धमतरी में अफीम की खेती का शोर: भाजपा नेता के फार्म हाउस पर उठ रहे सवाल, JCB से सबूत मिटाने का संगीन आरोप

छत्तीसगढ़ में अफीम की अवैध खेती को लेकर मचे घमासान के बीच अब धमतरी जिला भी विवादों के घेरे में आ गया है। जिले के नगरी-सिहावा इलाके में बड़े पैमाने पर अफीम उगाए जाने के दावों ने सियासी पारा गरमा दिया है। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ जैसे संगठनों ने जिला प्रशासन पर मामले को दबाने का सीधा आरोप मढ़ा है। संगठनों का कहना है कि सत्ता पक्ष से जुड़े एक रसूखदार नेता के खेत में यह काला कारोबार फल-फूल रहा था और भेद खुलने के डर से रातों-रात सबूतों को खुर्द-बुर्द कर दिया गया।

कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन: संगठनों ने अफीम की खेती पर कार्रवाई की मांग की

सोमवार को छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के दर्जनों कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए धमतरी कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में सिहावा क्षेत्र में चल रही नशे की खेती के खिलाफ फौरन एक्शन लेने की मांग की। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पूरे प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से अफीम पकड़े जाने की खबरें आ रही हैं और अब धमतरी में भी इसके तार जुड़ रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे आंदोलन को और उग्र करेंगे।

20 एकड़ में काली कमाई का खेल: भाजपा नेता के फार्म हाउस पर शक की सुई

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के अध्यक्ष डोमेश्वर साहू ने सनसनीखेज दावा किया कि नगरी क्षेत्र में लगभग 20 एकड़ की जमीन पर अफीम की फसल लहलहा रही थी। साहू के मुताबिक, यह जमीन एक भाजपा नेता के फार्म हाउस का हिस्सा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वहां कोई अवैध काम नहीं हो रहा था, तो अचानक रातों-रात जेसीबी मशीन बुलाकर खड़ी फसल को नष्ट करने की क्या मजबूरी थी? संगठनों का आरोप है कि रसूख का इस्तेमाल कर अफीम के पौधों को मिट्टी में मिला दिया गया ताकि कोई कानूनी अड़चन न आए।

राजनीतिक दबाव में प्रशासन: मामले को रफा-दफा करने की कोशिश

जोहार छत्तीसगढ़ संगठन के प्रतिनिधि निखलेश देवान साहू ने आरोप लगाया कि प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सिहावा नगरी इलाके में अफीम और गांजे की खेती की खबरें पिछले कई दिनों से आम हैं, लेकिन पुलिस और राजस्व विभाग मौन साधे हुए हैं। साहू ने मांग की कि जिस जमीन पर जेसीबी चली है, उसके खसरे और मालिकाना हक की जांच सार्वजनिक की जाए। साथ ही वहां काम करने वाले मजदूरों और जेसीबी बुलाने वाले व्यक्ति से कड़ी पूछताछ की जानी चाहिए।

छत्तीसगढ़ में अफीम का बढ़ता जाल: 3 हफ्ते में 5 बड़े मामले

नशे की अवैध खेती के मामले अब छत्तीसगढ़ के लिए नई बात नहीं रह गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले तीन सप्ताह में दुर्ग, बलरामपुर और रायगढ़ जैसे जिलों में अफीम की फसल पकड़ी जा चुकी है। धमतरी का यह पांचवां संदिग्ध मामला है जो प्रदेश की सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। संगठनों ने चिंता जताई कि अगर जंगलों और खेतों में इस तरह जहर उगाया जाएगा, तो राज्य की युवा पीढ़ी बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएगी।

जमीन के असली मालिक पर सस्पेंस: सरकारी है या निजी भूमि?

विवाद के केंद्र में रही वह जमीन किसके नाम पर दर्ज है, यह अभी भी रहस्य बना हुआ है। संगठनों ने प्रशासन से स्पष्ट करने को कहा है कि क्या वह जमीन किसी नेता की निजी संपत्ति है या सरकारी वन भूमि पर अतिक्रमण कर यह गोरखधंधा चल रहा था। उन्होंने मांग की है कि मौके से मिट्टी के नमूने लिए जाएं ताकि यह साबित हो सके कि वहां किस तरह की फसल उगाई गई थी।

प्रशासन का पक्ष: अपर कलेक्टर ने दिया जांच का भरोसा

इस पूरे हंगामे के बीच प्रशासन ने अपनी सफाई पेश की है। अपर कलेक्टर पवन प्रेमी ने माना कि नगरी-सिहावा क्षेत्र से अफीम की खेती की शिकायतें मिली हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन इस मामले को लेकर गंभीर है और संबंधित विभागों को पहले ही जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले या अवैध नशे की खेती करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो।

क्या मिट गए सबूत? मजदूरों से पूछताछ पर टिकी उम्मीद

भले ही जेसीबी चलाकर फसल को नष्ट करने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन जानकारों का कहना है कि जमीन से अफीम के अवशेष पूरी तरह खत्म करना नामुमकिन है। अब सबकी नजरें पुलिस की उस जांच पर टिकी हैं जिसमें खेत के आसपास रहने वाले ग्रामीणों और वहां काम करने वाले मजदूरों के बयान दर्ज होने हैं। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जांच की लीपापोती की गई, तो वे सीधे राज्य स्तर पर शिकायत करेंगे और मामले को कोर्ट तक ले जाएंगे।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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