
CG New Rail Corridor Project: नवा रायपुर को बेहतर रेल कनेक्टिविटी से जोड़ने और औद्योगिक गतिविधियों को रफ्तार देने के लिए एक बड़ी रेल परियोजना की शुरुआत हो चुकी है. इस मल्टी ट्रैकिंग रेल प्रोजेक्ट के तहत रायपुर जिले के अभनपुर क्षेत्र के 16 गांवों की करीब 518 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा. जिला प्रशासन ने इस संबंध में आधिकारिक तौर पर भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी कर दी है. इसके साथ ही प्रभावित किसानों और भू-स्वामियों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए एक महीने का समय दिया गया है. इससे पहले रेलवे ने मंदिर हसौद क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण की कागजी कार्रवाई शुरू की थी, जिसके बाद अब इस काम का दायरा अभनपुर तहसील तक पहुंच गया है.
अभनपुर के इन 16 गांवों की जमीनों पर दौड़ेगी ट्रेन, सूची जारी
रेलवे कॉरिडोर के निर्माण के लिए प्रशासन ने उन सभी प्रभावित गांवों को चिह्नित कर लिया है जहां के किसानों की कृषि या व्यावसायिक भूमि इस परियोजना के दायरे में आ रही है. इन क्षेत्रों के भू-स्वामियों को भू-अर्जन अधिकारियों के समक्ष अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे. भूमि अधिग्रहण की जद में आने वाले प्रमुख गांवों के नाम इस प्रकार हैं:
- पलौद और गिरोला
- परसदा और खट्टी
- अभनपुर और उरला
- सारखी और कोलर
- खोरपा और ढोंढरा
- बेलभाठा और तर्रा
- जामगांव और नवागांव
- थनौद और खरखराडीह
छत्तीसगढ़ से ओडिशा को जोड़ेगा नया रूट, माल परिवहन को मिलेगा सीधा फायदा
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक इस पूरे कॉरिडोर की कुल लंबाई 248 किलोमीटर होगी. यह नया रेल मार्ग न केवल नवा रायपुर के रहवासियों को यात्रा की आधुनिक सुविधा देगा, बल्कि छत्तीसगढ़ को पड़ोसी राज्य ओडिशा से भी सीधे और बेहतर तरीके से जोड़ देगा. इस रूट के तैयार होने से राज्य में माल परिवहन की क्षमता बढ़ेगी, जिससे बड़े उद्योगों को अपना सामान दूसरे राज्यों में भेजने में कम समय लगेगा. साथ ही इससे व्यापारिक गतिविधियों को भी एक नया बाजार मिलने की उम्मीद है.
दो सौ हेक्टेयर से अधिक जमीन का होगा अधिग्रहण, आंकड़ों में समझें पूरा गणित
इस बड़े प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने जमीनों का पूरा पैमाना तैयार कर लिया है. इस रेलवे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित होने वाले कुल क्षेत्रफल का पूरा ब्यौरा इस प्रकार है:
- अभनपुर क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल: 145.78 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा.
- गोबरानवापारा का कुल क्षेत्रफल: 64.65 हेक्टेयर जमीन परियोजना के दायरे में आएगी.
- परियोजना का संपूर्ण क्षेत्रफल: दोनों क्षेत्रों को मिलाकर कुल 210.43 हेक्टेयर (लगभग 518 एकड़) भूमि अधिग्रहित होगी.
केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी मल्टी ट्रैकिंग परियोजना, प्रधानमंत्री मोदी ने दी थी मंजूरी
इस परियोजना की महत्ता को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसे अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2025 में देश की जिन चार बड़ी मल्टी ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई थी, यह प्रोजेक्ट भी उसी का एक अहम हिस्सा है. इस पूरे राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के मुख्य तकनीकी और आर्थिक बिंदु इस प्रकार हैं:
- योजना का नाम: मल्टी ट्रैकिंग परियोजना
- राज्यों के बीच कनेक्टिविटी: छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और ओडिशा
- कुल दूरी और कवर्ड जिले: देश के 15 जिलों को मिलाकर कुल 1247 किलोमीटर का ट्रैक बनेगा.
- परियोजना की कुल लागत: इस पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाने में 18,658 करोड़ रुपये खर्च होंगे.
- डीजल की संभावित बचत: ट्रेन परिचालन सुगम होने से सालाना करीब 22 करोड़ रुपये के डीजल की बचत होगी.
छत्तीसगढ़ के इन 8 जिलों के सीमेंट और इस्पात उद्योगों को मिलेगी मजबूती
इस नए रेल मार्ग के शुरू होने के बाद राजधानी रायपुर और उसके आसपास के तमाम औद्योगिक क्षेत्रों के लिए कच्चे माल और तैयार उत्पादों के परिवहन का एक सुलभ विकल्प तैयार हो जाएगा. रेलवे ट्रैक के इस नए विस्तार से छत्तीसगढ़ के कई जिलों को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचेगा. इस लिस्ट में शामिल प्रमुख जिले इस प्रकार हैं:
- रायगढ़ और जांजगीर-चांपा
- सक्ती और बिलासपुर
- बलौदा बाजार और रायपुर
- दुर्ग और राजनांदगांव
बुनियादी ढांचे में सुधार से बढ़ेगा औद्योगिक निवेश, प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
इस नई रेल लाइन के बिछने का सबसे बड़ा फायदा बलौदाबाजार और उससे लगे हुए औद्योगिक बेल्ट को मिलेगा, जहां भारी संख्या में सीमेंट संयंत्र और इस्पात इकाइयां संचालित हैं. इस मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास से राज्य में नए औद्योगिक निवेश के रास्ते खुलेंगे और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे.



