Dhamtari Naxal Surrender: धमतरी में लाल आतंक को बड़ा झटका: 47 लाख के इनामी 9 नक्सलियों ने डाले हथियार, ऑटोमैटिक बंदूकों के साथ किया सरेंडर

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों को साल की सबसे बड़ी कामयाबी मिली है। मैनपुर डिवीजन में सक्रिय 9 खूंखार नक्सलियों ने पुलिस महानिरीक्षक (IG) के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। इन नक्सलियों में 2 महिलाएं और 7 पुरुष शामिल हैं, जो लंबे समय से धमतरी, गरियाबंद और ओडिशा के नुआपाड़ा इलाकों में दहशत का पर्याय बने हुए थे। आत्मसमर्पण करने वाले ये नक्सली बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और तेलंगाना के मूल निवासी हैं। हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले इन नक्सलियों ने अपने साथ 5 आधुनिक ऑटोमैटिक हथियार और एक भरमार बंदूक भी पुलिस को सौंपी है।

इन चेहरों ने किया आत्मसमर्पण, लाखों का था इनाम

पुलिस के मुताबिक सरेंडर करने वाले इन 9 नक्सलियों पर सरकार ने कुल 47 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। इनमें ज्योति और उषा जैसी महिला नक्सली भी शामिल हैं, जिन पर 8-8 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम था। सरेंडर करने वालों की सूची इस प्रकार है:

  • ज्योति उर्फ रेखा: 8 लाख रुपये का इनाम
  • उषा उर्फ बल्मा: 8 लाख रुपये का इनाम
  • रीना: 5 लाख रुपये का इनाम
  • रोनी उर्फ उमा: 5 लाख रुपये का इनाम
  • निरंजन: 5 लाख रुपये का इनाम
  • सिंधु: 5 लाख रुपये का इनाम
  • अमिला उर्फ सन्नी: 5 लाख रुपये का इनाम
  • लक्ष्मी उर्फ आरती और उषा

31 मार्च तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश से लाल आतंक को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए 31 मार्च 2026 तक की समय-सीमा तय की है। इसी अभियान के तहत बस्तर से लेकर गरियाबंद और धमतरी तक नक्सली संगठनों के बड़े कमांडर और सदस्य लगातार हथियार डाल रहे हैं। हाल ही में गरियाबंद में भी 9 बड़े नक्सलियों ने सरेंडर किया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के कारण अब नक्सली संगठन अपनी अंतिम सांसें गिन रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों को अब शासन की योजना के तहत सहायता राशि और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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