपंपों पर बिकने वाले पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। आम जनता को पेट्रोल और डीजल पहले की दरों पर ही उपलब्ध होता रहेगा।
रिफाइनिंग कंपनियों और सरकारी राजस्व पर असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब रिफाइनिंग कंपनियां कच्चे तेल को संसाधित कर ऊंचे दामों पर विदेशों में बेचती हैं, तो सरकार उस पर विंडफॉल टैक्स लगाकर अतिरिक्त राजस्व जुटाती है। पेट्रोल पर ड्यूटी शून्य होने से घरेलू रिफाइनरियों को निर्यात में आसानी होगी, जबकि डीजल और जेट फ्यूल पर टैक्स बढ़ने से सरकारी खजाने में राजस्व की आवक बढ़ेगी। सरकार का उद्देश्य वैश्विक अनिश्चितता के दौर में ईंधन की घरेलू आपूर्ति और राजस्व में संतुलन बनाए रखना है।



