
केंद्र सरकार ने फसल वर्ष 2025-26 के लिए अफीम की खेती को लेकर अपनी वार्षिक लाइसेंसिंग नीति का ऐलान कर दिया है। इस नई नीति का सीधा फायदा मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के किसानों को मिलने वाला है। सरकार ने इस बार उदारता दिखाते हुए लाइसेंस की संख्या में करीब 23.5 प्रतिशत का इजाफा किया है। इसका मतलब है कि इस साल लगभग 1.21 लाख किसान अफीम पोस्ता की खेती करने के पात्र होंगे। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी इस नीति से खेती बाड़ी से जुड़े ग्रामीण इलाकों में उत्साह का माहौल है।
चिकित्सा जरूरतों को पूरा करने पर जोर
सरकार की इस पहल के पीछे मुख्य उद्देश्य मेडिकल क्षेत्र में होने वाली दवाओं की कमी को दूर करना है। अफीम से निकलने वाले एल्कलॉइड का इस्तेमाल गंभीर बीमारियों की दवाओं और दर्द निवारक गोलियों में किया जाता है। केंद्र सरकार चाहती है कि देश के भीतर ही इन जरूरी तत्वों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। यही वजह है कि अफीम फसल वर्ष 1 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 30 सितंबर 2026 तक के लिए यह विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है।
लाइसेंस पाने के लिए क्या है मानक?
नई नीति के तहत उन अफीम गोंद उत्पादकों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनका प्रदर्शन पिछले वर्षों में शानदार रहा है। जिन किसानों ने प्रति हेक्टेयर औसतन 4.2 किलोग्राम या उससे अधिक मॉर्फिन उपज (MQY-M) हासिल की है, उनका लाइसेंस बरकरार रखा जाएगा। सरकार उन पुराने अनुभवी किसानों पर भरोसा जता रही है जो निर्धारित गुणवत्ता के साथ खेती करने में सक्षम हैं। इससे न केवल फसल की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम भी मिल सकेगा।
15 हजार नए किसानों को मिलेगा मौका
इस साल की नीति की सबसे बड़ी खास बात यह है कि पिछले साल के मुकाबले 15 हजार अतिरिक्त किसानों को इस खेती से जोड़ा गया है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के चयनित जिलों में नए पट्टे बांटे जाएंगे। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस की यह वार्षिक नीति किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और उन्हें पारदर्शी तरीके से खेती का अधिकार देने के लिए बनाई गई है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
लापरवाही बरतने वालों पर गिरेगी गाज
जहाँ एक तरफ सरकार नए अवसर दे रही है, वहीं दूसरी ओर नियमों में सख्ती भी बरती गई है। पोस्ता भूसा सांद्रण (सीपीएस) पद्धति के तहत खेती करने वाले उन किसानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए जाएंगे जो पिछले साल अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर सके। साल 2024-25 के दौरान जिन किसानों ने प्रति हेक्टेयर 800 किलोग्राम की न्यूनतम योग्यता उपज का आंकड़ा पार नहीं किया, वे इस साल दौड़ से बाहर हो जाएंगे। सरकार चाहती है कि केवल गंभीर और उत्पादक किसान ही इस नियंत्रित खेती का हिस्सा बने रहें।
सुरक्षा और पारदर्शिता का रखा गया ध्यान
अफीम की खेती पूरी तरह से नारकोटिक्स विभाग की देखरेख में होती है। नई नीति में इस बात का खास ख्याल रखा गया है कि पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी हो। लाइसेंस आवंटन से लेकर फसल की तुलाई तक के नियमों को सरल लेकिन सख्त बनाया गया है। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से अवैध व्यापार पर लगाम लगेगी और वास्तविक किसानों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिल सकेगा।
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