
Dhamtari News: छत्तीसगढ़ के धमतरी शहर से लगभग 6 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम भटगांव के मजराटोला में रविवार को एक महिला के अंतिम संस्कार को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया। धर्मांतरण के आरोपों के चलते स्थानीय समाज और ग्रामीणों ने शव के अंतिम संस्कार में शामिल होने से साफ मना कर दिया। इस वजह से गांव में लगभग पांच घंटे तक गहमागहमी और हंगामे की स्थिति बनी रही। बाद में परिजनों द्वारा सनातन रीति-रिवाज मानने पर सहमति जताने के बाद ही ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार की अनुमति दी।
3 अक्टूबर की रात हुई थी महिला की मौत, सुबह अंतिम संस्कार पर शुरू हुआ विवाद
Dhamtari Conversion Controversy: जानकारी के अनुसार, मजराटोला निवासी सुरेश ध्रुव की पत्नी सरस्वती ध्रुव का निधन 3 अक्टूबर की रात हो गया था। रविवार सुबह जब परिजन शव के अंतिम संस्कार की तैयारियां कर रहे थे, तभी समाज के लोगों ने परिवार पर धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए सामाजिक सहयोग देने से इंकार कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि यह परिवार पिछले कुछ वर्षों से दूसरे धर्म की प्रार्थना सभाओं में शामिल हो रहा था।

गांव में बैठी पंचायत, मौके पर पहुंचे विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता
Dhamtari Bhatgaon Incident: विवाद बढ़ता देख गांव में आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें ग्रामीणों और परिजनों के बीच काफी देर तक चर्चा चलती रही। घटना की जानकारी मिलते ही विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के स्थानीय पदाधिकारी व कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए। गांव के चौराहे पर घंटों चली वार्ता के दौरान सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय स्तर पर सतर्कता बरती गई।
चार साल पहले ईसाई धर्म अपनाने का आरोप, परिवार ने स्वीकार की घर वापसी की शर्त
ग्रामीणों ने बैठक में आरोप लगाया कि सुरेश का परिवार पिछले चार वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहा था। वार्ता के दौरान परिजनों ने अपनी गलती स्वीकार की और भविष्य में दोबारा धर्मांतरण न करने तथा अपने मूल सनातन धर्म में बने रहने का वचन दिया। समाज के बुजुर्गों और प्रतिनिधियों ने घर वापसी की शर्त पर ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू करने की सहमति दी।
गंगाजल आचमन और तिलक के बाद हुई घर वापसी, फिर हुआ अंतिम संस्कार
शर्तों के अनुसार, सुरेश और उसके परिवार के सदस्यों को पवित्र गंगाजल पिलाया गया और माथे पर तिलक लगाकर विधिवत रूप से उनकी घर वापसी कराई गई। इसके बाद परिवार ने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार करने की बात स्वीकार की। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ग्रामीणों की मौजूदगी में महिला के शव को श्मशान घाट ले जाया गया और उसका दाह संस्कार संपन्न हुआ।
सामाजिक समन्वय से सुलझा मामला, गांव में बना हुआ है शांति का माहौल
पांच घंटे तक चले लंबे गतिरोध के बाद मामला आपसी सहमति और सामाजिक समन्वय से शांत हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सामाजिक परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन करना सभी के लिए जरूरी है। घटना के बाद गांव में स्थिति सामान्य है और सभी पक्षों ने शांति बनाए रखने की अपील की है।



