El Nino Alert: इस बार गायब हो जाएगी कड़ाके की ठंड! अल नीनो के कारण भारत में बढ़ेगा गर्मी और फसल हो सकती है प्रभावित

El Nino Alert: भारत में इस बार दिसंबर और जनवरी के महीनों में आमतौर पर पड़ने वाली कड़ाके की ठंड गायब रह सकती है। प्रशांत महासागर का पानी तेजी से गर्म होने के कारण अल नीनो का प्रभाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इसके चलते देश में सामान्य से कम बारिश और तापमान में बढ़ोतरी की आशंका गहरा गई है। मौसम के इस बदलते मिजाज के कारण कृषि क्षेत्र और जल संसाधनों पर गहरा असर पड़ सकता है।

प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ा तापमान

WMO Alert On El Nino: प्रशांत महासागर में अल नीनो पूरी तरह से सक्रिय हो चुका है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार, समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है। मई से जुलाई के बीच नीनो इंडेक्स जहां सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया था, वहीं अगस्त तक इसमें और ज्यादा वृद्धि देखी गई। इसके अलावा समुद्र की गहराई में भी तापमान सामान्य से कई डिग्री अधिक बना हुआ है, जो इस स्थिति को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद कर रहा है।

फरवरी 2027 तक बना रह सकता है अल नीनो का प्रभाव

India Weather Update: विश्व मौसम विज्ञान संगठन का अनुमान है कि इस स्थिति का असर फरवरी 2027 तक बना रह सकता है। यह प्रभाव 2026 के उत्तरार्ध में अपने चरम पर पहुंचने की संभावना है। संगठन की प्रमुख सेलेस्टे साउलो का कहना है कि दुनिया के कई हिस्सों में सूखे और बेमौसम बारिश की वजह से नुकसान दर्ज किया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि अल नीनो का यह दौर पहले से गर्म हो रही धरती के लिए गंभीर चुनौती है।

भारत में रबी फसलों और पेयजल आपूर्ति पर पड़ सकता है असर

India Weather Forecast: भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए यह बदलाव चिंताजनक है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों के मौसम में औसत तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा सकता है। तापमान में इस बढ़ोतरी का सीधा असर गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों की पैदावार पर पड़ेगा। इसके अलावा, मानसून के दौरान कम बारिश होने के कारण प्रमुख जलाशयों और बांधों में जलस्तर घट रहा है, जिससे आने वाले दिनों में सिंचाई और पीने के पानी की किल्लत बढ़ सकती है।

वैश्विक स्तर पर मौसम का संतुलन बिगड़ने की आशंका

अल नीनो के प्रभावी होने से दुनिया भर में हवाओं और वर्षा का सामान्य चक्र प्रभावित होता है। एशिया और अफ्रीका के कई इलाकों में लंबे समय तक सूखा पड़ने का जोखिम बढ़ गया है, जिससे जंगलों में आग लगने जैसी घटनाएं हो सकती हैं। वहीं दूसरी तरफ, कुछ देशों में अचानक अत्यधिक बारिश और बाढ़ के हालात बन सकते हैं। सर्दियों के दौरान सामान्य से अधिक तापमान रहने से कई क्षेत्रों में असमय गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।

ग्लोबल वार्मिंग के कारण स्थिति हुई और अधिक गंभीर

हालांकि अल नीनो एक प्राकृतिक मौसमी प्रक्रिया है, लेकिन लगातार बढ़ रहे वैश्विक तापमान ने इसे और अधिक तीव्र बना दिया है। वातावरण में कार्बन उत्सर्जन की वजह से समुद्र और हवा पहले से अधिक गर्म हो चुके हैं। पिछले वर्षों में आए अल नीनो के कारण भी तापमान के कई रिकॉर्ड टूटे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में सक्रिय यह मौसमी घटना आने वाले समय में तापमान और मौसम के पुराने रिकॉर्ड्स को प्रभावित कर सकती है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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