
प्रधानमंत्री आवास योजना (PDS) के तहत अपना पक्का घर बनाने का सपना देख रहे रायपुर के सैकड़ों परिवारों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। योजना की किस्तें समय पर न मिलने की वजह से शहर के चंगोराभाठा समेत कई इलाकों में मकानों का निर्माण कार्य बीच में ही अटक गया है। हितग्राही नगर निगम और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर थक चुके हैं, लेकिन उन्हें कोई ठोस समाधान नहीं मिल रहा है। पुराने कच्चे मकान तोड़कर अब ये लोग किराए के कमरों में रहने को मजबूर हैं, जिससे उन पर आर्थिक और मानसिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
पुराना घर तोड़ा और नई किस्त अटकी: बेघर हुए दर्जनों परिवार
चंगोराभाठा क्षेत्र के ओम प्रकाश ठाकुर, पिंकी देवांगन और अंजनी भोई जैसे दर्जनों हितग्राहियों की कहानी एक जैसी है। इन लोगों ने सरकार के भरोसे अपना पुराना आशियाना ढहा दिया था ताकि पक्का मकान बन सके। किसी ने नींव डाली तो किसी ने दीवारें खड़ी कर लीं, लेकिन पिछले छह महीनों से अगली किस्त का पैसा नहीं आया है। अब हालत यह है कि निर्माण सामग्री की कीमतें बढ़ रही हैं और मजदूरों का खर्च निकालना मुश्किल हो गया है। बिना छत के घर खंडहर जैसे दिख रहे हैं और हितग्राही बेघर होकर अपनों या किराए के मकानों में गुजारा कर रहे हैं।
निगम का अजीब तर्क: छत डालो तभी मिलेगा अगली किस्त का पैसा
शुक्रवार को छाया पार्षद डॉ. सुभाषिनी ऋषि देवांगन के नेतृत्व में पीड़ित परिवार नगर निगम मुख्यालय पहुंचे और नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी से मुलाकात की। इस दौरान निगम के अधिकारियों ने एक अजीब पेंच फंसा दिया। अधिकारियों का कहना है कि नियमानुसार जब तक हितग्राही मकान की छत की ढलाई (लेंटर) का काम पूरा नहीं कर लेते, तब तक तीसरी किस्त जारी नहीं की जा सकती। वहीं, मजदूरों और गरीब परिवारों का कहना है कि उनके पास ढलाई के लिए पैसे ही नहीं बचे हैं और मजदूरी करने की वजह से उन्हें बैंक या निजी साहूकारों से कर्ज भी नहीं मिल पा रहा है।
दिल्ली से आएगा पैसा: केंद्र सरकार के नए नियम ने बढ़ाई उलझन
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब योजना के प्रभारी अधिकारी अमित बोस को बुलाया गया, तो एक नई जानकारी सामने आई। अधिकारी ने बताया कि करीब छह महीने पहले जारी एक नए आदेश के तहत अब आवास योजना की राशि सीधे केंद्र सरकार की ओर से हितग्राहियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। इस तकनीकी बदलाव और नई प्रक्रिया की वजह से भी किस्तों के भुगतान में देरी हो रही है। इस स्पष्टीकरण ने हितग्राहियों की चिंता और बढ़ा दी है क्योंकि अब उन्हें स्थानीय स्तर पर कोई समाधान नजर नहीं आ रहा है।
कर्ज का जाल और किराए की मार: दोहरी मार झेल रहे गरीब
किस्तें न मिलने से प्रभावित परिवारों पर दोहरी आर्थिक मार पड़ रही है। एक तरफ जहां उन्हें हर महीने किराए का भुगतान करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ अधूरे मकान में लगी निर्माण सामग्री बर्बाद हो रही है। जमुना साहू और उमा विश्वकर्मा जैसे लोगों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि किस्तें समय पर मिलेंगी, लेकिन अब वे कर्ज में डूब चुके हैं। निर्माण कार्य रुकने से ठेकेदार और मजदूर भी अपना पैसा मांग रहे हैं, जिससे सामाजिक रूप से भी इन परिवारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
विपक्ष का अल्टीमेटम: किस्त जारी न होने पर आंदोलन की चेतावनी
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने अधिकारियों को हिदायत दी है कि गरीब परिवारों को इस तरह अधर में नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार की नई प्रणाली में कोई दिक्कत है, तो निगम प्रशासन को उच्च स्तर पर पत्राचार कर इसका समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही प्रभावित हितग्राहियों के खातों में राशि नहीं पहुंची, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। विपक्षी दल का कहना है कि सरकार की ढुलमुल कार्यप्रणाली की सजा उन गरीबों को मिल रही है जिन्होंने अपने जीवन भर की जमापूंजी इस घर को बनाने में लगा दी है।
पारदर्शिता का अभाव: सूचना तंत्र पर उठे सवाल
इस पूरे विवाद ने नगर निगम के सूचना तंत्र की पोल खोल दी है। हितग्राहियों का आरोप है कि नियमों में बदलाव या किस्तों की नई प्रक्रिया के बारे में उन्हें पहले कभी नहीं बताया गया। अगर उन्हें पता होता कि पैसा दिल्ली से सीधे आना है या छत ढलाई तक किस्त नहीं मिलेगी, तो वे शायद अपना पुराना घर तोड़ने में इतनी जल्दबाजी नहीं करते। अब प्रशासन का कहना है कि वे तकनीकी खामियों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि अटकी हुई राशि जल्द जारी हो सके।



