कोल लेवी घोटाला: EOW ने पेश किया 9500 पन्नों का चालान, विधायक देवेंद्र यादव समेत 12 बने आरोपी, जानिए किन नेताओं और अफसरों के नाम शामिल

Chhattisgarh Coal Scam Case: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित कोयला लेवी घोटाला मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। जांच एजेंसी ने रायपुर की सुमीत कपूर की विशेष अदालत में 12 आरोपियों के खिलाफ 9500 पन्नों का छठा पूरक चालान (चार्जशीट) पेश किया है। इस पूरक चालान में विधायक देवेंद्र यादव, कांग्रेस नेता विनोद तिवारी और पूर्व विधायक चंद्रदेव राय सहित कई प्रमुख हस्तियों को आरोपी बनाया गया है।

कोर्ट पहुंचे कांग्रेस नेता, समन के बाद हुई आरोपियों की पेशी

Coal Levy Scam Update: मामले की सुनवाई के सिलसिले में आरोपी बनाए गए कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय और कांग्रेस नेता विनोद तिवारी रायपुर स्थित विशेष अदालत पहुंचे। एंटी करप्शन ब्यूरो और ईओडब्ल्यू ने मामले से जुड़े 9 आरोपियों को कोर्ट में उपस्थित होने के लिए समन जारी किया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट परिसर में समर्थकों और पुलिस बल की मौजूदगी से गहमागहमी का माहौल बना रहा।

विधायक देवेंद्र यादव का राज्य सरकार पर तीखा हमला

EOW Big Action in Raipur:अदालत में पेशी के लिए पहुंचने के दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए विधायक देवेंद्र यादव ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है, लेकिन राज्य सरकार की नीयत पर जनता को जरा भी विश्वास नहीं रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से जारी जांच के नाम पर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने की साजिश रची जा रही है।

बोले- जेल की सलाखें भी नहीं तोड़ सकीं हमारा हौसला

Chhattisgarh Coal Scam Explained: अपनी बात जारी रखते हुए विधायक ने कहा कि वे कांग्रेस और राहुल गांधी के निष्ठावान सिपाही हैं और इस राजनीतिक लड़ाई को अंत तक लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि पहले भी जेल की सलाखें उनके हौसले को डिगा नहीं पाई थीं, इसलिए सरकार के ऐसे किसी भी षड्यंत्र से वे डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता के सामने सच्चाई जल्द ही आएगी।

चिंतामणि महाराज को लेकर बीजेपी पर लगाया दोहरा रवैया अपनाने का आरोप

देवेंद्र यादव ने पूर्व नेता चिंतामणि महाराज का जिक्र करते हुए सत्ताधारी दल पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि जांच के शुरुआती चरण में एफआईआर के भीतर चिंतामणि महाराज का नाम प्रमुखता से शामिल था। हालांकि, जैसे ही वे भाजपा में शामिल हुए, उनका नाम अचानक जांच की फाइलों से गायब हो गया। उन्होंने इसे राजनीतिक लाभ के लिए मामलों को दबाने की योजना करार दिया।

क्या है छत्तीसगढ़ का बहुचर्चित कोल लेवी घोटाला?

वर्ष 2020 से 2022 के दौरान छत्तीसगढ़ में खदानों से कोयला परिवहन के लिए दी जाने वाली अनुमतियों में बदलाव किया गया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, ऑनलाइन ई-परमिट व्यवस्था को बदलकर मैन्युअल अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) देने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी प्रक्रिया की आड़ में खदानों से कोयला निकालने और गाड़ियों के सुगम आवागमन के बदले प्रति टन 25 रुपये की अवैध दर से वसूली करने वाला एक समानांतर सिंडिकेट खड़ा किया गया था।

500 करोड़ रुपये से अधिक की काली कमाई का अनुमान

जांच रिपोर्टों के अनुसार, दो वर्षों की इस अवधि में 25 रुपये प्रति टन की दर से लगभग 500 से 540 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध राशि जुटाई गई थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए रोजाना 2 से 3 करोड़ रुपये की नकदी एकत्र की जाती थी। इस काली कमाई का इस्तेमाल बेनामी संपत्तियां खरीदने, राजनीतिक अभियानों के खर्चों को उठाने और बिचौलियों व अधिकारियों के बीच बांटने के लिए किया जाता था।

12 प्रमुख नाम चालान में शामिल, जांच आगे भी जारी रहने के संकेत

ईओडब्ल्यू द्वारा दाखिल किए गए 9500 पन्नों के इस विशाल चालान में देवेंद्र यादव, विनोद तिवारी, चंद्रदेव राय, पीयूष साहू, आरपी सिंह, जोगेंद्र सिंह, राहुल मिश्रा, जेपी मौर्या, दीपेश टांक, रामगोपाल अग्रवाल, रामप्रताप सिंह और सुनील अग्रवाल को आरोपी बनाया गया है। कोर्ट द्वारा अब इन सभी के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों की समीक्षा की जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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