
CG Sports Department Scam: छत्तीसगढ़ के खेल एवं युवा कल्याण विभाग में बस्तर और सरगुजा ओलंपिक के दौरान खिलाड़ियों के लिए की गई खेल सामग्रियों की खरीदी में बड़ा वित्तीय फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों के लिए ट्रैक सूट, टी-शर्ट, शॉर्ट्स और जूतों की खरीद बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दरों पर की गई है। शुरुआती दस्तावेजों और शिकायतों के अनुसार मनमाने दाम पर सामान खरीदकर सरकारी खजाने को लगभग एक करोड़ सैंतालीस लाख रुपए की चपत लगाई गई है। इस मामले की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुकी है, जिसके बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
तीन करोड़ रुपए का टेंडर और चहेते वेंडर को लाभ पहुंचाने का आरोप
Bastar And Sarguja Olympics Procurement Scam: सामने आए दस्तावेजों के मुताबिक बस्तर और सरगुजा ओलंपिक के लिए खेल सामग्री खरीदने हेतु तीन करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया था। यह प्रक्रिया दस सितंबर को जेम पोर्टल के माध्यम से शुरू की गई थी, लेकिन इक्कीस अक्टूबर की देर रात दस बजकर तीस मिनट पर नेशनल प्रोडक्ट मार्ट रायपुर को लगभग दो करोड़ नवासी लाख रुपए की सप्लाई का कार्य आदेश दे दिया गया। आरोप है कि पूरी प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर एक ही वेंडर को फायदा पहुंचाया गया है।
बाजार दर से दोगुने दामों पर हुई ट्रैक सूट और टी-शर्ट की खरीदी
CG Sports Department Tender Corruption News: शिकायत के अनुसार खेल विभाग ने खिलाड़ियों के लिए जो ट्रैक सूट अठारह सौ रुपए प्रति नग की दर से खरीदे हैं, वे अन्य विभागों और राज्यों में काफी कम कीमत पर उपलब्ध हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने समान गुणवत्ता के ट्रैक सूट बारह सौ रुपए और आदिवासी विकास विभाग कांकेर ने एक हजार रुपए में खरीदे थे। इसी तरह दो सौ रुपए कीमत वाली टी-शर्ट को विभाग ने चार सौ नब्बे रुपए प्रति नग के हिसाब से खरीदा है, जबकि ओडिशा सरकार और दिल्ली की संस्था ने इसे दो सौ से ढाई सौ रुपए में खरीदा था।
शॉर्ट्स और जूतों की खरीद में भी बड़े पैमाने पर की गई मनमानी
CG Sports Department Tender Corruption News: सामग्रियों की सूची में शॉर्ट्स और जूतों की कीमतों में भी भारी अंतर देखा गया है। खेल विभाग ने शॉर्ट्स के लिए चार सौ पचासी रुपए का भुगतान किया है, जबकि अन्य जगहों पर इसकी कीमत दो सौ रुपए दर्ज की गई है। इसके अलावा यूनिस्टार कंपनी के जूते बाजार में पांच सौ रुपए प्रति सेट उपलब्ध हैं, लेकिन विभाग ने इसके लिए वेंडर को पंद्रह सौ रुपए प्रति सेट की दर से भुगतान किया है। इन सभी मदों में मनमाने दाम दिखाकर सरकारी पैसों का दुरुपयोग किया गया है।
तय नियमों को ताक पर रखकर महज सात दिनों में पूरी हुई सप्लाई
सरकारी नियमों के अनुसार खरीदी गई खेल सामग्रियों के नमूने की जांच कराने के साथ-साथ लोगो, सील और डिजाइन का अनुमोदन लेना अनिवार्य होता है। सामान्य तौर पर इस पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में दस दिन से अधिक का समय लगता है। हालांकि इस मामले में महज सात दिनों के भीतर तीन करोड़ रुपए की सामग्री की आपूर्ति और देयक प्रस्तुत कर दिए जाने का दावा किया गया है, जिसे विभागीय जानकार असंभव मान रहे हैं।
बिना किसी ठोस कारण के दो बार बढ़ाई गई निविदा की अवधि
निविदा प्रक्रिया के दौरान नियमों के मुताबिक किसी विशेष परिस्थिति में ही समय सीमा बढ़ाई जाती है, जिसके लिए उचित कारणों का उल्लेख करना जरूरी होता है। इस मामले में बिना किसी स्पष्ट कारण के दो बार निविदा की अवधि में विस्तार किया गया है। आरोप है कि यह बढ़ोतरी चहेते वेंडर को अपने सभी दस्तावेज तैयार करने, लैब की रिपोर्ट बनवाने और औपचारिकताएं पूरी करने के लिए समय देने के उद्देश्य से की गई थी।
विपक्ष और जानकारों के निशाने पर आई खेल विभाग की कार्यप्रणाली
खरीदी में सामने आए इन बड़े आंकड़ों और अनियमितताओं के बाद खेल विभाग की पारदार्मिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों का कहना है कि जेम पोर्टल के नाम पर नियमों की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर वित्तीय लाभ पहुंचाया गया है। विपक्षी दलों और स्थानीय स्तर पर भी इस मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके।
खेल मंत्री अरुण साव का बयान, गड़बड़ी मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई
Arun Sao Reaction On Sports Department Scam: इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने पहले ही निर्देश दिए थे कि खिलाड़ियों की सामग्री की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जेम पोर्टल के माध्यम से खरीदी होने के कारण अनियमितता की गुंजाइश कम होती है, फिर भी वे पूरे मामले की फाइल की जांच करवाएंगे। मंत्री ने आश्वासन दिया है कि यदि जांच में कोई भी गड़बड़ी या भ्रष्टाचार पाया जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ निश्चित रूप से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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