दिल्ली में दहाड़े छत्तीसगढ़ के शिक्षक: TET की अनिवार्यता के खिलाफ रामलीला मैदान में हल्लाबोल

देश की राजधानी दिल्ली का रामलीला मैदान शनिवार को देशभर से आए शिक्षकों के नारों से गूंज उठा। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के विरोध में ‘टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ के बैनर तले आयोजित इस राष्ट्रीय आंदोलन में छत्तीसगढ़ के शिक्षक नेताओं ने भी अपनी ताकत दिखाई। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष केदार जैन, मनीष मिश्रा और प्रांत अध्यक्ष रविंद्र राठौर के नेतृत्व में हजारों की संख्या में शिक्षक दिल्ली पहुंचे। शिक्षकों का कहना है कि टीईटी के नए नियमों के कारण उनकी नौकरी पर तलवार लटक रही है और सरकार का यह फैसला पूरी तरह से अनुचित है।

काले कानून के खिलाफ एकजुटता: छत्तीसगढ़ से पहुंचे हजारों शिक्षक

छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों और ब्लॉक स्तर से आए शिक्षकों ने दिल्ली के प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे केदार जैन ने बताया कि टीईटी की अनिवार्यता संबंधी नया कानून शिक्षकों के भविष्य के लिए किसी काले कानून से कम नहीं है। इस नियम के आने के बाद से देशभर के पुराने और अनुभवी शिक्षकों में केंद्र और राज्य सरकारों के प्रति जबरदस्त गुस्सा है। शिक्षकों का तर्क है कि जो शिक्षक बरसों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन पर इस तरह की परीक्षा थोपना उनकी सेवा शर्तों का उल्लंघन है।

नौकरी बचाने की जंग: ‘अनिवार्यता रद्द करो’ की उठी मांग

शिक्षक नेताओं ने मंच से संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपनी आजीविका बचाने की लड़ाई है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनीष मिश्रा और प्रांताध्यक्ष रविंद्र राठौर ने कहा कि इस कानून ने शिक्षकों की मानसिक शांति छीन ली है। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि सरकार तत्काल प्रभाव से टीईटी की अनिवार्यता को रद्द करे और इस विवादित कानून को वापस ले। छत्तीसगढ़ से कमलेश बिसेन, प्रदीप पांडे और ममता खालसा जैसे कई दिग्गज नेता अपने-अपने संगठनों के साथ इस प्रदर्शन में शामिल होकर आवाज बुलंद कर रहे हैं।

सरकार को सीधी चेतावनी: मांगें नहीं मानी तो ठप होगी स्कूलों की पढ़ाई

रामलीला मैदान से शिक्षक संगठनों ने केंद्र सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनकी मांगों पर संवेदनशीलता से विचार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र होगा। केदार जैन ने चेतावनी दी कि अगर काला कानून वापस नहीं लिया गया, तो देशभर के 28 राज्यों के करीब 20 लाख शिक्षक दिल्ली में डेरा डालेंगे। ऐसी स्थिति में स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाएगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। शिक्षक अब पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।

दिल्ली में छत्तीसगढ़ी तेवर: एकजुट होकर रची बड़ी आंदोलन की पटकथा

दिल्ली के इस प्रदर्शन में छत्तीसगढ़ी शिक्षकों के तेवर चर्चा का विषय रहे। भारी संख्या में पहुंचे पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने अनुशासित तरीके से अपनी बात रखी। इस आंदोलन के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले लोग अब अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने से नहीं हिचकेंगे। फिलहाल हजारों शिक्षक रामलीला मैदान में डटे हुए हैं और सरकार की ओर से किसी ठोस आश्वासन का इंतजार कर रहे हैं। इस महापड़ाव ने सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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