
छत्तीसगढ़ में सरकारी कामकाज और पैसों के लेन-देन को लेकर 1 अप्रैल 2026 से एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब कोषालयों (ट्रेजरी) में पुराने ढर्रे पर चलने वाली भौतिक बीटीआर (BTR) व्यवस्था को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। संचालनालय कोष एवं लेखा के निर्देशानुसार, अब सारा काम ‘ई-कोष’ के साइबर ट्रेजरी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन होगा। इस फैसले का सबसे बड़ा असर सरकारी भुगतान की रफ्तार और पारदर्शिता पर पड़ेगा। शासन का लक्ष्य है कि सरकारी खजाने से होने वाले हर एक रुपये के आहरण को पूरी तरह पेपरलेस और भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जाए।
ऑनलाइन जनरेट होगा बीटीआर नंबर: अब फाइलों के बोझ से मिलेगी मुक्ति
नई व्यवस्था के तहत अब आहरण एवं वितरण अधिकारियों (DDO) को भौतिक बीटीआर बुक के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। अब डीडीओ को ई-बीटीआर के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिसके बाद साइबर ट्रेजरी के माध्यम से डिजिटल नंबर आवंटित कर दिए जाएंगे। खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में अब किसी भी प्रकार की नकद राशि या चालान जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ई-पेरोल और ई-बिल सॉफ्टवेयर में भी पुराने नंबरों की श्रृंखला को ध्यान में रखकर ही नए डिजिटल नंबर दिए जाएंगे ताकि रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी न हो।
डिजिटल गवर्नेंस की ओर मजबूत कदम: भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम
शासन द्वारा ई-वाउचर के बाद ई-बीटीआर लागू करना डिजिटल इंडिया की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इस पारदर्शी सिस्टम से फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म हो जाएगी क्योंकि हर एक ट्रांजैक्शन का डिजिटल फुटप्रिंट मौजूद रहेगा।
- पारदर्शिता: हर बीटीआर का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा, जिससे पैसों की हेरफेर नामुमकिन होगी।
- तेज प्रक्रिया: कागजी औपचारिकताओं में होने वाली देरी अब बीते दिनों की बात हो जाएगी।
- पेपरलेस काम: फाइलों और रजिस्टरों के रखरखाव का झंझट खत्म होगा।
- सटीक ऑडिट: डिजिटल ट्रैक उपलब्ध होने से ऑडिट की प्रक्रिया आसान और विश्वसनीय बनेगी।
डीडीओ और कर्मचारियों को बड़ी राहत: अब नहीं लगाने होंगे कोषालय के चक्कर
इस प्रशासनिक सुधार से सबसे ज्यादा राहत उन अधिकारियों को मिलेगी जो बिल पास कराने और बीटीआर आवंटन के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरते थे। साइबर ट्रेजरी से सीधे नंबर मिलने से काम की गति बढ़ेगी।
- समय की बचत: आवेदन से लेकर नंबर मिलने तक का काम मिनटों में होगा।
- नकद लेनदेन खत्म: चालान भरने और कैश जमा करने की झंझट से पूरी तरह मुक्ति।
- गलतियों में कमी: मानव हस्तक्षेप कम होने से मानवीय त्रुटियों की संभावना नगण्य हो जाएगी।
- जवाबदेही: पोर्टल पर हर गतिविधि के लिए संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी।
डुप्लीकेट नंबरों पर लगेगा पूर्ण विराम: सिस्टम खुद करेगा निगरानी
अक्सर भौतिक व्यवस्था में एक ही नंबर के दोहराव या डुप्लीकेट बीटीआर की समस्या आती थी, जिससे वित्तीय जोखिम बना रहता था। अब साइबर ट्रेजरी सॉफ्टवेयर क्रमवार नंबर जारी करेगा, जिससे नंबरों के टकराव की समस्या स्वतः समाप्त हो जाएगी।
- ऑटोमेशन: सॉफ्टवेयर खुद तय करेगा कि अगला नंबर क्या होगा, जिससे धांधली रुकेगी।
- सुरक्षित डेटा: ई-बीटीआर डेटा पूरी तरह एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित सर्वर पर रहेगा।
- तत्काल ट्रैकिंग: बजट खर्च और आहरण की स्थिति को रियल-टाइम में देखा जा सकेगा।
- नियमों का पालन: सॉफ्टवेयर नियमों के विरुद्ध होने वाले किसी भी प्रयास को तुरंत ब्लॉक कर देगा।
वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता: सुशासन की नई मिसाल
1 जुलाई 2024 से शुरू हुई ई-वाउचर प्रणाली की सफलता के बाद अब ई-बीटीआर को अनिवार्य करना राज्य की वित्तीय सेहत के लिए अच्छा संकेत है। इससे न केवल सरकारी खजाने पर नजर रखना आसान होगा, बल्कि बजट के सही इस्तेमाल की निगरानी भी बेहतर होगी। यह बदलाव बताता है कि प्रशासन अब आधुनिक तकनीक के जरिए सुशासन (Good Governance) को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए पूरी तरह तैयार है। 1 अप्रैल से लागू होने वाली यह व्यवस्था पूरे प्रदेश के सरकारी विभागों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।



