
Raipur International Ban Cricket Stadium: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने जल संरक्षण और भूजल के अंधाधुंध इस्तेमाल से जुड़े एक मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल की ओर से बार-बार भेजे गए नोटिस की अनदेखी करने पर रायपुर समेत देश के तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियमों में सभी तरह के खेल आयोजनों पर अंतरिम रोक लगा दी गई है। इस कड़े आदेश के बाद अब एनजीटी की लिखित मंजूरी के बिना इन मैदानों पर किसी भी प्रकार की खेल गतिविधि या मैच का आयोजन नहीं किया जा सकेगा।
रायपुर, मुंबई और जयपुर के बड़े स्टेडियमों पर लगा अंतरिम प्रतिबंध
एनजीटी के इस अंतरिम आदेश की जद में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, मुंबई का प्रसिद्ध डॉ. डी.वाई. पाटिल स्टेडियम और जयपुर का ऐतिहासिक सवाई मानसिंह स्टेडियम आ गए हैं। इस पूरे मामले पर अधिकरण की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होनी तय हुई है। अदालत ने आदेश जारी करते हुए कहा कि देश के कई राज्य इस समय पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। ऐसे संवेदनशील समय में बड़े खेल परिसरों की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी बनती है कि वे जल संवर्धन से जुड़े नियमों का पूरी ईमानदारी से पालन करें।
वाटर रीसाइक्लिंग और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग न होने पर जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर गहरी नाराजगी व्यक्त की कि इन बड़े स्टेडियमों में पानी को दोबारा इस्तेमाल करने (रीसाइक्लिंग) और बारिश के पानी को सहेजने (रेन वॉटर हार्वेस्टिंग) के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। मैदान और पिचों को हरा-भरा रखने के लिए रोजाना लाखों लीटर पानी की जरूरत होती है। इसके लिए पूरी तरह भूजल यानी जमीन के नीचे के पानी पर निर्भर रहने को कोर्ट ने पर्यावरण के लिहाज से बेहद खतरनाक माना है। अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे जल्द से जल्द जल प्रबंधन की वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करें।
बार-बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी प्रबंधन ने नहीं दिया कोई जवाब
अधिकरण के रिकॉर्ड के अनुसार केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) और एनजीटी की तरफ से इन स्टेडियम प्रशासनों को अपनी सफाई पेश करने के लिए कई मौके दिए गए थे। इसके बावजूद रायपुर, जयपुर और मुंबई के खेल संघों या स्टेडियम प्रबंधकों ने अब तक अदालत में अपना आधिकारिक जवाब दाखिल नहीं किया। कानूनी नोटिस को लगातार नजरअंदाज करने की इसी ढुलमुल कार्यप्रणाली की वजह से अदालत को इन स्टेडियमों के खिलाफ खेल गतिविधियों को पूरी तरह रोकने जैसा कड़ा और दंडात्मक कदम उठाना पड़ा है।
देश के छह बड़े मैदानों से मांगी गई थी पानी के स्रोत की जानकारी
गौरतलब है कि इसी साल अप्रैल के महीने में एनजीटी ने देश के छह प्रमुख क्रिकेट स्टेडियमों को नोटिस जारी कर एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। कोर्ट ने पूछा था कि आउटफील्ड और पिचों के रखरखाव के लिए जो पानी इस्तेमाल हो रहा है उसका असली स्रोत क्या है और जल प्रबंधन की क्या योजना है। इस सूची में रायपुर, दिल्ली का अरुण जेटली स्टेडियम, लखनऊ का इकाना स्टेडियम, कटक का बाराबती स्टेडियम, जयपुर का सवाई मानसिंह और मुंबई का डी.वाई. पाटिल स्टेडियम शामिल थे।
दिल्ली और लखनऊ ने जमा की रिपोर्ट, कटक ने मांगा अतिरिक्त समय
इस पूरे विवाद में दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम और लखनऊ के इकाना स्टेडियम के प्रबंधकों ने समय रहते नियमों के तहत अपनी विस्तृत रिपोर्ट और जवाब अदालत के सामने पेश कर दिया है जिसकी वजह से वे इस कार्रवाई से बच गए। दूसरी तरफ कटक के बाराबती स्टेडियम प्रबंधन ने स्थिति स्पष्ट करने और दस्तावेज जुटाने के लिए अदालत से कुछ और दिनों की मोहलत मांगी है। जवाब न देने वाले बाकी तीन स्टेडियमों पर फिलहाल ताला लटकने की नौबत आ गई है जब तक कि वे 17 अगस्त की सुनवाई में ठोस विकल्प नहीं रखते।



