
Animesh Kujur Record: भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक बेहद शानदार खबर सामने आई है। युवा धावक अनिमेष कुजूर विदेशी धरती पर सबसे तेज 100 मीटर रेस पूरी करने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। उन्होंने जर्मनी में आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर चैलेंजर के दौरान यह बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। इस प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में 23 वर्षीय अनिमेष ने महज 10.14 सेकेंड में अपनी दौड़ पूरी की। इस बेहतरीन टाइमिंग के साथ उन्होंने न सिर्फ रजत पदक हासिल किया बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना खुद का पुराना रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया।
जर्मनी के ट्रैक पर अनिमेष ने सुधारा अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय
जर्मनी में आयोजित इस रेस के फाइनल में अनिमेष कुजूर दूसरे स्थान पर रहे। प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक दक्षिण अफ्रीका के धावक आर म्लेंगा के नाम रहा जिन्होंने 10.03 सेकेंड में रेस जीतकर पहला स्थान हासिल किया। अनिमेष के करियर का यह अब तक का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (पर्सनल बेस्ट) प्रदर्शन है। खेल विश्लेषकों के अनुसार विदेशी ट्रैक और वहां के मौसम की परिस्थितियों में इस तरह का प्रदर्शन भारतीय एथलीटों के बदलते स्तर को साफ दिखाता है।
देश के इतिहास की दूसरी सबसे तेज 100 मीटर टाइमिंग दर्ज
अनिमेष द्वारा निकाला गया 10.14 सेकेंड का यह समय भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास का दूसरा सबसे तेज प्रदर्शन माना गया है। भारत में राष्ट्रीय स्तर पर 100 मीटर दौड़ का ऑल टाइम रिकॉर्ड 10.09 सेकेंड का है। यह राष्ट्रीय रिकॉर्ड इसी साल रांची में आयोजित फेडरेशन कप के दौरान पंजाब के धावक गुरिंदरवीर सिंह ने बनाया था। देश के शीर्ष दो धावकों के बीच चल रही इस स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से भारतीय स्प्रिंटिंग का स्तर लगातार ऊपर की ओर जा रहा है।
100 मीटर में भारत के सबसे तेज धावकों की सूची
| स्प्रिंटर | टाइमिंग (सेकेंड) |
| गुरिंदरवीर सिंह | 10.09s |
| अनिमेष कुजूर | 10.14s |
| अनिमेष कुजूर | 10.15s |
| गुरिंदरवीर सिंह | 10.17s |
| अनिमेष कुजूर | 10.18s |
फेडरेशन कप के दौरान 24 घंटे में तीन बार बदला था रिकॉर्ड
भारत में रफ्तार के इस खेल में असली रोमांच इसी साल मई के महीने में देखने को मिला था। फेडरेशन कप के दौरान केवल 24 घंटे के भीतर तीन बार राष्ट्रीय रिकॉर्ड की टाइमिंग में बदलाव हुआ। पहले गुरिंदरवीर सिंह ने 10.17 सेकेंड का समय निकालकर अनिमेष का पुराना रिकॉर्ड तोड़ा। इसके तुरंत बाद अगली ही रेस में अनिमेष ने जवाबी हमला करते हुए 10.15 सेकेंड की टाइमिंग के साथ बढ़त बनाई। हालांकि अगले ही दिन फाइनल में गुरिंदरवीर ने 10.09 सेकेंड का ऐतिहासिक समय निकालकर खुद को देश का सबसे तेज धावक साबित कर दिया।
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों में जुटे भारतीय खिलाड़ी
इस शानदार प्रदर्शन के बाद अनिमेष कुजूर सीधे पोलैंड के स्पाला शहर के लिए रवाना होंगे। वहां वे भारतीय एथलेटिक्स टीम के विशेष प्रशिक्षण शिविर (ट्रेनिंग कैंप) का हिस्सा बनेंगे। आपको बता दें कि अनिमेष ने अपने निरंतर प्रदर्शन के दम पर वर्ष 2026 में होने वाले ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स की 100 मीटर और 200 मीटर दोनों श्रेणियों के लिए भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है। खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि इस विदेशी अभ्यास सत्र से उनके प्रदर्शन में और निखार आएगा।
1984 से अब तक ओलिंपिक की 100 मीटर रेस में रहा है एकतरफा दबदबा
दुनिया भर में 100 मीटर की रेस को सबसे प्रतिष्ठित स्पर्धा माना जाता है जिसका वर्ल्ड रिकॉर्ड 9.58 सेकेंड के साथ जमैका के महान धावक उसेन बोल्ट के नाम दर्ज है। इतिहास की बात करें तो वर्ष 1896 में आधुनिक ओलिंपिक की शुरुआत से लेकर 1928 तक केवल श्वेत एथलीट ही इस रेस के चैंपियन बनते थे। वर्ष 1932 में एडी टोलन पहले अश्वेत ओलिंपिक 100 मीटर चैंपियन बने। इसके बाद वर्ष 1984 से लेकर 2024 तक लगातार हर ओलिंपिक में केवल अश्वेत धावक ही दुनिया के सबसे तेज एथलीट का खिताब जीतते आ रहे हैं।



