
बिलासपुर: बिलासपुर में 4 नवंबर 2024 को हुए भीषण ट्रेन हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट में रेलवे सिस्टम की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। कमिशन ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) की रिपोर्ट के अनुसार यह हादसा तकनीकी खराबी से नहीं, बल्कि सीधे अफसरों की गलत अनुमति की वजह से हुआ। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस मेमू (MEMU) ट्रेन को चलाने की अनुमति दी गई थी, उसके लोको पायलट ने मनोवैज्ञानिक परीक्षण (Psychological Test) पास ही नहीं किया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि लोको पायलट के सुरक्षा नियमों की समझ संतोषजनक नहीं थी, बावजूद इसके उसे ड्यूटी पर लगाया गया था।
रेलवे बोर्ड के नियमों का उल्लंघन और 12 यात्रियों की मौत
सीआरएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रेन चलाने का सर्टिफिकेट जारी करने में गंभीर अनियमितताएं हुईं और सर्विस रिकॉर्ड सहित कई रजिस्टर अपडेट नहीं किए गए थे। यह सीधा रेलवे बोर्ड के 15 अक्टूबर 2024 के आदेश का उल्लंघन है, जिसमें स्पष्ट कहा गया था कि बिना मनोवैज्ञानिक परीक्षण पास किए किसी भी लोको पायलट को मेमू चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 4 नवंबर की शाम लालखदान के पास हुए इस हादसे में गेवरारोड से बिलासपुर आ रही मेमू ट्रेन ने खड़ी मालगाड़ी को टक्कर मारी, जिसमें लोको पायलट सहित 12 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई और 20 से अधिक यात्री घायल हुए।
CRS ने जांच की, जोन के तर्क को किया खारिज
हादसे के अगले ही दिन कोलकाता में पदस्थ मुख्य संरक्षा आयुक्त बीके मिश्रा ने अपनी टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया और दस्तावेजों की गहन जांच की। जांच के दौरान 91 से अधिक अधिकारी और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन को सही ठहराने के लिए यह दलील दी कि फेल लोको पायलट को असिस्टेंट लोको पायलट के साथ ड्यूटी दी जा सकती है। लेकिन सीआरएस ने इस तर्क को सीधा खारिज कर दिया।
अंतिम रिपोर्ट का इंतजार, तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही
रेलवे प्रशासन ने इस प्रारंभिक रिपोर्ट पर अपना जवाब देने की बात कही है। सीनियर डीसीएम अनुराग सिंह के अनुसार, प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद अब सीआरएस अंतिम रिपोर्ट जारी करेगा। फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय हो पाएगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, इस प्रारंभिक रिपोर्ट ने सुरक्षा प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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