
Vedanta Power Plant Accident: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए बॉयलर ब्लास्ट ने भीषण रूप ले लिया है। इस दुखद हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों की संख्या अब बढ़कर 17 हो गई है। जब यह हादसा हुआ तब 4 मजदूरों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था लेकिन इलाज के दौरान अन्य मजदूरों की स्थिति बिगड़ने से मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता गया। रायगढ़ मेडिकल कॉलेज और रायपुर के अस्पतालों में भर्ती घायल मजदूर फिलहाल जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
घायलों की स्थिति और शिनाख्त की कोशिश
Sakthi News: इस धमाके में कुल 36 मजदूर बुरी तरह झुलस गए थे। वर्तमान में 18 घायलों का उपचार अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है जहाँ कुछ की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। मृतकों में ठंडाराम, पप्पू कुमार, अमृत लाल पटेल और उत्तर प्रदेश के रहने वाले बृजेश कुमार की पहचान कर ली गई है। बाकी शवों की शिनाख्त के लिए पुलिस और प्रशासन की टीमें परिजनों के साथ मिलकर काम कर रही हैं ताकि उन्हें उनके गृहग्राम भेजा जा सके।
परिजनों का आक्रोश और प्रबंधन की ओर से राहत
धमाके के बाद प्लांट परिसर के बाहर परिजनों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने प्रबंधन पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। प्लांट के बाहर बढ़ते तनाव को देखते हुए वेदांता प्रबंधन ने मुआवजे का ऐलान किया है। कंपनी ने हर मृतक के परिवार को 35 लाख रुपये की आर्थिक मदद और परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी देने का वादा किया है। इसके अलावा गंभीर रूप से झुलसे लोगों को 15 लाख रुपये दिए जाएंगे।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया गहरा दुख
इस घटना पर केंद्र और राज्य सरकार ने भी सक्रियता दिखाई है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की बात कही गई है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस हादसे को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों के लिए 5 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की अलग से सहायता राशि मंजूर की है।
मजिस्ट्रियल जांच के जरिए होगी दोषियों की पहचान
सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने इस पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या बॉयलर के संचालन में किसी तरह की तकनीकी खराबी थी या फिर यह मानवीय भूल का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने साफ निर्देश दिए हैं कि जांच की रिपोर्ट आते ही उन अधिकारियों या कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी जिनकी लापरवाही से इतने सारे लोगों की जान गई है।
सुरक्षा मानकों पर उठ रहे हैं बड़े सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्लांट में समय-समय पर मशीनों की जांच नहीं की जाती जिससे इस तरह के बड़े खतरे बने रहते हैं। प्रशासन अब जिले के अन्य प्लांटों में भी सुरक्षा ऑडिट करने की योजना बना रहा है ताकि भविष्य में ऐसी किसी बड़ी अनहोनी को रोका जा सके। फिलहाल प्लांट में उत्पादन रोक दिया गया है और फॉरेंसिक टीम साक्ष्य जुटाने में लगी है।
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