
रायपुर: छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने ऐतिहासिक पहल की है। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) के पुनर्गठन की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद, प्रदेश के 21 जिलों में 500 से अधिक नई सहकारी समितियों के गठन का रास्ता साफ हो गया है। इस कदम से अब किसानों को कृषि ऋण, खाद-बीज और माइक्रो एटीएम जैसी बैंकिंग सुविधाएँ गाँव में ही मिलेंगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में एक नई आर्थिक क्रांति की शुरुआत होगी।

गांवों की समृद्धि का नया द्वार: PACS का पुनर्गठन
छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘सहकार से समृद्धि’ के विज़न को ज़मीन पर उतारते हुए अप्रैल 2025 में 532 नवीन बहुउद्देशीय पैक्स समितियों के गठन की अधिसूचना जारी की थी। दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 21 जिलों में इन समितियों का गठन सुनिश्चित हो चुका है।
इन नई समितियों के ज़रिए गाँवों में कई नवाचार भी शुरू किए जाएँगे। ये समितियाँ कॉमन सर्विस सेंटर, जनऔषधि केंद्र और किसान समृद्धि केंद्र जैसे कई महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में काम करेंगी, जिससे किसानों को ज़रूरी सुविधाएँ अपने ही गाँव में प्राप्त हो सकेंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस अभियान को केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के उस निर्देश से बल मिला, जिसमें उन्होंने PACS की संख्या बढ़ाने पर ज़ोर दिया था।

किसानों को मिलेगी बिचौलियों से आज़ादी
सरकार के इस कदम से राज्य के लाखों किसानों को सीधा लाभ पहुँचेगा और उन्हें आर्थिक आज़ादी मिलेगी। अब किसान अपने गाँव की ही समिति से कृषि ऋण ले सकेंगे और माइक्रो एटीएम से नकद निकासी जैसी बैंकिंग सेवाएँ भी प्राप्त कर सकेंगे।
इस व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और बैंकिंग सेवाओं की पहुँच गाँव-गाँव तक सुनिश्चित हो सकेगी। इन नई सहकारी समितियों के बनने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्र आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
इन जिलों में हुआ बदलाव:
धमतरी, दुर्ग, बिलासपुर, बालोद, कोरबा, जांजगीर-चांपा, बलरामपुर, कोंडागांव, कांकेर, बीजापुर, सूरजपुर, सुकमा, जशपुर, कोरिया, नारायणपुर, रायगढ़, सक्ती, बलौदाबाजार-भाटापारा, गरियाबंद, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जैसे 21 जिलों में नई सहकारी समितियाँ पूरी तरह अधिसूचित हो चुकी हैं।
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