यहां स्थित है प्रदेश का पहला छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर, जानिए कैसे हुई थी स्थापना

First Chhattisgarh Mahtari Mandir: छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर पूरे प्रदेश में उत्साह का माहौल है। एक नवंबर दो हजार को पृथक राज्य बनने के बाद से हर साल इस दिन को गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस खास मौके पर धमतरी जिले के कुरूद स्थित प्रदेश के पहले ‘छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर’ में श्रद्धालुओं की चहल-पहल देखी जा रही है। आम नागरिक और स्थानीय श्रद्धालु स्थापना दिवस के अवसर पर मंदिर पहुंचकर छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा-अर्चना कर रहे हैं और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

पूर्व विधायक गुरुमुख सिंह होरा ने कराया था मंदिर का निर्माण

Kurud News: कुरूद स्थित इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण छत्तीसगढ़ राज्य बनने से पहले ही हो चुका था। वर्ष 1995 में तत्कालीन पूर्व विधायक गुरुमुख सिंह होरा ने कुरूद में छत्तीसगढ़ महतारी के भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था। इसके बाद वर्ष 1996 में मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हुआ और प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा कराई गई। तब से लेकर आज तक इस मंदिर में स्थानीय लोगों की अटूट आस्था जुड़ी हुई है और नवरात्रि के दौरान यहां दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है।

इसी मंदिर की प्रतिमा से मिली प्रदेशभर को नई पहचान

Chhattisgarh Rajyotsav 2026 Special: मध्य प्रदेश शासन के दौर में बना यह मंदिर आगे चलकर पूरे राज्य के लिए प्रेरणास्रोत साबित हुआ। पृथक छत्तीसगढ़ राज्य का गठन होने के बाद इस मंदिर की ख्याति तेजी से फैली। पूर्ववर्ती सरकारों ने कुरूद मंदिर में स्थापित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा के स्वरूप को ही आधार मानकर प्रदेश के सभी जिलों, प्रशासनिक कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर प्रतिमाएं स्थापित कराईं। आज प्रदेशवासी छत्तीसगढ़ महतारी के जिस स्वरूप का दर्शन करते हैं, उसकी मुख्य परिकल्पना इसी मंदिर से ली गई है।

स्थापना दिवस पर श्रद्धालुओं का मंदिर में उमड़ा हुजूम

राज्योत्सव के इस पावन अवसर पर सुबह से ही स्थानीय नागरिक और श्रद्धालु मंदिर परिसर पहुंचने लगे। हालांकि विशेष दिवस पर प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर मिली-जुली चर्चाएं भी होती रहीं। इसके बावजूद मंदिर के पुजारी और आम श्रद्धालु परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ में जुटे रहे। दूर-दराज से आने वाले लोगों के लिए यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता और पहचान का एक मजबूत प्रतीक भी है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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