Dhamtari Beef Case New Update: धमतरी गौमांस कांड में नया मोड़, गांड़ा समाज ने किया कलेक्टोरेट का घेराव, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन, जाने क्या है इनकी मांगे

Dhamtari Beef Case New Update: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित साल्हेवार पारा क्षेत्र में पिछले दिनों कथित तौर पर गौमांस बरामद होने का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना के विरोध में मंगलवार को मूल छत्तीसगढ़िया सर्व गांड़ा समाज के बैनर तले सैकड़ों लोगों ने जिला कलेक्टोरेट कार्यालय का घेराव कर उग्र प्रदर्शन किया। अपनी सामाजिक अस्मिता को लेकर आक्रोशित लोग प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में धमतरी पहुंचे थे। कलेक्टोरेट परिसर के बाहर जमकर नारेबाजी करने के बाद समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से महामहिम राज्यपाल के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

‘गांड़ा बस्ती’ नाम इस्तेमाल करने पर जताया कड़ा विरोध

प्रदर्शनकारियों और समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों ने कहा कि साल्हेवार पारा में हुई इस विवादित घटना के बाद से स्थानीय समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उस पूरे इलाके को बार-बार ‘गांड़ा बस्ती’ कहकर प्रचारित किया जा रहा है। समाज के लोगों का कहना है कि किसी एक व्यक्ति की गलत हरकत की वजह से पूरे क्षेत्र और जाति का नाम इस तरह उछालने से उनकी सामाजिक छवि को गहरा धक्का लगा है। इस भ्रामक प्रचार के कारण आम जनता के बीच पूरे समाज के प्रति एक गलत धारणा बन रही है, जिससे युवाओं और बच्चों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।

विवादित क्षेत्र की वास्तविक जनसांख्यिकी और निवासियों की जाति जांचने की अपील

सर्व गांड़ा समाज ने जिला प्रशासन के सामने यह मुख्य मांग रखी है कि साल्हेवार पारा के उस प्रभावित इलाके का एक विशेष सर्वे कराया जाए। इस जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि वर्तमान में वहां असल में किस जाति और वर्ग के लोग निवास कर रहे हैं। समाज के पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि सरकारी रिकॉर्ड और धरातल पर वहां गांड़ा समाज के लोगों की बहुलता नहीं है, तो फिर उस क्षेत्र को इस नाम से पुकारना तुरंत बंद किया जाना चाहिए और सरकारी फाइलों में भी इसका नाम बदला जाना चाहिए।

मुख्य आरोपी के जाति प्रमाण पत्र और पारिवारिक पृष्ठभूमि के सत्यापन की मांग

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रांतीय अध्यक्ष प्रदीप कुमार कुलदीप और प्रदेश उपाध्यक्ष देवशरण नाग ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गौमांस मामले में पकड़ा गया मुख्य आरोपी खुद को गांड़ा समाज का बताकर कानून से बचने का प्रयास कर रहा है, जबकि उसका हमारे समाज से दूर-दूर तक कोई पारिवारिक या सामाजिक संबंध नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि आरोपी की वास्तविक जाति और पहचान की गहनता से कड़ाई से जांच की जाए ताकि किसी बाहरी अपराधी की वजह से एक मूल छत्तीसगढ़िया समाज को बेवजह बदनाम न होना पड़े।

पारंपरिक रूप से कोटवारी और बुनकर जैसे सम्मानजनक कार्यों से जुड़ा है समाज

समाज के बुजुर्गों और प्रतिनिधियों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ का गांड़ा समाज ऐतिहासिक रूप से गांवों में कोटवारी, पारंपरिक हथकरघा बुनाई, देव सेवा, गायता पुजारी और शुभ अवसरों पर बाजा बजाने जैसे पवित्र और सम्मानजनक कार्यों से जुड़ा रहा है। उनका गौमांस के अवैध कारोबार से कभी कोई सरोकार नहीं रहा है। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि पड़ोसी राज्य ओडिशा से आकर यहां बसे कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के लोग इस जाति के नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे यहां के मूल निवासियों को अपमान झेलना पड़ रहा है।

बस्ती का नाम डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर रखने का प्रस्ताव

सौंपे गए ज्ञापन में समाज ने प्रशासन के सामने एक और महत्वपूर्ण मांग रखी है कि साल्हेवार पारा स्थित इस विवादित बस्ती का नाम बदलकर तत्काल प्रभाव से भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर कर दिया जाए। इसके साथ ही, गौमांस की अवैध तस्करी, कटाई और बिक्री के इस पूरे सिंडिकेट में शामिल सभी असली दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी धाराओं के तहत सख्त एक्शन लिया जाए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मौके पर मौजूद नायब तहसीलदार योगेश साहू ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगें जल्द ही उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दी जाएंगी।

मांगें पूरी न होने पर पूरे छत्तीसगढ़ में बड़ा आंदोलन शुरू करने की दी गई चेतावनी

कलेक्टोरेट के मुख्य गेट पर अपनी मांगों को लेकर अड़े समाज के लोगों ने साफ किया कि वे वर्तमान में कानून व्यवस्था का सम्मान करते हुए केवल शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। महिला नेत्री देव कुमारी नरेंद्र सिंह चौहान सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि उन्हें शासन और प्रशासन की निष्पक्षता पर पूरा भरोसा है। हालांकि, समाज ने प्रशासन को सचेत करते हुए यह चेतावनी भी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तय समय सीमा के भीतर उचित निर्णय नहीं लिया गया और भ्रामक नामकरण पर रोक नहीं लगी, तो आने वाले दिनों में पूरे प्रदेश स्तर पर एक बड़ा उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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