Chhattisgarhi Love Shayari: छत्तीसगढ़ी मयारू शायरी: अंतस के गोठ, पिरित के रंग

Chhattisgarhi Love Shayari: छत्तीसगढ़ी भाषा अपन मिठास, सादगी अउ आत्मीयता बर पूरी दुनिया म जाने जाते। जब बात पिरित (मया), सुरता (याद) अउ जिनगी के सुख-दुख ल व्यक्त करे के होथे, त छत्तीसगढ़ी सायरी मनखे के सीधा अंतस (दिल) म उतर जाते। ए आर्टिकल म हम आपके बर लेके आए हन छत्तीसगढ़ी के 12 अईसन चुनिंदा सायरी, जेमा मया के सुग्घर एहसास घलो हे, बिछड़े के दरद भी हे अउ छत्तीसगढ़िया संस्कृति के सुंदर रंग भी हे। आवव, ए सुग्घर सायरी मन के आनंद लेवन:

1. ओ बेरा के सुरता (बीते वक्त की यादें)

सरी जिनगी आंखी म एकठन सपना रहिगे,

कतको बछर बितगे फेर ओ बेरा के सुरता रहिगे।

कोनजनी कईसननता रहिस ओखर अउ मोर,

जम्मो मनखे भुलागे,

भईगे ओखरेच चेहरा के सुरता रहिगे।।

2. दगा अउ अंतस के पीरा (धोखा और दिल का दर्द)

मोला तय दगा देके

मोर दिल ल काबर दुखाय,

तोर सुरता रहि-रहि के आथे

तही मोर अंतस म समाय।।

3. मयारू बर जोजियाय (अपनों से लाड़ और शिकायत)

अपन मन के बात ल अपन मयारू ल बताय ल लगथे,

कभू-कभू मया म खिसीयाय ल लगथे।

कभू तो मेसेज कर दे कर संगवारी,

एकरो बर तोला जोजियाय ल लगथे।।

4. आंखी म आंखी (मयारू संग शरारत)

आंखी म आंखी झन मिलाबे ओ,

तोर नीन्द चुरा लेहू।

एक बार मोर से मया करके तो देख,

तोर डउका ल घलो छोड़ा देहू।।

5. पहली भेंट अउ हरेली तिहार (मिलने की खुशी)

कतका सुघ्घर होही ओ दिन,

जेन दिन भेंट तोर ले पहिली होही।

मोर मयारू मोर बर ओ दिन,

जईसे तिहार हरेली होही।।

6. छत्तीसगढ़ी हास्य-व्यंग्य सायरी (मजाकिया अंदाज)

गोबर कस मुलायम बाल

अउ छेना कस तोर गाल हे

तोर होंठ के लिबिस्टिक रानी

सरहा पताल कस लाल हे

अरे हरही गाय कस रेंगना

पातर कनिहा के तोर चाल हे

मया थोकन करले कइथव ओ

फेर बिलई गतर के…………….

घोड़ी कस तोर झार हे……..।।

7. मेंहदी अउ मयारू के रूप (रूप-सौंदर्य की तारीफ)

कईसे वो मयारू…….

अपन हाँथ म मेंहदी लगात हस

तै तो खुदेच फूल बरोबर हस

ओमा पत्ता के रंग चढ़ात हस

8. किस्मत के आघू मजबूरी (बेबसी का एहसास)

कतका मजबूर हव मे हा

ऐ किस्मत के आघू म

न तोला पाए के औकात हे

न तोला खोय के ताकत हे मोर म

9. पहिली नजर के मया (पहला प्यार)

पहिली बेखत म तैंय मिलेस

गोठ बात चिंन पहिचान होईस

नी जानत रहेन एक दुसर ल

मोला हरेक खुशी मिलिस!

सपना तोर देखवं दिन रात

तभे मया के अहिसास होईस

लागे रिहिस तोर बर मया

जिंवरा मोर धड़ धड़ धड़किस!

जिनगी म हमसफर बर

साल भर ले अगोरा रिहिस

दुनिया म जिनगी चलाय बर

पिरित के मोला मयारु मिलिस!!

(लेखक: मयारुक छत्तीसगढ़िया)

10. बइहा मन के गोठ (दीवानगी और इंतजार)

हिम्मत नइ होवत हे हांसे के आज मोला ,

रहि रहि के रोवावत हे ओकर सुरता आज मोला ,

सुमिरत हव रहि रहि के मेहा आज ओला ,

गुनत हव रहि रहि के मेहा आज ओला ,

तरसत हवय कान तको सुने बर गोठ ओकर,

मया मा बइहा हो जहु तइसे लागत हे आज मोला

!! मया ! मया ! भारी मया !!

आना तै मोर मयारू

11. छत्तीसगढ़िया खान-पान अउ सुघ्घर बोरी-बासी

“बासी म ब्रम्हा बसे ,

अऊ भात में भगवान ,

साग म सरस्वती बसे ,

चटनी म चारो धाम ।

अब बता भाई..

इहां मैगी के का काम…”

जय छत्तीसगढ़

12. रस्ता जोहत आंखी (विरह और वापसी की आस)

आंखी ह रस्ता जोहत हे ,

साँस मोर तोला खोजत हे ,

लहुट आजा मोर पिरीत के रानी,

तोर बर मन मोर रोवत हे ।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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