
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसद में देश के सरकारी प्राथमिक स्कूलों की बदहाली का मुद्दा पूरी मजबूती से उठाया। उन्होंने विशेष रूप से उन स्कूलों की ओर ध्यान आकर्षित किया जो केवल ‘एक शिक्षक’ के भरोसे चल रहे हैं। सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की कि छत्तीसगढ़ के वनांचल और आकांक्षी जिलों में एकल शिक्षक वाली व्यवस्था को समाप्त करने के लिए एक निश्चित समयसीमा तय की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) में असंतुलन के कारण बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ रहा है।
आरटीई मानकों की अनदेखी: केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं कई स्कूल
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सदन में अतारांकित प्रश्न के जरिए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत शिक्षकों की संख्या निर्धारित है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। देश के कई राज्यों में प्राथमिक विद्यालय केवल एक शिक्षक के सहारे संचालित हो रहे हैं। सांसद का तर्क था कि भले ही सरकार ने स्कूलों के लिए आधुनिक भवन और सुविधाएं जुटा दी हों, लेकिन जब तक विषय-विशेषज्ञ शिक्षक ही नहीं होंगे, तब तक इन संसाधनों का कोई लाभ छात्रों को नहीं मिल पाएगा।
पीएम-श्री योजना पर सवाल: केवल इमारतों से नहीं, काबिल शिक्षकों से बदलेगी तस्वीर
सदन में चर्चा के दौरान सांसद ने ‘प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया’ (PM-SHRI) योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल चमचमाते भवन और बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार कर देने से पढ़ाई का स्तर नहीं सुधरेगा। इसके लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित और अपने विषय में माहिर शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य है। अग्रवाल ने केंद्र से आग्रह किया कि आकांक्षी जिलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए राज्यों की निगरानी और सख्त की जानी चाहिए ताकि वनांचल के बच्चों को भी बराबरी का हक मिल सके।
केंद्र का जवाब: शिक्षकों की भर्ती और तैनाती राज्यों की जिम्मेदारी
सांसद के सवालों का जवाब देते हुए शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने संवैधानिक स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि शिक्षा समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है, इसलिए शिक्षकों की भर्ती, उनकी सेवा शर्तें और स्कूलों में तैनाती का मुख्य अधिकार राज्य सरकारों के पास होता है। मंत्री ने कहा कि शिक्षकों की सेवानिवृत्ति और स्कूलों में बच्चों के बढ़ते नामांकन के कारण रिक्तियां एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसे समय पर भरना पूरी तरह राज्यों का दायित्व है।
समग्र शिक्षा योजना: दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षकों के लिए आवासीय सुविधा पर जोर
केंद्र सरकार ने बताया कि वह ‘समग्र शिक्षा योजना’ के माध्यम से राज्यों को हर संभव वित्तीय मदद दे रही है। पहाड़ी, दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वहां आवासीय क्वार्टर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि अगर शिक्षकों, विशेषकर महिला शिक्षकों के रहने की सुरक्षित व्यवस्था होगी, तो वे दूरस्थ क्षेत्रों में लंबे समय तक टिक कर सेवाएं दे सकेंगी। इसके लिए केंद्र राज्यों को अलग से बजट भी आवंटित कर रहा है।
डिजिटल ट्रेनिंग और बजट: ‘निष्ठा’ कार्यक्रम से शिक्षकों को बनाया जा रहा हाईटेक
शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, शिक्षण की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई डिजिटल पहल की जा रही हैं। ‘निष्ठा’ (NISHTHA) कार्यक्रम के तहत लाखों शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और डिजिटल तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा, पीएम-श्री स्कूलों में प्रति शिक्षक 2,500 रुपये और डाइट (DIET) संस्थानों को शैक्षणिक गतिविधियों के लिए तीन लाख रुपये तक का बजट दिया गया है। सरकार का दावा है कि वह राज्यों को लगातार आरटीई मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दे रही है।
यूडाइज प्लस डेटा: पब्लिक पोर्टल पर उपलब्ध है एकल शिक्षक स्कूलों की सूची
सरकार ने सदन को जानकारी दी कि वर्ष 2024-25 के यूडाइज प्लस (UDISE+) डेटा के आधार पर देश के सभी एकल शिक्षक स्कूलों की राज्यवार सूची सार्वजनिक कर दी गई है। कोई भी नागरिक इस पोर्टल पर जाकर अपने क्षेत्र के स्कूलों की स्थिति देख सकता है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अंत में केंद्र से फिर अपील की कि छत्तीसगढ़ जैसे वनांचल बहुल राज्यों में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए विशेष निगरानी तंत्र विकसित किया जाए ताकि भविष्य में कोई भी स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे न रहे।



