
CG Ayushman Scheme New Rules: छत्तीसगढ़ के निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों से तय पैकेज से ज्यादा पैसे वसूलने और बुनियादी सुविधाएं न होने के बावजूद उन्हें भर्ती रखने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन गड़बड़ियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी कलेक्टर्स और जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को नए निर्देश जारी किए हैं।
Ayushman Scheme Rate Board Order: अब योजना से जुड़े हर अस्पताल को प्रवेश द्वार या रिसेप्शन के पास बड़ा डिस्प्ले बोर्ड लगाना होगा। इस बोर्ड पर आयुष्मान के तहत आने वाली बीमारियों के नाम और उनके सरकारी पैकेज की दरें हिंदी में साफ-साफ दर्ज करनी होंगी, ताकि मरीज और उनके परिजन पहले से ही इलाज के खर्च से वाकिफ रह सकें।
विशेषज्ञ और सुविधा के बिना भर्ती पर लगी पाबंदी, अस्पतालों को मिले 8 निर्देश
CG Hospital New Guidelines: स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि यदि किसी अस्पताल में किसी गंभीर बीमारी का विशेषज्ञ डॉक्टर, आईसीयू या ऑपरेशन थियेटर जैसी जरूरी सुविधा मौजूद नहीं है, तो वे केवल पैकेज की राशि भुनाने के लिए मरीज को रोककर नहीं रख सकते। ऐसे मामलों में मरीज को तुरंत आंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) या किसी अन्य बड़े सरकारी अस्पताल में रेफर करना होगा। इस व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के लिए सभी संबद्ध अस्पतालों को 8 प्रमुख दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
- मुख्य स्थान पर रेट बोर्ड: अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार या रिसेप्शन पर बीमारियों और उनके तय पैकेज रेट का बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा।
- हेल्पडेस्क पर मिलेगी पूरी जानकारी: योजना के दायरे से बाहर आने वाली बीमारियों और सुविधाओं का ब्योरा हेल्पडेस्क पर उपलब्ध कराना होगा।
- प्रशिक्षित काउंसलर की तैनाती: मरीजों और परिजनों को योजना की सही जानकारी देने के लिए हर अस्पताल में ट्रेंड काउंसलर रखना होगा।
- विशेषज्ञ डॉक्टर बिना भर्ती नहीं: जिस बीमारी का विशेषज्ञ डॉक्टर अस्पताल में मौजूद नहीं है, उस मरीज को भर्ती करने पर रोक रहेगी।
- समय पर हायर सेंटर रेफर: जरूरी संसाधन न होने पर मरीज को बिना किसी देरी के बड़े चिकित्सा संस्थान में रेफर करना होगा।
- अतिरिक्त पैसे का दबाव नहीं: पैकेज के अलावा मरीज या उनके परिजनों पर किसी भी तरह के अतिरिक्त भुगतान का दबाव नहीं बनाया जा सकेगा।
- क्षमता के अनुसार ही इलाज: अस्पताल अपने पास उपलब्ध संसाधनों और बिस्तरों की क्षमता के हिसाब से ही मरीजों का उपचार करेंगे।
- देरी करने पर होगी कार्रवाई: गंभीर मरीजों को केवल भर्ती रखकर समय गंवाने के बजाय तुरंत उपयुक्त अस्पताल भेजना होगा, ताकि किसी की जान को खतरा न हो।



