जगदलपुर की नीट छात्रा हरिका के परिजनों से मिले छत्तीसगढ़ के CJP नेता, आर्थिक मुआवजे और न्याय की उठाई मांग, परिजनों की कही दी ये बड़ी बात…

NEET Aspirant Harika Rao Naidu Jagdalpur: मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) में अपेक्षित सफलता न मिलने से हताश होकर जगदलपुर की होनहार छात्रा हरिका राव नायडू द्वारा उठाए गए आत्मघाती कदम ने शहरवासियों को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना ने परीक्षा व्यवस्था से लेकर छात्रों पर बनने वाले मानसिक दबाव पर फिर से बहस छेड़ दी है। इस कठिन समय में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रमुख महेंद्र भारद्वाज शनिवार को जगदलपुर स्थित आड़ावाल पहुंचे और पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की।

CJP प्रदेश प्रमुख ने परिजनों से की मुलाकात

जगदलपुर के आड़ावाल पहुंचकर महेंद्र भारद्वाज ने पीड़ित परिवार से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में पार्टी परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने का भरोसा देते हुए कहा कि किसी भी होनहार छात्र का इस तरह जाना दुखद है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से हरिका के परिजनों को उचित आर्थिक सहायता और मुआवजा प्रदान करने की मांग रखी।

परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग

मुलाकात के दौरान सीजेपी प्रमुख ने नीट-यूजी जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यवस्था की कमियों और अत्यधिक दबाव के कारण देश भर में युवा ऐसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं, जिस पर तुरंत रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

अगस्त-सितंबर से शुरू होगा ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान

महेंद्र भारद्वाज ने बताया कि यह केवल एक छात्रा का मामला नहीं है, बल्कि देश के लाखों उन युवाओं की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इस दिशा में जन जागरूकता फैलाने के लिए सीजेपी अगस्त और सितंबर महीने से ‘क्या बोलती पब्लिक अभियान’ की शुरुआत करेगी। इस मुहिम के जरिए शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर आम लोगों और छात्रों की राय जुटाई जाएगी।

बुनियादी शैक्षणिक संसाधनों में सुधार की जरूरत

पार्टी की ओर से कहा गया कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार केवल परीक्षा के आयोजन तक सीमित नहीं होना चाहिए। वास्तविक सुधार के लिए सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थानों में योग्य शिक्षकों की उपलब्धता, अध्ययन सामग्री और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने वाला माहौल तैयार करना जरूरी है। जब तक जमीनी स्तर पर पढ़ाई का माहौल सुधरेगा नहीं, तब तक छात्रों पर से परीक्षा का अतिरिक्त तनाव कम नहीं होगा।

परिजनों का दर्द: कोई मुआवजा नहीं कर सकता कमी पूरी

घटना से गहरे सदमे में डूबे परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन है। हरिका के दादा प्रकाश राव नायडू ने सरकार और परीक्षा प्रणाली की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि देश में इस तरह के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन कोई ठोस नीति नहीं बन पा रही है। उन्होंने कहा कि उनकी पोती के जाने से जो खालीपन आया है, उसकी भरपाई दुनिया का कोई भी मुआवजा नहीं कर सकता।

युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर ठोस नीति की आवश्यकता

अब मुख्य सवाल यह खड़ा हो रहा है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलने के साथ-साथ क्या व्यवस्था में ऐसा बदलाव आएगा जिससे भविष्य में किसी छात्र को ऐसा कदम न उठाना पड़े। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि असफलता के बाद छात्रों को मार्गदर्शन और काउंसिलिंग देने की मजबूत प्रणाली विकसित की जानी चाहिए, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव किसी युवा की जान पर भारी न पड़े।

Also Read: धमतरी में नशे और अकेलेपन की बलि चढ़ा युवा: पत्नी के अलग होने से तनाव में थे मिलन साहू, फांसी लगाकर दी जान

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button