
Amit Baghel Baloda Bail Rejected: जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के अध्यक्ष अमित बघेल की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) ने बलौदा बाजार हिंसा और आगजनी मामले में उनकी नियमित जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। जिला पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद अमित बघेल ने राहत के लिए बिलासपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। इस न्यायिक फैसले के बाद अमित बघेल को फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे ही रहना पड़ेगा।
निचली अदालत के बाद हाईकोर्ट से भी मायूसी, कोतवाली पुलिस ने दर्ज किए हैं कई गंभीर मामले
अमित बघेल को बलौदा बाजार कोतवाली पुलिस ने शहर में हुई भीषण हिंसक घटनाओं और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की साजिश में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत कई अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज किए हैं। इससे पहले बलौदा बाजार की निचली जिला अदालत ने भी अपराध की प्रकृति को गंभीर मानते हुए उनकी रिहाई की अर्जी को नामंजूर कर दिया था। इसके बाद ऊपरी अदालत से भी राहत न मिलने के कारण जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं को बड़ा झटका लगा है।
जानिए क्या है पूरा विवाद, पूज्य जैतखाम में तोड़फोड़ के बाद सुलग उठी थी बलौदा बाजार की धरती
इस पूरे सियासी और सामाजिक बवाल की शुरुआत गिरौधपुरी धाम में हुई एक अप्रिय घटना से हुई थी। कुछ अज्ञात असामाजिक तत्वों ने सतनामी समाज के पवित्र धार्मिक स्थल में स्थापित पूज्य जैतखाम को क्षतिग्रस्त कर दिया था। हालांकि पुलिस ने इस मामले में तुरंत तत्परता दिखाते हुए तीन स्थानीय आरोपियों को पकड़कर जेल भेज दिया था, लेकिन सतनामी समाज के लोग पुलिस की इस शुरुआती थ्योरी और कार्रवाई से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं थे। समाज के विभिन्न संगठन इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग पर अड़े हुए थे, जिसके बाद राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने मामले की न्यायिक जांच कराने की आधिकारिक घोषणा भी की थी।
10 जून को प्रदर्शन ने लिया था हिंसक रूप, उपद्रवियों ने कलेक्टर और एसपी दफ्तर को फूंक दिया था
गृहमंत्री की घोषणा के बावजूद असंतोष खत्म नहीं हुआ और विरोध प्रदर्शन के लिए एक विशाल जनसभा का आह्वान किया गया। इसी सिलसिले में हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी बलौदा बाजार के जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के पास मैदान में इकट्ठा हुए थे। शुरुआत में प्रदर्शन पूरी तरह शांत था, लेकिन अचानक कुछ उपद्रवी तत्वों ने माहौल को बिगाड़ दिया और आंदोलन पूरी तरह हिंसक हो गया। उग्र भीड़ ने जिला मुख्यालय परिसर के भीतर जमकर तांडव मचाते हुए पूरे कलेक्टर और एसपी कार्यालय भवन को पेट्रोल बम और आग के हवाले कर दिया था, जिससे पूरी इमारत धू-धू कर जल गई थी।
सरकारी खजाने को लगी थी 12.53 करोड़ की चपत, अब तक 187 उपद्रवी भेजे जा चुके हैं जेल
प्रशासनिक और तकनीकी आकलन के मुताबिक, इस भीषण आगजनी के कारण कलेक्ट्रेट में रखे हजारों जरूरी सरकारी दस्तावेज, रिकॉर्ड और सैकड़ों गाड़ियां जलकर राख हो गई थीं, जिससे सरकारी खजाने को करीब 12 करोड़ 53 लाख रुपये का भारी-भरकम नुकसान हुआ था। इस अप्रत्याशित हिंसा के बाद राज्य सरकार के निर्देश पर पुलिस ने कड़ा एक्शन लिया। पूरे मामले में पुलिस ने अलग-अलग थानों में कुल 43 एफआईआर दर्ज की हैं, जिसके तहत कार्रवाई करते हुए अमित बघेल सहित अब तक कुल 187 दंगाइयों को चिन्हित कर जेल भेजा जा चुका है।



