
MLA Ramkumar Toppo High Court Relief: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाई कोर्ट ने सीतापुर विधानसभा क्षेत्र के चुनावी विवाद पर बड़ा फैसला सुनाते हुए भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो को बड़ी राहत दी है। जस्टिस संजय के अग्रवाल की सिंगल बेंच ने उस चुनाव याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें टोप्पो के निर्वाचन को चुनौती दी गई थी। कोर्ट के इस निर्णय के बाद रामकुमार टोप्पो की विधायकी पर मंडरा रहे अनिश्चितता के बादल छंट गए हैं। इस मामले में टोप्पो की ओर से अधिवक्ता शरद मिश्रा ने अपना पक्ष रखा था।
नामांकन निरस्त होने को लेकर दायर हुई थी याचिका
यह पूरा कानूनी विवाद 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ था। सीतापुर सीट से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी मुन्ना लाल टोप्पो का नामांकन फॉर्म रिटर्निंग ऑफिसर ने रद्द कर दिया था। इसके विरोध में मुन्ना लाल ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो के साथ ही चुनाव अधिकारियों के खिलाफ भी याचिका दायर की। याचिकाकर्ता का आरोप था कि उनका नामांकन पत्र गलत आधार पर खारिज किया गया है और इसे बहाल किया जाना चाहिए।
शपथपत्र में सरकार के साथ अनुबंध की बात आई सामने
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान भाजपा विधायक के वकील ने महत्वपूर्ण साक्ष्य पेश किए। कोर्ट को बताया गया कि मुन्ना लाल टोप्पो ने खुद अपने नामांकन फॉर्म और शपथपत्र में यह स्वीकार किया था कि उनका सरकार के साथ व्यापारिक अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) मौजूद है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9A के तहत अगर किसी व्यक्ति का सरकार के साथ कोई व्यावसायिक करार या अनुबंध सक्रिय है तो वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता है। इसी आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका फॉर्म निरस्त किया था।
जल जीवन मिशन के ठेके बने अयोग्यता का आधार
कोर्ट में चली बहस के दौरान यह तथ्य सामने आया कि याचिकाकर्ता मुन्ना लाल टोप्पो जल जीवन मिशन के तहत सरकारी कार्यों के ठेके ले रहे थे। प्रतिवादी पक्ष ने तर्क दिया कि जब उम्मीदवार ने खुद दस्तावेजों में स्वीकार किया है कि वह सरकारी अनुबंधों में शामिल है तो नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया पूरी तरह विधिसम्मत है। याचिकाकर्ता बाद में अपनी ही स्वीकारोक्ति से पलट नहीं सकता। कोर्ट ने दस्तावेजों और विभागीय रिपोर्ट के परीक्षण के बाद इस दलील को सही माना।
रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को कोर्ट ने माना सही
जस्टिस संजय के अग्रवाल की पीठ ने पाया कि रिटर्निंग ऑफिसर ने जो भी कदम उठाए थे वे उपलब्ध रिकॉर्ड और नियमों के दायरे में थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहे कि उनका नामांकन अनुचित तरीके से निरस्त हुआ था। न्यायालय ने माना कि जब उम्मीदवार स्वयं अयोग्यता की शर्तों के दायरे में आता है तो चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बचता।
कोर्ट ने याचिका खारिज कर रामकुमार टोप्पो को दी राहत
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बिलासपुर हाई कोर्ट ने निर्वाचन याचिका क्रमांक 01/2024 को निरस्त करने का आदेश सुनाया। इस फैसले के साथ ही रामकुमार टोप्पो की जीत पर उठे सवाल खत्म हो गए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया में हुए खर्च को सभी पक्षकार स्वयं वहन करेंगे। भाजपा खेमे में इस फैसले के बाद खुशी की लहर है क्योंकि सीतापुर जैसी महत्वपूर्ण सीट पर उनकी पकड़ अब कानूनी रूप से और मजबूत हो गई है।
चुनावी राजनीति और आगे की राह
सीतापुर विधानसभा क्षेत्र हमेशा से चर्चा में रहा है। 2023 के चुनाव में रामकुमार टोप्पो ने यहां से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। चुनाव याचिका के खारिज होने से उनके समर्थकों का उत्साह बढ़ गया है। वहीं याचिकाकर्ता मुन्ना लाल टोप्पो और उनके सहयोगियों के लिए यह बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है। अब रामकुमार टोप्पो बिना किसी कानूनी अड़चन के अपने क्षेत्र के विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।



