CG PWD Road Construction Corruption: दो-दो मंत्रियों के जिले में भ्रष्टाचार का खेल: 1.40 करोड़ की लागत से बनी सड़क 10 दिन में उखड़ी, हाथ से निकल रही डामर की परत

CG PWD Road Construction Corruption: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से सड़क निर्माण में भारी भरशाही और घटिया निर्माण का एक बड़ा मामला सामने आया है। न्यायधानी बिलासपुर की सियासत में इस समय भारी रसूख है क्योंकि इस जिले से राज्य और केंद्र सरकार में दो-दो ताकतवर मंत्री प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक नाक के नीचे सरकारी बजट की बंदरबांट का खेल जारी है। जिले के दो अलग-अलग ब्लॉकों में लोक निर्माण विभाग (PWD) की देखरेख में बनी नई सड़कों के भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा सोशल मीडिया पर घटिया निर्माण का वीडियो लाइव वायरल करने के बाद हड़कंप मच गया है। अब यह पूरा मामला राजधानी रायपुर में बैठे आला अफसरों तक पहुंच चुका है।

मस्तूरी ब्लॉक में 1.40 करोड़ की सड़क का बुरा हाल, सात दिन भी नहीं टिक सकी डामर की परत

भ्रष्टाचार का सबसे पहला और मुख्य मामला मस्तूरी विकासखंड का है। यहां आमगांव ग्राम पंचायत के आश्रित गांव आमाकोनी से बहतरा तक करीब एक किलोमीटर लंबी डामरीकृत सड़क का निर्माण हाल ही में कराया गया था। इस छोटी सी सड़क के लिए विभाग ने 1 करोड़ 40 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट जारी किया था। निर्माण एजेंसी और ठेकेदार की लापरवाही का आलम यह है कि काम पूरा होने के महज सात से दस दिन के भीतर ही पूरी सड़क उखड़ने लगी है। हालात इतने बदतर हैं कि सड़क की डामर की ऊपरी परत हाथ लगाते ही पापड़ की तरह कबाड़ होकर बाहर आ रही है।

मुरूम और बेस गायब, गिट्टी की जगह मिट्टी डालकर ठेकेदार ने समेटा करोड़ों का काम

आमाकोनी और बहतरा के ग्रामीणों के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों की धज्जियां उड़ाने का सीधा आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि नियमानुसार डामर बिछाने से पहले सड़क के बेस को मजबूत करने के लिए भारी मात्रा में मुरूम, गिट्टी और कंक्रीट का इस्तेमाल किया जाना था। ठेकेदार ने पैसे बचाने के चक्कर में बेस सामग्री की जगह खेतों की साधारण और पीली मिट्टी डालकर रोलर चला दिया। मजबूत आधार न मिलने के कारण डामर और गिट्टियों का मिश्रण सड़क की सतह को पकड़ नहीं पाया और पहली ही गाड़ी गुजरने पर पूरी गिट्टियां बिखर गईं।

पीडब्ल्यूडी सचिव ने बिलासपुर चीफ इंजीनियर को किया तलब, दिए तत्काल जांच के निर्देश

जब ग्रामीणों द्वारा बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ और बिलासपुर प्रशासन की थू-थू होने लगी, तब रायपुर मुख्यालय ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया। लोक निर्माण विभाग (PWD) के राज्य सचिव मुकेश कुमार बंसल ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बिलासपुर मंडल के मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) को तत्काल मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश जारी किए हैं। सचिव ने दोटूक कहा है कि सड़क की मोटाई और डामर की गुणवत्ता की प्रयोगशाला में जांच कराई जाए और इसकी विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट जल्द से जल्द मंत्रालय को सौंपी जाए।

अफसरों ने की मामले को दबाने की कोशिश, सैंपल लेने पहुंची टीम का ग्रामीणों ने किया विरोध

एक तरफ जहां राजधानी से कड़े निर्देश आए हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि वीडियो वायरल होने के बाद पीडब्ल्यूडी के एसडीओ (SDO) और सब-इंजीनियर जब मौके पर मुआयना करने पहुंचे थे, तो उन्होंने इस महाघोटाले को महज एक ‘छोटी-मोटी तकनीकी चूक’ बताकर ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास किया। बाद में जब मंत्रालय के दबाव में दोबारा सैंपल कलेक्ट करने के लिए सरकारी टीम पहुंची, तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने जांच टीम को घेरकर लीपापोती करने का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया।

सरगुजा के बाद अब बिलासपुर में खुली पोल, गौरव पथ के निर्माण पर भी उठ रहे हैं सवाल

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में घटिया इंफ्रास्ट्रक्चर का यह कोई अकेला मामला नहीं है। इससे पहले सरगुजा जिले के एक अंदरूनी ब्लॉक में भी रातभर में बनी सड़क के अगले ही सुबह पूरी तरह उखड़ जाने का वीडियो सामने आया था। बिलासपुर के इस ताजा मामले के बाद अब जिले के नगरीय निकायों में बन रहे ‘गौरव पथ’ और अन्य मुख्य मार्गों की गुणवत्ता पर भी उंगलियां उठने लगी हैं। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद केवल ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट न किया जाए बल्कि निर्माण की जिम्मेदारी संभालने वाले दोषी इंजीनियरों पर भी एफआईआर दर्ज कर उनके वेतन से इस नुकसान की वसूली की जानी चाहिए।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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