
छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग द्वारा शराब को कांच की बोतलों के बजाय प्लास्टिक (आरपीईटी) की बोतलों में बेचने के फैसले पर विवाद खड़ा हो गया है। छत्तीसगढ़ बॉटल एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में आबकारी कमिश्नर आर. संगीता से मुलाकात कर इस निर्णय को वापस लेने की मांग की है। हालांकि, विभाग का कहना है कि यह सरकार की नीति का हिस्सा है। इस बदलाव से एक ओर जहां शराब की कीमतें कम होने और राजस्व बढ़ने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर हजारों लोगों के रोजगार और सेहत पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
आजीविका पर संकट: कांच रिसाइकिलिंग से जुड़े लाखों लोग होंगे प्रभावित
बॉटल एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज मलिक का कहना है कि प्रदेश में कांच की बोतलों की रिसाइकिलिंग का एक बहुत बड़ा और पुराना नेटवर्क काम कर रहा है। इस काम से कबाड़ी, छोटे कारोबारी और मजदूर मिलाकर लाखों लोगों के घर का चूल्हा जलता है। यदि सरकार प्लास्टिक की बोतलों को बढ़ावा देती है, तो कांच की बोतलों की मांग बाजार में पूरी तरह गिर जाएगी। एसोसिएशन के सदस्यों का तर्क है कि इस फैसले से जमीन स्तर पर काम करने वाले कामगारों के सामने बेरोजगारी का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।

सेहत से समझौता: प्लास्टिक में ‘लीचिंग’ का खतरा और बीमारियों का डर
एसोसिएशन के सदस्यों ने इस बदलाव के पीछे स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का भी हवाला दिया है। विशेषज्ञों और एसोसिएशन के सदस्यों का मानना है कि प्लास्टिक की बोतलों में लंबे समय तक शराब रखने से ‘लीचिंग’ की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसमें प्लास्टिक के हानिकारक रासायनिक तत्व शराब में घुल जाते हैं, जो इंसानी शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि इस फैसले को लागू करने से पहले किसी वैज्ञानिक अध्ययन या लैब रिपोर्ट के जरिए इसकी शुद्धता की जांच अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए।
राजस्व का गणित: 150 करोड़ का अतिरिक्त मुनाफा और सस्ती होगी शराब
दूसरी ओर, आबकारी विभाग इस फैसले को आर्थिक रूप से फायदेमंद मान रहा है। प्लास्टिक की बोतलों के इस्तेमाल से शराब की उत्पादन लागत कम होगी, जिसका सीधा लाभ ग्राहकों को मिलेगा। आबकारी निगम ने देशी और विदेशी शराब की कीमतों में प्रति पेटी 50 रुपये की कमी करने का प्रस्ताव दिया है। सरकार का अनुमान है कि इस कदम से शराब की खपत संतुलित होगी और विभाग को लगभग 150 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा। यही कारण है कि विभाग इस आदेश को वापस लेने के मूड में फिलहाल नजर नहीं आ रहा है।
नीति पर पुनर्विचार: कमिश्नर ने रिपोर्ट मांगी, मंत्री तक पहुंचेगा मामला
आबकारी कमिश्नर आर. संगीता ने स्पष्ट किया है कि विभाग फिलहाल सरकारी नीति के तहत ही काम कर रहा है। हालांकि, उन्होंने एसोसिएशन को आश्वासन दिया है कि यदि उनके पास प्लास्टिक बोतलों के नुकसान को लेकर कोई ठोस वैज्ञानिक रिपोर्ट है, तो वे उस पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। इस पूरे विषय को जल्द ही आबकारी मंत्री के सामने रखा जाएगा। फिलहाल प्लास्टिक बोतलों की मैन्युफैक्चरिंग में हो रही देरी की वजह से कांच की बोतलों का उपयोग कुछ समय के लिए जारी रह सकता है, लेकिन अंतिम फैसला सरकार की समीक्षा के बाद ही होगा।



