
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक थाना प्रभारी (टीआई) को निलंबित कर दिया है। निलंबन की यह कार्रवाई अवैध शराब की सूचना मिलने के बावजूद मौके पर देर से पहुंचने और लापरवाही बरतने के कारण की गई है। केरगांव थाने में पदस्थ टीआई दुमनलाल डडसेना पर आरोप है कि ग्रामीणों द्वारा अवैध शराब पकड़े जाने और इसकी सूचना देने के बावजूद वे तत्काल मौके पर नहीं पहुँचे। एसपी के सख्त निर्देश के बाद भी थानेदार घंटों की देरी से घटनास्थल पर पहुँचे, जिसे उच्चाधिकारियों ने गंभीर लापरवाही माना है।
ग्रामीणों ने खुद पकड़ी थी अवैध शराब
पूरा मामला 19 नवंबर का है, जब केरगांव थाना क्षेत्र के ग्राम सलोनी में ग्रामीणों ने खुद ही अवैध शराब पकड़ी। शराब पकड़ने के बाद ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना थाना प्रभारी दुमनलाल डडसेना को फोन पर दी और तत्काल मौके पर आकर कार्रवाई करने का आग्रह किया। हालांकि, थाना प्रभारी डडसेना ने कथित तौर पर निजी कार्य में व्यस्त होने का हवाला देते हुए घटनास्थल पर आने से इनकार कर दिया। ग्रामीणों ने जब देखा कि थाना प्रभारी मौके पर नहीं आ रहे हैं, तो उन्होंने सीधे पुलिस अधीक्षक (एसपी) सूरज सिंह परिहार से संपर्क किया।
एसपी के निर्देश को भी किया अनदेखा
ग्रामीणों से सूचना मिलने के बाद, एसपी सूरज सिंह परिहार ने तुरंत केरगांव थाना प्रभारी को फोन किया और बिना देरी किए तत्काल मौके पर पहुँचकर आवश्यक कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए। चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस अधीक्षक के स्पष्ट निर्देश के बावजूद भी थाना प्रभारी डडसेना ने आदेश का पालन नहीं किया। बताया जा रहा है कि एसपी के निर्देश के बावजूद, वे लगभग तीन घंटे की देरी से घटनास्थल पर पहुँचे। इस बीच, थाना प्रभारी से पहले एसपी के निर्देश पर एसडीओपी मौके पर पहुँच चुके थे।
थानेदार का निलंबन, रक्षित केंद्र से संबद्ध
थाना प्रभारी दुमनलाल डडसेना द्वारा निर्देशों का पालन न करने और मौके पर समय पर नहीं पहुंचने को एसपी ने गंभीर लापरवाही माना है। इसके अलावा, बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के निजी कार्य के चलते थाना क्षेत्र से बाहर जाना भी उनकी लापरवाही में शामिल है। एसपी सूरज सिंह परिहार ने इस गंभीर अनियमितता पर सख्त रुख अपनाते हुए केरगांव थाना प्रभारी दुमनलाल डडसेना को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन के बाद उन्हें रक्षित केंद्र में संबद्ध कर दिया गया है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब ग्रामीण खुद से अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए आगे आते हैं और पुलिस को सूचना देते हैं, तब भी थाना प्रभारी द्वारा इस प्रकार की लापरवाही दिखाना जनता के विश्वास को ठेस पहुँचाता है। एसपी की यह त्वरित कार्रवाई यह संदेश देती है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में किसी भी तरह की ढिलाई या निर्देशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।
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