
Bastar Dussehra 2026: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में लोक आस्था और जनजातीय परंपरा का सबसे बड़ा उत्सव शुरू हो गया है। बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के मंदिर प्रांगण में बुधवार, 12 अगस्त को हरेली अमावस्या के मौके पर पाट जात्रा पूजा विधान संपन्न हुआ। इस पूजा के साथ ही 75 दिनों तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व का औपचारिक आगाज हो गया है।
थुरलू खोटला रस्म के साथ शुरू हुआ विशालकाय रथ निर्माण का काम
पाट जात्रा पूजा विधान के दौरान बस्तर के पारंपरिक मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी, पटेल और सेवादारों ने मिलकर थुरलू खोटला रस्म निभाई। इस रस्म के तहत रथ निर्माण में इस्तेमाल होने वाले औजारों की पूजा की जाती है और उन्हें तैयार किया जाता है। बस्तर दशहरा समिति ने क्षेत्र के सभी ग्रामीणों और सेवादारों से इस पूरे अनुष्ठान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया है।
सितंबर से अक्टूबर तक आयोजित होंगी दशहरा की प्रमुख पूजा विधियां
Bastar Dussehra Schedule: बस्तर दशहरा समिति की ओर से जारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार 12 अगस्त को पाट जात्रा के बाद 24 सितंबर को डेरी गड़ाई पूजा होगी। इसके बाद 10 अक्टूबर को काछनगादी, 11 अक्टूबर को कलश स्थापना और 12 अक्टूबर को जोगी बिठाई की रस्म निभाई जाएगी। 13 से 18 अक्टूबर तक रोजाना नवरात्रि पूजा और रथ परिक्रमा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे।
महाअष्टमी, निशा जात्रा और मावली परघाव का रहेगा विशेष आकर्षण
उत्सव के मुख्य पड़ाव के तहत 18 अक्टूबर को सुबह बेल पूजा और 19 अक्टूबर को महाअष्टमी व निशा जात्रा पूजा होगी। 20 अक्टूबर को कुंवारी पूजा, जोगी उठाई और भव्य मावली परघाव का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद 21 अक्टूबर को भीतर रैनी और 22 अक्टूबर को बाहर रैनी रस्म के तहत रथ परिक्रमा कराई जाएगी।
मुरिया दरबार और मावली माता की डोली विदाई के साथ होगा समापन
उत्सव के अंतिम दौर में 23 अक्टूबर को सुबह काछन जात्रा और दोपहर में ऐतिहासिक मुरिया दरबार सजेगा, जिसमें पारंपरिक जनप्रतिनिधि अपनी समस्याएं रखेंगे। 24 अक्टूबर को कुटुम्ब जात्रा के जरिए देवी-देवताओं को विदाई दी जाएगी। अंत में 27 अक्टूबर को मावली माता की डोली की ससम्मान विदाई के साथ इस 75 दिवसीय ऐतिहासिक पर्व का औपचारिक समापन होगा।
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