
CG Legislative Assembly Monsoon Session: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सदन के भीतर एक बेहद दिलचस्प वाकया देखने को मिला। सक्ती के वेदांता पावर प्लांट में हुई औद्योगिक दुर्घटना को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस चल रही था। इसी बीच जवाब देते समय उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन की जुबान अचानक फिसल गई और उन्होंने अनजाने में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को माननीय मुख्यमंत्री कहकर संबोधित कर दिया। मंत्री के मुंह से यह शब्द निकलते ही पूरे सदन का माहौल बदल गया और सदस्य मुस्कुराने लगे। हालांकि अपनी इस चूक का एहसास होते ही मंत्री ने फौरन शब्दों को सुधारा और सदन से इसके लिए खेद जताया।
सक्ती वेदांता पावर प्लांट हादसे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को घेरा
इस मजेदार वाकये से पहले सदन के भीतर औद्योगिक सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर चर्चा चल रही थी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सक्ती स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए बड़े हादसे का मुद्दा उठाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करके सरकार ने शुरुआती गंभीरता जरूर दिखाई है। इसके साथ ही उन्होंने सवाल दागा कि क्या सरकार भविष्य में होने वाले सभी हादसों में बड़ी कंपनियों के डायरेक्टरों पर ऐसे ही केस दर्ज करेगी या फिर यह कार्रवाई सिर्फ इसी मामले तक सीमित रहेगी।
पुराने हादसों का हवाला देकर विपक्ष ने पूछा, क्या सभी कंपनियों के निदेशकों पर होगी कानूनी कार्रवाई
भूपेश बघेल ने आबकारी और उद्योग विभाग के पुराने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी मंत्री के खुद के क्षेत्र में वेदांता के एक अन्य हादसे में 42 लोगों की जान चली गई थी लेकिन उस वक्त चेयरमैन अनिल अग्रवाल के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया था। वहीं सक्ती मामले में 25 लोगों की मौत के बाद सीधे चेयरमैन का नाम जोड़ा गया। बघेल ने पूछा कि राज्य में हाल के दिनों में जिन अन्य फैक्ट्रियों में दुर्घटनाएं हुई हैं क्या उनके भी शीर्ष प्रबंधन और निदेशकों पर ऐसी ही सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उद्योग मंत्री की फिसली जुबान, कहा- मुख्यमंत्री जी अनिल अग्रवाल को बचाना चाहते हैं
विपक्ष के इन लगातार तीखे हमलों का जवाब देने के लिए जैसे ही उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन अपनी सीट पर खड़े हुए, वे थोड़ा असहज हो गए। जवाब देने के फेर में उनकी जुबान लड़खड़ा गई और उन्होंने सदन के पटल पर कह दिया कि मुख्यमंत्री जी अनिल अग्रवाल को बचाना चाहते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री को वर्तमान मुख्यमंत्री के तौर पर संबोधित करने और इस तरह के उलझे हुए जवाब पर भूपेश बघेल ने तुरंत आपत्ति जताई। मंत्री ने अपनी गलती को स्वीकार करते हुए तुरंत माफी मांगी और फिर आदरपूर्वक पूर्व मुख्यमंत्री शब्द का इस्तेमाल करते हुए अपनी बात आगे बढ़ाई।
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मंत्री बोले- जो भी दोषी होगा वह बचेगा नहीं
जुबान फिसलने के इस घटनाक्रम के बाद भूपेश बघेल ने मुख्य विषय पर आते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने केवल राजनीतिक दबाव और मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए चेयरमैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। हकीकत यह है कि इस मामले में आगे की जांच पूरी तरह से ठप पड़ी है और किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस पर उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने विभाग का पक्ष रखते हुए साफ किया कि निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के तहत जांच जारी है और जो भी अधिकारी या संचालक दोषी पाया जाएगा उस पर सख्त कार्रवाई होगी।
सदन में अनिल अग्रवाल का नाम लेने पर भड़के अजय चंद्राकर
चर्चा के दौरान जब बार-बार उद्योगपति अनिल अग्रवाल का नाम लिया जाने लगा तो भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने संसदीय परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपनी बात रखने के लिए सदन में उपस्थित नहीं है, उसका नाम लेकर इस तरह सीधी कार्रवाई की मांग नहीं की जा सकती। चंद्राकर ने सुझाव दिया कि यदि विपक्ष को इतनी ही आपत्ति है तो जिस व्यक्ति पर आरोप लगे हैं उसे विधानसभा की समिति के समक्ष बुलाकर सीधे स्पष्टीकरण मांगा जाना चाहिए, जिस पर भूपेश बघेल ने भी सहमति जताते हुए सरकार को उन्हें समन भेजने की चुनौती दी।



