
Dhamtari News: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का तेंदूपत्ता अब सात समंदर पार तो नहीं लेकिन देश के कई बड़े राज्यों की पहली पसंद बन गया है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों की बड़ी फर्में इस बार धमतरी के तेंदूपत्ता की खरीदी करने जा रही हैं। धमतरी के जंगलों से निकलने वाले इस ‘हरे सोने’ की गुणवत्ता इतनी बेहतर है कि इसे खरीदने के लिए बाहरी राज्यों के व्यापारियों में होड़ मची रहती है। शासन स्तर पर टेंडर की सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं और प्रशासन अब संग्रहण कार्य शुरू करने की तैयारियों में जुट गया है।
इन खास इलाकों के पत्तों की देशभर में है धाक
धमतरी जिले के कुछ खास वन क्षेत्रों का तेंदूपत्ता अपनी उच्च गुणवत्ता के लिए मशहूर है। जबर्रा, मारागांव, सिंगपुर, बरबांधा, डोकाल और चनागांव जैसे इलाकों में मिलने वाला तेंदूपत्ता बेहतरीन माना जाता है। इसी खूबी की वजह से धमतरी जिले से हर साल करोड़ों रुपये का तेंदूपत्ता व्यवसाय होता है। वन विभाग ने बताया कि संग्रहण से पहले की जरूरी प्रक्रिया यानी बूटा कटाई का काम पूरा हो चुका है। अब बस 1 मई का इंतजार है जब जिले भर में तेंदूपत्ता तोड़ाई का काम आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया जाएगा।
इस साल 26,800 मानक बोरा संग्रहण का रखा गया लक्ष्य
वन विभाग ने चालू सीजन के लिए जिले में 26,800 मानक बोरा तेंदूपत्ता इकट्ठा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस विशाल कार्य को पूरा करने के लिए जिले की 27 समितियों से जुड़े करीब 27,872 संग्राहक दिन-रात मेहनत करेंगे। विभाग के अनुसार बाहरी राज्यों की फर्मों ने न केवल टेंडर पास करा लिया है बल्कि सुरक्षा के तौर पर 10 प्रतिशत अग्रिम राशि भी सरकारी खजाने में जमा कर दी है। यह संग्रहण न केवल विभाग के लिए राजस्व का जरिया है बल्कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का मुख्य आधार भी है।
संग्राहकों की जेब तक पहुंचती है मुनाफे की बड़ी राशि
तेंदूपत्ता का कारोबार धमतरी की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ को कुल 20 करोड़ 3 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। सबसे अच्छी बात यह है कि इस कमाई का एक बड़ा हिस्सा यानी 13 करोड़ रुपये सीधे उन संग्राहकों को वितरित किए गए जिन्होंने जंगलों में जाकर मेहनत की थी। इस साल भी संग्राहकों को उम्मीद है कि बेहतर गुणवत्ता और बाहरी मांग की वजह से उन्हें अपनी मेहनत का अच्छा फल मिलेगा।
बेमौसम बारिश बन सकती है काम में बड़ी बाधा
तेंदूपत्ता संग्रहण के काम में सबसे बड़ी चुनौती कुदरत की मार होती है। जैसे ही अंचल में पत्तों की तोड़ाई शुरू होती है वैसे ही बेमौसम बारिश का खतरा मंडराने लगता है। अगर इस दौरान बारिश हो जाती है तो न केवल तोड़ाई का काम रुक जाता है बल्कि पत्तों को सुखाने में भी बड़ी समस्या आती है। गीले होने पर पत्तों की गुणवत्ता खराब हो जाती है जिससे उनका बाजार भाव गिर जाता है। यही वजह है कि वन विभाग और संग्राहक दोनों ही मौसम के मिजाज को लेकर काफी सतर्क रहते हैं।
लक्ष्य पूर्ति के लिए मौसम की मेहरबानी जरूरी
धमतरी जिले में पिछले तीन-चार सालों का रिकॉर्ड देखें तो बेमौसम बारिश की वजह से संग्रहण का लक्ष्य अधूरा रह जाता है। डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव ने बताया कि विभाग ने अपनी ओर से पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है लेकिन सफलता काफी हद तक मौसम पर निर्भर करती है। धमतरी के तेंदूपत्ता की मांग देश के अन्य हिस्सों में लगातार बनी हुई है इसलिए प्रशासन की कोशिश है कि इस बार बिना किसी बाधा के 26,800 मानक बोरा का लक्ष्य हासिल कर लिया जाए।



