
Petrol, Diesel Price Hike Today: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के देशों में चल रहे गंभीर भू-राजनीतिक और सैन्य तनाव का सीधा असर अब छत्तीसगढ़ के आम नागरिकों की जेब पर दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल के कारण तेल कंपनियों ने शनिवार को एक बार फिर ईंधन के दामों में बढ़ोतरी कर दी है। आज पेट्रोल के दाम में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। पिछले महज 9 दिनों के भीतर यह तीसरी बार है जब पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाई गई हैं। इस अल्पावधि में ही ईंधन करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है, जिससे आम जनता का घरेलू बजट पूरी तरह चरमरा गया है।
9 दिनों में तीसरी बार बढ़े दाम, जानिए रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा में क्या हैं आज के नए रेट
तेल कंपनियों द्वारा शनिवार को की गई इस बढ़ोतरी के बाद छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। राजधानी रायपुर में अब पेट्रोल की कीमत बढ़कर 105.19 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल 98.29 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है। बिलासपुर में पेट्रोल 106.05 रुपये और डीजल 99.16 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। वहीं, सरगुजा संभाग में दूरी और परिवहन खर्च के कारण कीमतें सबसे ज्यादा हैं, वहां पेट्रोल 106.52 रुपये और डीजल 99.68 रुपये प्रति लीटर के भाव पर पहुंच गया है। इससे पहले 15 मई और 19 मई को भी कीमतों में बड़ी वृद्धि की गई थी।
ईरान-अमेरिका विवाद के कारण 100 डॉलर के पार पहुंचा क्रूड ऑयल, तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव
इस अप्रत्याशित मूल्य वृद्धि के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस संकट से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मिल रहा था, जो अब उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। कच्चे तेल के आयात पर भारी खर्च होने के कारण घरेलू तेल कंपनियां लगातार घाटे में चल रही थीं, जिसकी भरपाई के लिए कंपनियों ने ईंधन की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी का यह कड़ा कदम उठाया है।
ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ेगा सीधा असर, सब्जियां, दूध और राशन सामग्री के महंगे होने की आशंका
डीजल के दामों में हुई इस भारी बढ़ोतरी का सीधा और पहला असर मालवाहक वाहनों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर देखने को मिलेगा। ट्रकों का परिचालन खर्च बढ़ने से दूसरे राज्यों और दूर-दराज के इलाकों से आने वाली हरी सब्जियां, फल, दालें, दूध और रोजमर्रा की अन्य जरूरी वस्तुएं आने वाले दिनों में महंगी हो सकती हैं। ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि जब तक ईंधन की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक वे पुराने मालभाड़े पर गाड़ियां नहीं चला सकते। ऐसे में इस बात की पूरी आशंका है कि आने वाले हफ्ते में छत्तीसगढ़ के बाजारों में महंगाई की एक नई लहर देखने को मिल सकती है।
खरीफ सीजन से ठीक पहले डीजल महंगा होने से किसान परेशान, बढ़ेगी खेती-किसानी की लागत
छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है और यहां की एक बहुत बड़ी आबादी पूरी तरह से खेती-किसानी पर निर्भर है। जून के महीने से राज्य में खरीफ फसलों की बुआई का काम बड़े पैमाने पर शुरू होने वाला है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में डीजल का महंगा होना किसानों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। खेतों की जुताई के लिए इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर, थ्रेसर, और सिंचाई के लिए चलने वाले पंपिंग सेटों में डीजल का उपयोग बहुतायत में होता है। ईंधन के दाम बढ़ने से खेती की प्रति एकड़ लागत काफी बढ़ जाएगी, जिसका सीधा और प्रतिकूल असर किसानों की शुद्ध आय पर पड़ेगा।
आम जनता और नौकरीपेशा वर्ग में भारी नाराजगी, बस और ऑटो का किराया बढ़ने के आसार
बार-बार होने वाली इस मूल्य वृद्धि के कारण छत्तीसगढ़ के शहरी और ग्रामीण इलाकों के मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों में गहरा असंतोष है। रोज ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों, कैब चालकों, ऑटो चालकों और छोटे व्यापारियों का कहना है कि उनकी सीमित आय के बीच वाहनों का मासिक खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। पेट्रोल-डीजल के इस नए रेट के बाद आने वाले दिनों में स्कूली वाहनों, सिटी बसों और ऑटो के किराए में भी बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। जनता का कहना है कि पहले से ही रसोई गैस और अन्य सामान महंगे हैं, ऐसे में ईंधन के दाम बढ़ना उनके घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।
टैक्स और एक्साइज ड्यूटी का खेल, समझिए देश में कैसे तय होती है ईंधन की अंतिम कीमत
भारत अपनी घरेलू जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। जब यह तेल देश में आता है, तो उसकी अंतिम कीमत तय करने में कई कड़ियां शामिल होती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए कच्चे तेल की कीमत में डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, रिफाइनरी का खर्च, केंद्र सरकार द्वारा लगाई जाने वाली एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क), पेट्रोल पंप डीलरों का कमीशन और राज्य सरकार द्वारा वसूला जाने वाला वैट (VAT) शामिल होता है। अलग-अलग राज्यों में वैट की दरें भिन्न होने के कारण ही देश के हर शहर में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग-अलग दिखाई देते हैं।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने जनता को दिलाया भरोसा, कहा- देश में ईंधन की कोई कमी नहीं
ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी और सोशल मीडिया पर चल रही विभिन्न प्रकार की चर्चाओं के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी किया है। मंत्रालय ने देशवासियों को पूरी तरह आश्वस्त करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार सुरक्षित है। देश के सभी हिस्सों में ईंधन की सप्लाई पूरी तरह से सामान्य और सुचारू बनी हुई है। सरकार ने आम उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे किसी भी तरह की भ्रामक अफवाहों में आकर पैनिक बाइंग या पेट्रोल पंपों पर अनावश्यक भीड़ लगाने से बचें।



