
छत्तीसगढ़ के धमतरी, दुर्ग और कबीरधाम जिलों में चल रही स्कूली परीक्षाओं में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां कक्षा चौथी, छठी और सातवीं के वार्षिक परीक्षा के प्रश्नपत्र बिल्कुल एक जैसे पाए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि अलग-अलग जिलों के लिए अलग प्रश्नपत्र तैयार करने का नियम है, लेकिन यहां सवालों से लेकर निर्देश और फॉर्मेट तक में रत्ती भर भी फर्क नहीं मिला। इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठने लगी हैं।
30 मार्च से शुरू हुई थी परीक्षा
प्रदेश में 30 मार्च से वार्षिक परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। शुरुआती मिलान में पता चला कि चौथी और सातवीं कक्षा के हिंदी के पेपर और छठी कक्षा के गणित के पेपर पूरी तरह मेल खा रहे हैं। हालांकि अभी सिर्फ तीन कक्षाओं की ही गड़बड़ी उजागर हुई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि बाकी विषयों और कक्षाओं के पेपरों में भी यही खेल हो सकता है। इस समानता ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
नियमों की सरेआम अनदेखी
लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर ने फरवरी 2026 में स्पष्ट गाइडलाइन जारी की थी। इसके मुताबिक हर जिले को अपनी अलग प्रश्नपत्र निर्माण समिति और मॉडरेशन समिति बनानी थी। इन समितियों का काम ब्लूप्रिंट के आधार पर तीन अलग सेट तैयार करना था ताकि गोपनीयता और निष्पक्षता बनी रहे। इसके बावजूद तीन अलग-अलग जिलों में हूबहू एक जैसे पेपर मिलना साफ तौर पर सरकारी आदेशों की अवहेलना और बड़ी लापरवाही का सबूत है।
संयोग नहीं सोची-समझी चूक
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने इस पूरे मामले को लेकर मोर्चा खोल दिया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि तीन अलग जिलों के प्रश्नपत्रों का शत-प्रतिशत एक जैसा होना कोई इत्तेफाक नहीं हो सकता। जब हर जिले की अपनी अलग कमेटी है, तो सवाल और उनका क्रम एक जैसा कैसे हो सकता है? शिक्षकों का मानना है कि यह केवल काम से बचने या मिलीभगत का नतीजा है, जिसने बच्चों के भविष्य और परीक्षा की गंभीरता के साथ खिलवाड़ किया है।
उच्चस्तरीय जांच की उठी मांग
मामले के तूल पकड़ते ही शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने शासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। डॉ. रमेश कुमार चन्द्रवंशी और उनकी टीम का कहना है कि इस मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए कि आखिर ये पेपर कहां से लीक हुए या किसने एक ही फाइल को तीनों जिलों में कॉपी-पेस्ट कर दिया। एसोसिएशन ने दोषी अधिकारियों और समितियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति न हो।
शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
इस पेपर कांड ने छत्तीसगढ़ की स्कूली शिक्षा व्यवस्था के भीतर की खामियों को उजागर कर दिया है। अभिभावकों और शिक्षकों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि जब सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर परीक्षाएं कराती है, तो इतनी बुनियादी सुरक्षा का ध्यान क्यों नहीं रखा गया। अब सबकी नजरें विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या इन परीक्षाओं को रद्द किया जाएगा या केवल खानापूर्ति कर मामला दबा दिया जाएगा।



