
CG Corruption Case: छत्तीसगढ़ के श्रम विभाग में एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। सितंबर 2024 में विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सरकारी खजाने को भारी चपत लगाने का आरोप लगा है। आरटीआई से मिले दस्तावेजों के आधार पर यह दावा किया गया है कि बिना टेंडर प्रक्रिया के एक निजी फर्म को 1.35 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। आरटीआई कार्यकर्ता आशीष देव सोनी ने साक्ष्यों के साथ इस पूरे मामले का भंडाफोड़ किया है, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है।
नाश्ते और इवेंट मैनेजमेंट में बेहिसाब खर्च
इस आयोजन के दौरान खर्च के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। रिकॉर्ड के अनुसार कार्यक्रम में 5000 से 8000 श्रमिकों के आने का अनुमान था, लेकिन मौके पर केवल 4000 कुर्सियां लगाई गई थीं। 3 लाख रुपये के स्नैक्स बांटे गए, लेकिन इवेंट मैनेजमेंट का कुल खर्च इस कदर बढ़ाकर दिखाया गया कि हर श्रमिक पर करीब 3300 रुपये का खर्च दर्शाया गया। मेसर्स व्यापक इंटरप्राइजेस नाम की फर्म को इस एक दिवसीय आयोजन के लिए करोड़ों रुपये थमा दिए गए, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
टेंडर प्रक्रिया को ताक पर रखने का आरोप
श्रम विभाग के रायपुर कार्यालय पर आरोप है कि उन्होंने इस बड़े काम के लिए कोई स्वतंत्र निविदा (टेंडर) जारी नहीं की। अधिकारियों ने समय की कमी का बहाना बनाकर रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड की पुरानी दरों पर ही काम कराने का निर्णय लिया। हैरानी की बात यह है कि स्मार्ट सिटी के पैनल में 5 फर्में शामिल थीं, लेकिन विभाग ने केवल मेसर्स व्यापक इंटरप्राइजेस से ही प्रस्ताव लिया। बाकी 4 अन्य फर्मों को न तो कोई मौका दिया गया और न ही उनसे कोटेशन मांगे गए। यह पक्षपातपूर्ण रवैया भ्रष्टाचार के संदेह को और पुख्ता करता है।
पुरानी संस्था के साथ फिर से सांठगांठ
यह पहली बार नहीं है जब इस विभाग और संबंधित फर्म का नाम किसी घोटाले में आया है। इससे पहले कांग्रेस सरकार के समय हुए ‘बोरे-बासी’ कार्यक्रम में भी करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े के आरोप लगे थे। उस समय भी आयोजन की जिम्मेदारी इसी मेसर्स व्यापक इंटरप्राइजेस को सौंपी गई थी। अब भाजपा सरकार के कार्यकाल में उसी पुरानी तर्ज पर दोबारा गड़बड़ी की बात सामने आ रही है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल विधायकों की एक समिति भी जांच कर रही है।
जिम्मेदार अधिकारियों की सफाई और जांच की मांग
पूरे मामले पर जब श्रम विभाग के प्रभारी आयुक्त और सचिव हिमशिखर गुप्ता से संपर्क किया गया, तो उन्होंने फिलहाल जानकारी होने से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि वे अभी चुनावी ड्यूटी पर राज्य से बाहर हैं और दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद ही कोई आधिकारिक टिप्पणी कर पाएंगे। दूसरी ओर, आरटीआई कार्यकर्ता ने मांग की है कि सरकारी पैसे के इस दुरुपयोग की निष्पक्ष जांच हो और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसे घोटालों पर लगाम लग सके।



