
Jhiram Kand Decision Today: छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे भीषण और चर्चित राजनीतिक हत्याकांडों में से एक झीरम घाटी मामले में आज यानी 5 सितंबर को NIA कोर्ट का फैसला आ सकता है। 25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हमला किया था। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व गृहमंत्री महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 29 लोगों की जान चली गई थी। इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया अब अपने निर्णायक पड़ाव पर पहुंच गई है।
10 आरोपियों की किस्मत पर कोर्ट सुनाएगा निर्णय
CG Jhiram Ghati Hatyakand: इस आपराधिक मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन चलाया गया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो चुकी है, जिसके बाद शेष 10 आरोपियों पर अदालत अपना फैसला सुनाएगी। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए हैं। इसके अलावा जांच एजेंसियों ने घटना से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी और भौतिक दस्तावेज भी विशेष अदालत के समक्ष साक्ष्य के रूप में पेश किए हैं।
10 अगस्त को दोनों पक्षों की अंतिम बहस हुई थी पूरी
विशेष एनआईए अदालत में इस मामले की अंतिम बहस बीते माह 10 अगस्त को पूरी हो गई थी। अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से विस्तार से दलीलें पेश किए जाने के बाद जज ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद से ही फैसले की तारीख को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया के बाद आज का दिन इस मामले के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
घटना की जांच के लिए बने आयोग और एसआईटी से उपजे सवाल
Jhiram Valley Attack Update: झीरम घाटी हमले की जांच को लेकर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर कई पड़ाव देखे गए। घटना के तुरंत बाद 2013 में जस्टिस प्रशांत मिश्रा की अध्यक्षता में राज्य सरकार ने एक जांच आयोग का गठन किया था। इसके बाद 2018 में राज्य की कांग्रेस सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया था। हालांकि, केंद्रीय जांच एजेंसी एनआईए और राज्य की एसआईटी के बीच जांच के क्षेत्राधिकार को लेकर लंबे समय तक कानूनी गतिरोध भी बना रहा।
पीड़ित परिवारों और राजनीतिक हलकों में उत्सुकता
झीरम हमले में जान गंवाने वाले नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और कार्यकर्ताओं के परिजन पिछले 13 वर्षों से अदालत के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। राज्य के राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ आम जनता की नजरें भी एनआईए कोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी हुई हैं। अदालत का यह निर्णय मामले में न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर तय होगी आरोपियों की भूमिका
अदालत में पेश किए गए 101 गवाहों के बयानों और जांच एजेंसी के साक्ष्यों के आधार पर यह तय होगा कि आरोपी दोषी ठहराए जाते हैं या उन्हें साक्ष्यों के अभाव में राहत मिलती है। एनआईए कोर्ट परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और फैसला सामने आने के साथ ही इस बहुचर्चित मामले में कानूनी निर्णय की स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएगी।



